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Chhindwara Seat Ground Report: कमलनाथ के लिए चुनाव एकतरफा नहीं, छिंदवाड़ा फतह करने BJP ने बनाई खास रणनीति

Chhindwara Lok Sabha Election 2024: छिंदवाड़ा की राजनीति को करीब से देखने और समझने वाले भी मानते हैं कि इस बार कमलनाथ या कांग्रेस के लिए छिंदवाड़ा में मुकाबला एकतरफा नहीं रहने वाला है. नकुलनाथ 2019 में सांसद बने ज़रूर लेकिन उनकी जीत का अंतर महज़ 37 हजार 536 मतों का रहा था. वहीं, कमलनाथ भी सिर्फ 25 हज़ार वोटों से ही विधानसभा का उपचुनाव जीत पाए थे.

छिंदवाड़ा रेलवे स्टेशन की तस्वीर. छिंदवाड़ा रेलवे स्टेशन की तस्वीर.
रवीश पाल सिंह
  • छिंदवाड़ा ,
  • 28 मार्च 2024,
  • अपडेटेड 1:46 PM IST

इस बार लोकसभा चुनाव में मध्य प्रदेश की छिंदवाड़ा सीट हॉट सीट बन गई है. दरअसल, बीजेपी की एमपी की सभी 29 लोकसभा सीट जीतने के दावे में सबसे बड़ा रोड़ा छिंदवाड़ा सीट है. इस सीट से कांग्रेस के कमलनाथ 9 बार सांसद रहे और उनके बाद बेटे नकुलनाथ यहां से सांसद हैं लेकिन इस बार बीजेपी ने छिंदवाड़ा सीट को नाक का सवाल बना लिया है. तो देखते हैं कि क्या कहता है कांग्रेस की इस सबसे मजबूत सीट का राजनीतिक समीकरण... 

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साल 1951 में अस्तित्व में आई छिंदवाड़ा लोकसभा सीट एमपी की 29 लोकसभा सीटों में से महज़ एक सीट नहीं बल्कि कांग्रेस और कमलनाथ का गढ़ है. 1971 से 2019 तक के 14 लोकसभा चुनाव में से 13 बार यहां से कांग्रेस जीती जबकि 1980 से लेकर 2019 तक तो यहां सिर्फ नाथ परिवार का ही दबदबा रहा है और कमलनाथ, उनकी पत्नी अलकानाथ और बेटे नकुलनाथ यहां से सांसद रहे हैं. 

  • 1971 और 1977 में कांग्रेस के गार्गीशंकर रामकृष्ण सांसद बने 
  • 1980, 1984, 1989, 1991 में कांग्रेस के कमलनाथ सांसद बने 
  • 1996 में अलकानाथ कांग्रेस के टिकट पर सांसद बनीं 
  • 1997 में उपचुनाव हुए और बीजेपी से चंद्रभान सिंह सांसद बने 
  • 1998, 1999, 2004, 2009, 2014 में कांग्रेस से कमलनाथ सांसद बने 
  • 2019 में कांग्रेस से नकुलनाथ सांसद बने 

 
साल 1997 को छोड़ दें तो पिछले 70 सालों से इस सीट पर कांग्रेस का दबदबा रहा है. छिंदवाड़ा सीट कांग्रेस के लिए कितनी महत्वपूर्ण इसका अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है आपातकाल के बावजूद छिंदवाड़ा की जनता ने कांग्रेस का साथ नहीं छोड़ा. लेकिन अब यहां मुकाबला एकतरफा नहीं दिख रहा और इसलिए कांग्रेस और बीजेपी दोनों ने इस सीट पर ताकत झोंक दी है. कांग्रेस ने यहां से एक बार फिर नाथ परिवार पर भरोसा जताते हुए कमलनाथ के बेटे नकुलनाथ को अपना उम्मीदवार घोषित किया है तो वहीं बीजेपी ने लगातार दो चुनावों में कमलनाथ को चुनौती देने वाले विवेक बंटी साहू को टिकट दिया है. 

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छिंदवाड़ा लोकसभा सीट का राजनीतिक और जातिगत समीकरण

- छिंदवाड़ा संसदीय क्षेत्र में कुल 16 लाख 32 हजार 896 वोटर हैं 
- 8 लाख 24 हजार 832 पुरुष वोटर और 8 लाख 8 हजार 51 महिला वोटर हैं
- 18 से 19 साल वाले फर्स्ट टाइम वोटरों की संख्या 53 हजार 555 है 
- छिंदवाड़ा में जातिगत समीकरणों की बात करें तो यहां अनुसूचित जनजाति की आबादी सबसे ज्यादा है
- यहां सबसे ज्यादा करीब 37 फीसदी आबादी एसटी है
- इसके बाद करीब 12% अनुसूचित जाति की आबादी है
- मुस्लिम आबादी यहां करीब 5% है 
- यहां ग्रामीण वोटरों की संख्या करीब 75% है तो वहीं करीब 25 फीसदी शहरी वोटर हैं 

ग्रामीण वोटरों की संख्या ज्यादा होने के चलते aajtak ने रुख किया बरंगा खर्द गांव का. कोई यहां महुआ को सूखा रहा था तो कोई राई को छान रहा था. इस गांव में मूल रूप से किसान खेती और महुआ बीन कर गुजर बसर करते हैं. खेत में हल चला रहे किसान विजेंद्र ने बताया, ऐसा लग रहा है कि इस बार तो फूल वाला ही जीतेगा, क्योंकि वो काम कर रहा है. मेरी मां के खाते में पैसे आते हैं. लगातार टाइम से पैसा आ रहा है. खुद विजेंद्र की मां बताती हैं कि  उनके खाते में पैसे आ रहे हैं.  

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बरंगा खर्द गांव के किसान विजेंद्र

गांव से आते समय छिंदवाड़ा से 10 किलोमीटर पहले aajtak टीम रुकी दालबड़ों के लिए मशहूर शिवप्रसाद की एक छोटी से दुकान पर. करीब 35 साल  से दुकान चला रहे शिवप्रसाद के यहां लोग करारे दाल बड़े का स्वाद लेने दूर-दूर से आते हैं. यहां शहरी इलाके के लोगों का मन भी टटोला तो मिलीजुली प्रतिक्रिया रही. यहां कुछ लोग बदलाव की बात करते दिखे तो कुछ कमलनाथ के साथ ही जाते दिखे. 

दालबड़ों के लिए मशहूर शिवप्रसाद की दुकान

जब भी छिंदवाड़ा का नाम आता है तो सबसे पहले कमलनाथ का नाम जेहन में आता है. कमलनाथ यहां से 9 बार के सांसद रह चुके हैं. यहां तक कि जब 2019 की प्रचंड मोदी लहर में कांग्रेस का पूरे एमपी की लोकसभा सीटों से सफाया हो गया था तो इकलौती छिंदवाड़ा सीट ही थी जहां कांग्रेस जीत हासिल करने में कामयाब रही थी और कमलनाथ के बेटे नकुलनाथ यहां से सांसद बने थे.

हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में बीजेपी की ऐसी आंधी चली कि 163 सीटों के प्रचंड बहुमत के साथ बीजेपी ने सरकार बनाई. इस आंधी में कांग्रेस के कई दिग्गजों के किले ढह गए लेकिन बीजेपी की यह आंधी छिंदवाड़ा को नहीं भेद पाई और जिले की सभी सीटें कांग्रेस के पास गई. अब एक बार फिर से नकुलनाथ को कांग्रेस ने अपना उम्मीदवार बनाया है. 

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649 करोड़ की प्रॉपर्टी के मालिक नकुलनाथ 

नकुलनाथ का जन्म 21 जून 1974 कोलकाता में हुआ है. उन्होंने दून स्कूल से शिक्षा के बाद बोस्टन के Bay State College से बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन की पढ़ाई की है. नकुलनाथ की गिनती देश के सबसे अमीर सांसदों में होती है. इस बार भी नामांकन में नकुलनाथ ने 649 करोड़ की चल संपत्ति का ब्यौरा दिया है. नकुलनाथ का मानना है कि उनके पिता ने इस अति पिछड़े इलाके में विकास के जो काम किए हैं, वो जनता के मन में इतना घर कर चुके हैं कि यहां जनता बार-बार नाथ परिवार को ही चुनती है. 

बीजेपी के विवेक बंटी साहू का परिचय 

दूसरी तरफ कांग्रेस के इस मजबूत गढ़ में बीजेपी ने विवेक बंटी साहू को मैदान में उतारा है. 29 अप्रैल 1979 को जन्मे विवेक बंटी साहू बी.कॉम तक पढ़े हैं. साहू मोटरसाइकिल की एजेंसी, होटल, सर्राफा व्यवसाय और कृषि क्षेत्र से जुड़े हैं. बता दें कि बंटी साहू कमलनाथ को लगातार उनके ही गढ़ में टक्कर देते आ रहे हैं. 

कमलनाथ को कड़ी चुनौती दी थी

आपको बता दें कि लोकसभा का टिकट बंटी साहू को भले ही पहली बार मिला हो, लेकिन बंटी साहू छिंदवाड़ा से दो बार विधानसभा का चुनाव लड़ चुके हैं. दोनों ही चुनाव में कमलनाथ को कड़ी चुनौती दी थी. भले ही बंटी साहू छिंदवाड़ा में लगातार 2 बार कमलनाथ से चुनाव हार गए लेकिन उन्होंने दोनों बार कमलनाथ को बड़ी जीत से रोक दिया था. 2019 के विधानसभा उपचुनाव में बंटी साहू कमलनाथ से सिर्फ 25 हजार वोटों से हारे थे. तो वहीं हालिया विधानसभा चुनाव में दोनों के बीच जीत का अंतर करीब 34 हजार वोटों का रहा था. अब बीजेपी ने बंटी साहू को टिकट देकर नकुलनाथ की मुश्किलें बढ़ा दी है क्योंकि बंटी लगातार कमलनाथ जैसे कद्दावर नेता को चुनाव में टक्कर दे चुके हैं. अब लोकसभा चुनाव में विवेक बंटी साहू को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता और सूबे में बीजेपी की सरकार होने का सीधा लाभ भी मिलेगा. खुद विवेक बंटी साहू की मानें तो छिंदवाड़ा की जनता ने अबकी बार पीएम मोदी के साथ जाने का मन बना लिया है

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एकतरफा नहीं रहने वाला मुकाबला

छिंदवाड़ा की राजनीति को करीब से देखने और समझने वाले भी मानते हैं कि इस बार कमलनाथ या कांग्रेस के लिए छिंदवाड़ा में मुकाबला एकतरफा नहीं रहने वाला है. नकुलनाथ 2019 में सांसद बने ज़रूर लेकिन उनकी जीत का अंतर महज़ 37 हजार 536 मतों का रहा था. वहीं, कमलनाथ भी सिर्फ 25 हज़ार वोटों से ही विधानसभा का उपचुनाव जीत पाए थे. 2023 के विधानसभा चुनाव में कमलनाथ 36,594 वोटों से जीते. इससे इतना तो साफ हो गया कि नाथ परिवार को अपने ही गढ़ में कड़ी टक्कर मिल रही है. 

एक के बाद एक कमलनाथ के करीबी भी उनका साथ छोड़ बीजेपी में जा रहे हैं जिनमें दीपक सक्सेना और सैय्यद जाफर जैसे बेहद खास लोग भी हैं. हाल में ही में कमलनाथ के बीजेपी में जाने की अटकलें लगाई जाने गलीं, लेकिन कमलनाथ बीजेपी नहीं गए लेकिन छिंदवाड़ा में एक के बाद एक अपनों के साथ छोड़ने से अपने गढ़ में कमलनाथ की पकड़ ढीली होती जा रही है. ऐसा ना हो कि इससे कांग्रेस का यह मजबूत किला इस बार ढह जाए.

वरिष्ठ पत्रकार रत्नेश जैन बताते हैं, ''मैंने कमलनाथ जी की यह हालत आजतक नहीं देखी कि छिंदवाड़ा में उन्हें इतनी टक्कर मिलेगी. हालात ऐसे हैं कि इतना तय है कि कमलनाथ के लिए यह चुनाव एकतरफा तो नहीं रहने वाला है, जैसा अब तक होता था.''

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 BJP ने भी इस बार छिंदवाड़ा को लेकर खास रणनीति बनाई 

 
-  छिंदवाड़ा के असंतुष्ट और प्रभावशाली नेताओं सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं को बीजेपी में लाना जिससे कांग्रेस छिंदवाड़ा की ज़मीन पर कमजोर पड़े

-  अकेले छिंदवाड़ा से 50,000 कांग्रेस कार्यकर्ताओं को बीजेपी में शामिल करने का लक्ष्य है

- बीजेपी ने पहले रणनीति तैयार की थी कि कमलनाथ और उनके सांसद बेटे नकुलनाथ को कांग्रेस से तोड़कर बीजेपी में ले आएंगे तो छिंदवाड़ा सीट खुद-ब-खुद बीजेपी की झोली में आ जाएगी. लेकिन ऐन वक्त पर पार्टी के अंदर ही दोनों को लेकर खासा विरोध हो गया

- बीजेपी ने रणनीति के तहत छिंदवाड़ा में सबसे ज्यादा सरकारी योजनों के लाभार्थी बनाए

- बीजेपी उम्मीदवार विवेक साहू बंटी ने aajtak से बात करते हुए बताया कि 'प्रदेश में नंबर एक का जिला है, छिंदवाड़ा जहां आम लोगों को सबसे ज्यादा केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ मिल रहा है 

- छिंदवाड़ा में 16 लाख लोगों को निशुल्क राशन मिल रहा है. 14 लाख लोगों का आयुष्मान कार्ड है. एमपी में सबसे ज्यादा पीएम आवास छिंदवाड़ा में बने.सबसे ज्यादा उज्वला सिलेंडर भी छिंदवाड़ा में बांटे गए हैं.

- कमलनाथ के करीबियों को तोड़कर बीजेपी में शामिल करवाया जा रहा ताकि मनोवैज्ञानिक फायदा मिले और लोगों को लगने लगे की कमलनाथ का भविष्य अब नहीं, इसलिए यह स छोड़ कर जा रहे

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- बीजेपी स्थानीय नेताओं से ज्यादा बीजेपी के बड़े चेहरों मसलन अमित शाह, गिरिराज सिंह, योगी आदित्यनाथ, हेमंत बिस्वा सरमा जैसे चेहरों को प्रचार में उतारेगी जो हिंदूवादी बयानों से माहौल बनाएंगे.
 
बीजेपी इस बार राम नाम की लहर पर सवार होकर चुनाव लड़ रही है. ऊपर से मध्यप्रदेश में बीजेपी की ही सरकार है जिसने चुनाव की तारीखों के ऐलान से पहले बड़ी घोषणाएं कर माहौल अपने पक्ष में बनाने की भरसक कोशिश की है.

दूसरी तरफ एमपी में कांग्रेस का संगठन लगातार कमजोर होता जा रहा है जिससे आगामी लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के प्रदर्शन पर भी असर पड़ सकता है. देखना यह है कि 19 अप्रैल को जब पहले चरण का मतदान होगा तब छिंदवाड़ा की जनता किसका साथ देती है?

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