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ठाकुर, दलित और जाट वोट में सेंधमारी का INDIA ब्लॉक को नहीं मिला फायदा? क्या कहते हैं UP के Exit Poll

एक्सिस माई इंडिया पोल के आंकड़ों ने यह बताया कि मोदी-मोदी का शोर और राम मंदिर मुद्दा दोनों अंडर करंट की तरह काम कर गए. हां इतना जरूर हुआ है कि बीजेपी और एनडीए को समर्थन देने वाली ओबीसी और दलित जातियों में एक बड़ा बिखराव देखने को मिला है.

जातिगत समीकरणों में कहां मात खा गया INDIA गठबंधन जातिगत समीकरणों में कहां मात खा गया INDIA गठबंधन
कुमार अभिषेक
  • लखनऊ,
  • 02 जून 2024,
  • अपडेटेड 6:34 PM IST

इस बार उत्तर प्रदेश के चुनाव में कई नैरेटिव बनते-बिगड़ते दिखाई दिए. वह जातियां जिन्होंने 2019 में बीजेपी को झोली भर के वोट दिया था उन जातियों में बिखराव की कई कहानियां सुनाई दीं. चुनाव के दौरान फील्ड में घूमने वाले पत्रकारों और सर्वे करने वाले लोगों ने माना कि इस बार 2019 जैसे हालात नहीं हैं. जब मोदी-मोदी के शोर से पूरा चुनावी कैंपेन भरा होता था, इस बार ना तो मोदी- मोदी का शोर सुनाई दे रहा था, ना ही राम मंदिर का कोई प्रत्यक्ष दिखने वाला करंट था.

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लेकिन एक्सिस माई इंडिया पोल के आंकड़ों ने यह बताया कि मोदी-मोदी का शोर और राम मंदिर मुद्दा दोनों अंडर करंट की तरह काम कर गए. हां इतना जरूर हुआ है कि बीजेपी और एनडीए को समर्थन देने वाली ओबीसी और दलित जातियों में एक बड़ा बिखराव देखने को मिला है.

जातियों में था गुस्सा, लेकिन वोट पर नहीं दिखा असर

ऐसे में सवाल यह उठता है कि जब ओबीसी जातियों में बीजेपी को लेकर बिखराव था. जब कुर्मी, मौर्य और लोध जैसी ओबीसी जातियों के एक तबके ने इस बार बीजेपी के खिलाफ सपा-कांग्रेस को वोट दिया, जब गैर जाटव-दलित वोटों का एक बड़ा हिस्सा INDIA गठबंधन की तरफ गया. तो फिर भी एनडीए की क्यों और कैसे सीटें घटने की बजाए बढ़ रही हैं? ठाकुरों की नाराजगी का वोट आखिर कहां गया?

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सबसे पहले Axis my india इंडिया के जातिवार आंकड़ों को समझते हैं. जिसके जरिए यह साफ हो रहा है कि इस बार बीजेपी के वोट बैंक में इंडिया गठबंधन ने अच्छी खासी सेंध लगाई है. आंकड़ों को समझने से पहले एक बात गौर करने वाली है, पिछली बार यूपी में सपा और बसपा का गठबंधन था, उस वक्त इंडिया एलाइंस जैसा कुछ नहीं था. लेकिन इस बार बीएसपी साथ नहीं है. कांग्रेस और समाजवादी पार्टी साथ हैं और जब वोटों के बिखराव की बात होगी तो पिछली बार बीएसपी को मिले वोट बड़ी तादाद में खिसककर सपा और कांग्रेस की तरफ जाते दिखेंगे.

गैर जाटव-दलित वोटों में 9 फीसदी का नुकसान

एक्सिस माई इंडिया को मिले जातिवार आंकड़े में एनडीए को सबसे ज्यादा नुकसान गैर जाटव-दलितों में हुआ है. 2019 में एनडीए को गैर जाटव-दलित वोट 60 फीसदी मिले थे, जो 2024 में 9 फीसदी घटकर 51 फीसदी मिलते दिख रहे हैं. इसके अलावा जाटव-दलित वोटों की बात करें तो एनडीए को ज्यादा नुकसान नहीं दिख रहा. इस बार महज 1 फीसदी का नुकसान दिख रहा है. 2019 में एनडीए 32 फीसदी जाटव वोट मिले थे जो 2019 में 31 फीसदी मिलते दिख रहे हैं.

आधा रह गया मुस्लिम वोट

इसके अलावा यादव वोटरों में भी बड़ी गिरावट है. इस बार 2024 में एनडीए को मिलने वाले यादव वोटों में 6 फीसदी कम वोट मिलते दिख रहे हैं. वहीं 2019 में 24 फीसदी यादव वोट एनडीए को मिला था, जो इस बार घटकर 18 फीसदी रह गया. यही नहीं मुस्लिम वोटों में भी एनडीए को इस बार 2019 के मुकाबले आधे ही वोट मिले. कहा जा रहा है कि इस बार मुसलमानों के 6 फीसदी और कम वोट खाते में आए. जहां साल 2019 में एनडीए को 12 फीसदी मुस्लिम वोट मिले थे वो इस बार घटकर 6 फीसदी ही रह गए.

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'INDIA' के वोट कहां से बढ़े?

अब जरा इंडिया गठबंधन को मिलने वाले वोटों का आंकड़ा देखिए. India Today- Axis My India के मुताबिक इस बार इंडिया गठबंधन को जाटवों के 7 फीसदी वोट ज्यादा मिले. साल 2019 में जो 25 फीसदी वोट मिले थे, वह इस बार 32 फीसदी हो गया, गैर जाटव-दलितों के 14 फीसदी वोट इस बार 2019 की तुलना में ज्यादा मिले. जहां 2019 में गैर जाटव-दलित के 19 फीसदी वोट विपक्ष को मिले थे, वो इस बार 33 फीसदी मिले हैं. यादवों के 35 फीसदी वोट इस बार इंडिया गठबंधन को ज्यादा मिले. जो एक्सिस माई इंडिया के मुताबिक इस बार बढ़कर 79 फीसदी पहुंच गया है और मुसलमान के वोट भी इस बार इंडिया गठबंधन को 38 फीसदी ज्यादा मिले जो कुल मुस्लिम वोट का 87 फीसदी रहा.

बसपा को बड़ा नुकसान

इन चुनावों में सबसे ज्यादा नुकसान बीएसपी को हुआ है. जिसे पिछली बार मुसलमान के मिले 36 फीसदी वोटो में से 34 फीसदी वोट खिसक गए. यानी सिर्फ 2 फीसदी मुस्लिम वोट ही बसपा को मिल सका है. इसके अलावा यादवों के 29 फीसदी वोटों में से 28 फीसदी वोट बसपा से खिसक गए और 2024 में सिर्फ एक फीसदी यादव वोट मिलते दिख रहे हैं. गैर जाटव-दलितों में भी बसपा को नुकसान हुआ है. 2024 में 2019 के मुकाबले पार्टी को 4 फीसदी कम वोट मिलते दिख रहे हैं. 2019 में लगभग 17 फीसदी गैर जाटव वोट बसपा को मिले थे, जो इस बार 13 फीसदी ही रह गए.

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इस बार जाटव वोटों में भी बसपा को 8 फीसदी का नुकसान हुआ है. बसपा को 43 फीसदी जाटव वोट 2019 में मिले थे. लेकिन 2024 में ये घटकर 35 फीसदी पर आ गया है.

गौरतलब है कि पिछली बार सपा और बसपा का गठबंधन था और दोनों लगभग आधी-आधी सीटों पर चुनाव लड़ रहे थे. लेकिन इस बार बसपा ने अकेले चुनाव लड़ा है तो वहीं सपा इंडिया गठबंधन के साथ चुनाव लड़ी है. इस गठबंधन में UP में सपा ही सबसे बड़ी पार्टी रही है. 

जाट वोटों में भी INDIA ने लगाई सेंध

पिछली बार एनडीए को कुर्मी बिरादरी के 67 फीसदी वोट मिले थे, जो इस बार 5 फीसदी घट गए और 62 फीसदी पर आ गए. इस तरह लोध किसान बिरादरी ने पिछली बार 78 फीसदी वोट एनडीए को दिया था. जिसमें 5 फीसदी का नुकसान  हुआ है और इस बार 73 प्रतिशत लोध जाति ने एनडीए को वोट किया है. यहां तक की जयंत चौधरी का जादू भी नहीं चला और पिछली बार एनडीए को 78 फीसदी मिलने वाले जाट वोटो में भी सेंध लगी है और 7 फीसदी वोट एनडीए को जाटों के कम मिले. 2024 में जाट वोट 78% से घटकर 71% पर आ गया. कुल मिलाकर पूरे गैर यादव ओबीसी में बीजेपी को 4 फीसदी का नुकसान है, जो 2019 में ओबीसी बीजेपी को 76% दिया था, उसने इस बार बीजेपी को 72 फीसदी वोट दिया है.

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गैर यादव ओबीसी का बड़ा फायदा इस बार इंडिया गठबंधन को मिलता दिख रहा है, जिसमें 2019 में 16 फीसदी कुर्मी वोट इंडिया गठबंधन को मिला था. जो इस बार 29 फीसदी भी हो गया. लोध किसानों के 12% वोट पिछली बार सपा और कांग्रेस को मिले थे, जो इस बार 6 फीसदी बढ़कर 18 फीसदी हो गए.

जाट ओबीसी में इस बार कांग्रेस और सपा को 12 फीसदी वोट बढ़े, जो 2019 में 10 फीसदी वोट सपा और कांग्रेस और आरएलडी को गठबंधन में मिले थे. वह इस बार सपा-कांग्रेस के 22 फीसदी हो गए. कुल गैर यादव ओबीसी के वोट भी इस बार 6 फीसदी सपा-कांग्रेस या फिर इंडिया गठबंधन को ज्यादा मिले हैं, 2019 में सपा और कांग्रेस का गैर यादव ओबीसी का आंकड़ा 13 फीसदी था, जो इस बार 19 फीसदी हो गया. जबकि एनडीए को 76 फीसदी जो ओबीसी मिला था. वह इस बार घटकर 72 फीसदी पर आ गया है.

भाजपा को ज्यादा चोट नहीं पहुंचा पाए ठाकुर

अब आखिर में देखते हैं ठाकुर वोटों का कितना नुकसान एनडीए को हुआ है और सवर्ण वोटरों का पैटर्न क्या रहा. एक्सिस माई इंडिया के मुताबिक ठाकुरों के इतने विरोध के बावजूद सिर्फ 2 फीसदी राजपूत-ठाकुर वोटरों ने एनडीए के खिलाफ वोट किया और यही दो प्रतिशत वोट इंडिया गठबंधन को ठाकुरों ने दिया. 2019 में ठाकुर राजपूत ने 77 फीसदी वोट एनडीए को दिया था, जो इस बार घटकर 75 फीसदी पर आ गया है. सपा और कांग्रेस को मिलाकर 2019 में 13 फीसदी राजपूत-ठाकुर वोट मिले थे जो इस बार 15 फीसदी पहुंच गए.

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ब्राह्मण वोटों में बढ़ोतरी

लेकिन ठाकुर और राजपूतों के विरोध का फायदा बीजेपी की तरफ दिखा इस बार एक फीसदी ब्राह्मणों ने बीजेपी को ज्यादा वोट दिया. 2019 में 75 फीसदी ब्राह्मणों ने बीजेपी को वोट किया था, इस बार उनका वोट प्रतिशत 76 फीसदी पहुंच रहा है. 2024 में भी एनडीए का वैश्य-बनिया वोट यथावत रहा. एनडीए को 2019 में 78 फीसदी वोट मिला था जो कि 2024 में भी 78 फीसदी ही रहा. हालांकि कुल सवर्ण वोटों में एनडीए को दो फीसदी का नुकसान 2024 में होता दिख रहा है और यही दो फीसदी का फायदा इंडिया गठबंधन को मिल रहा है.

हर जाति से नुकसान तो सीट ज्यादा कैसे जीत रही है भाजपा?

अब सवाल यह उठता है कि अगर एनडीए को हर वर्ग/जाति में वोटों का नुकसान है तो फिर वह ज्यादा सीट कैसे जीत रही है? आपको बता दें कि Axis My India ने इस बार एनडीए के लिए 67 से 72 सीटें मिलने का दावा किया है जो 2019 में 64 थी. दरअसल इस बार बीएसपी के वोटो में तकरीबन 12 फीसदी की गिरावट है और ज्यादातर वोट जो बसपा को मिले थे वह इस बार इंडिया गठबंधन की ओर जाते दिख रहे हैं,

2019 में सपा ने 37,बसपा ने 38 सीटें और आरएलडी 2 सीट लड़ी थी. तब दोनों के वोट बड़ी तादात में एक दूसरे को ट्रांसफर हुए थे, जिसमें से यादव वोट भी बसपा को ट्रांसफर हुआ था और दलित-जाटव वोट समाजवादी पार्टी को ट्रांसफर हुआ था. लेकिन इस बार बीएसपी इस गठबंधन से अलग रही. ऐसे में यादव वोट पूरी तरीके से सपा में वापस चला गया, लेकिन जाटव और गैर जाटव दलित वोट बसपा की तरफ नहीं लौटा और यह वोट इंडिया गठबंधन की तरफ बड़ी तादाद में मूव कर गया. हालांकि कुछ हिस्सा एनडीए को भी आया. 

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ऐसे में यह आंकड़े बताते हैं कि सपा और कांग्रेस ने खूब वोट पाए, लेकिन वह बीजेपी का वोट प्रतिशत नहीं कम कर पाई. इनको मिलने वाले वोट अधिकांश बसपा के कोटे से आए हैं और भाजपा अपने 2019 के वोट के आंकड़े के आसपास स्थिर बनी रही है. ऐसे में एक्सिस माई इंडिया के सर्वे के मुताबिक अभी भी 10 फीसदी का फासला दोनों गठबंधन के बीच बना हुआ है और यही बीजेपी के बढ़त की वजह है.

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