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विजेंदर सिंह और गौरव वल्लभ का मोहभंग, निरुपम पर एक्शन... कांग्रेस ने 24 घंटे में गंवाए तीन बड़े चेहरे

कांग्रेस का आज एक और झटका लगा है. 2 दिन में 3 नेता पार्टी से चले गए हैं. बुधवार को विजेंदर सिंह और संजय निरुपम गए. गुरुवार को तेजतर्रार प्रवक्ता गौरव वल्लभ ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है. गौरव वल्लभ ने पार्टी मल्लिकार्जुन खरगे को इस्तीफे की एक लंबी चौड़ी चिट्ठी भी लिखी है.

कांग्रेस से दिग्गज नेताओं के साथ छोड़ने का सिलसिला जारी है. कांग्रेस से दिग्गज नेताओं के साथ छोड़ने का सिलसिला जारी है.
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 04 अप्रैल 2024,
  • अपडेटेड 3:55 PM IST

लोकसभा चुनाव के प्रचार ने जोर पकड़ लिया है और मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस को झटके पर झटके लग रहे हैं. 24 घंटे के अंदर पार्टी ने तीन बड़े चेहरे गंवा दिए हैं. बुधवार दोपहर में अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाज विजेंदर सिंह ने कांग्रेस छोड़कर बीजेपी जॉइन कर ली. कुछ ही घंटे बाद कांग्रेस ने संजय निरुपम को पार्टी से निकाल दिया. गुरुवार सुबह पार्टी प्रवक्ता गौरव वल्लभ ने भी अचानक कांग्रेस का साथ छोड़ दिया है. ये तीनों नेता हरियाणा, महाराष्ट्र और राजस्थान में बड़े चेहरे माने जाते हैं. चुनाव के बीच कांग्रेस को यह बड़ा नुकसान माना जा रहा है. 

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विजेंदर सिंह ने क्यों छोड़ा कांग्रेस का साथ?

ओलिंपिक्स पदक विजेता और अंतरराष्ट्रीय बॉक्सर विजेंदर सिंह (38 साल) कांग्रेस छोड़कर बीजपी में शामिल हो गए हैं. बुधवार को बीजेपी मुख्यालय में विजेंदर का स्वागत किया गया. विजेंदर मंगलवार रात तक कांग्रेस के समर्थन में सोशल मीडिया पर पोस्ट कर रहे थे. इस बीच, बुधवार दोपहर खबर आई कि विजेंदर ने कांग्रेस छोड़ दी है और बीजेपी का दामन थाम लिया है. विजेंदर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पार्टी का काम करेंगे. देश-दुनिया में हमारे खिलाड़ियों का मान-सम्मान बढ़ा है. विजेंदर ने साल 2019 में राजनीति में कदम रखा और कांग्रेस के टिकट पर साउथ दिल्ली से चुनाव लड़े. हालांकि, वो बीजेपी के रमेश बिधूड़ी से हार गए थे. 

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विजेंदर जाट समाज से आते हैं और चर्चाएं हैं कि वो इस बार अपने गृह क्षेत्र भिवानी सीट से चुनाव लड़ना चाहते थे. हालांकि, कांग्रेस मथुरा से टिकट देकर हेमा मालिनी के खिलाफ मैदान में उतारने की तैयारी में थी. टिकट का ऐलान होने से ठीक पहले उन्होंने पाला बदल लिया. फिलहाल, बीजेपी ने हरियाणा की सभी सीटों पर अपने उम्मीदवार उतार दिए हैं. जानकारों का कहना है कि विजेंदर के जरिए बीजेपी हरियाणा, पश्चिमी यूपी और राजस्थान में बड़ी संख्या में जाट वोटर्स को साधने की कोशिश करेगी.

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महाराष्ट्र में अब संजय निरुपम की भी कांग्रेस से विदाई

महाराष्ट्र कांग्रेस में उठा-पटक का तूफान थमता नहीं दिख रहा है. कांग्रेस ने पार्टी विरोधी बयानबाजी पर संजय निरुपम 6 साल के लिए बाहर कर दिया है. जबकि निरुपम ने कहा- मैंने खुद पार्टी से इस्तीफा दे दिया है. उसके बाद पार्टी ने सस्पेंड करने का प्रेस नोट जारी किया. इससे पहले महाराष्ट्र में अशोक चव्हाण और मिलिंद देवड़ा ने भी साथ का साथ छोड़ा था. निरुपम लोकसभा और राज्यसभा दोनों के सदस्य रहे हैं. उन्होंने लोकसभा चुनाव में शिवसेना (यूबीटी) के साथ सीट बंटवारे की बातचीत के बीच पार्टी के शीर्ष नेतृत्व पर निशाना साधा था. उसके बाद कांग्रेस ने पहले स्टार कैंपनर्स की लिस्ट से बाहर किया, फिर से पार्टी से निकाल दिया. निरुपम ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को भेजे गए अपने इस्तीफे के मेल का स्क्रीनशॉट शेयर किया और एक्स पर लिखा, ऐसा लगता है कि पार्टी ने कल रात मेरा इस्तीफा मिलने के तुरंत बाद निष्कासन लेटर जारी करने का फैसला किया. इतनी तत्परता देखकर अच्छा लगा.

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निरुपम मुंबई उत्तर से सांसद रहे हैं, लेकिन इस बार वो मुंबई उत्तर-पश्चिम सीट से दावेदारी कर रहे थे. इस बीच, उद्धव ठाकरे गुट ने एकतरफा फैसला लिया और मुंबई की छह लोकसभा सीटों में से चार पर अपने उम्मीदवार घोषित कर दिए, जिसमें मुंबई उत्तर-पश्चिम सीट भी शामिल थी. इस बात से निरुपम खफा हो गए. उन्होंने पहले भी सीट बंटवारे में उद्धव गुट के हावी होने पर नाराजगी जताई थी. 2014 के लोकसभा चुनाव में निरुपम मुंबई उत्तर-पश्चिम सीट से बीजेपी के गोपाल शेट्टी से हार गए थे.

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तेजतर्रार प्रवक्ता गौरव वल्लभ ने भी छोड़ा कांग्रेस का 'हाथ'

लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस को एक और बड़ा झटका लगा है. पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता गौरव वल्लभ ने गुरुवार को इस्तीफा दे दिया. गौरव वल्लभ ने कांग्रेस प्रमुख मल्लिकार्जुन खड़गे को लिखे पत्र में पार्टी को 'दिशाहीन' बताया और अपने बाहर निकलने के लिए जाति जनगणना जैसे कारणों का हवाला दिया. उन्होंने साफ कहा कि वो 'सनातन विरोधी' नारे नहीं लगा सकते हैं.' गौरव वल्लभ ने एक्स पर लिखा, जब मैंने पार्टी जॉइन की थी तब की कांग्रेस और अब की कांग्रेस में जमीन आसमान का अंतर आ गया है. आज कांग्रेस पार्टी जिस दिशाहीन तरीके से आगे बढ़ रही है, उससे मैं सहज महसूस नहीं करता. मैं ना तो सनातन विरोधी नारे लगा सकता हूं और ना ही सुबह-शाम देश के वेल्थ क्रिएटर्स को गाली दे सकता हूं. इसलिए मैं कांग्रेस पार्टी के सभी पदों और प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे रहा हूं.

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गौरव वल्लभ ने पिछले साल अशोक गहलोत और सचिन पायलट विवादों में भी खुलकर स्टैंड लिया था और अशोक के समर्थन में बयान दिए थे. साल 2022 में उन्होंने मल्लिकार्जुन खड़गे के इलेक्शन कैंपेन (कांग्रेस अध्यक्ष) को संभाला था. वे पार्टी के अंदर आर्थिक मसलों पर मजबूती से बात रखते आए हैं. वे 2023 में राजस्थान विधानसभा चुनाव में उदयपुर सीट से मैदान में उतरे थे. हालांकि, बीजेपी उम्मीदवार ताराचंद्र जैन ने 32,000 से ज्यादा वोटों से हरा दिया था. गौरव वल्लभ ने 2019 में झारखंड के जमशेदपुर पूर्व से पहली बार चुनाव लड़ा था. उन्होंने 18,000 से ज्यादा वोट हासिल किए थे और तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुबर दास और सरयू रॉय के बाद तीसरे स्थान पर रहे थे.

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पेशे से CA और इकोनॉमिक्स के प्रोफेसर भी रहे

गौरव वल्लभ को अर्थशास्त्र के अच्छे जानकार के तौर पर जाना जाता है. वह पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट और इकोनॉमिक्स के प्रोफेसर भी रह चुके हैं. बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा के साथ उनका एक डिबेट वीडियो काफी वायरल हुआ था, जिसमें उन्होंने पात्रा से पूछा था कि एक ट्रिलियन में कितने जीरो होते हैं. दरअसल, एक डिबेट के दौरान संबित पात्रा मोदी सरकार के 5 ट्रिलियन इकोनॉमी के लक्ष्य के बारे में बात कर रहे थे. इस डिबेट में कांग्रेस की तरफ से गौरव वल्लभ भी शामिल हुए थे. उन्होंने चर्चा के दौरान संबित पात्रा से पूछा कि वे बताएं कि 5 ट्रिलियन में कितने जीरो होते हैं. हालांकि, दो-तीन बार पूछने के बाद जब संबित पात्रा ने इस सवाल को टालना चाहा तो गौरव वल्लभ ने खुद बताया कि 5 ट्रिलियन में 12 जीरो होते हैं.

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