
Loksabha election 2024: साल 2019 के लोकसभा चुनाव में ज्योतिरादित्य सिंधिया को पटखनी देने वाले केपी यादव को गुना सीट से टिकट मिलने को लेकर संशय बरकरार है. बीजेपी की केंद्रीय चुनाव समिति ने गुना संसदीय क्षेत्र के लिए अपने प्रत्याशी का नाम तय कर लिया है. इस सीट पर केंद्रीय मंत्री और राज्यसभा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया का नाम भी पैनल में गया है. सिंधिया के सामने मौजूदा सांसद केपी यादव ने भी जोर-शोर से दावेदारी की है. लेकिन उनके नाम पर मुहर लगेगी या नहीं? इसको लेकर फिलहाल संशय बरकरार है.
दरअसल, 2019 के आम चुनाव को कांग्रेस पार्टी में रहते ज्योतिरादित्य सिंधिया हार गए थे. 2020 में बीजेपी नेता बन चुके ज्योतिरादित्य पारंपरिक गुना लोकसभा सीट पर चुनाव लड़कर एक बार फिर दोबारा जनता के बीच सक्रिय होना चाहते हैं.
गुना संसदीय क्षेत्र से BJP ज्योतिरादित्य सिंधिया के नाम पर विचार कर रही है. हालांकि, सिंधिया के लिए ग्वालियर लोकसभा सीट के दरवाजे भी खुले हुए हैं. लेकिन अगर पड़ोसी जिले यानी ग्वालियर की सीट राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी आरएसएस के कोटे में जाती है तो फिर सिंधिया का गुना से उतरना तय है. राजनीतिक सूत्रों की मानें तो ग्वालियर से संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी रह चुके यशवंत इंदापुरकर और मौजूदा सांसद विवेक शेजवलकर का नाम आगे चल रहा है. इसके अलावा दतिया विधानसभा हार चुके नरोत्तम मिश्रा को भी यहां से मौका दिया जा सकता है.
...तो पार्टी मुझ पर विश्वास जताएगी: केपी यादव
अब तक मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव भी संपन्न हो चुके हैं और लोकसभा चुनाव में अगर सिंधिया के नाम का गुना सीट से ऐलान हो गया तो मौजूदा सांसद केपी यादव क्या करेंगे? इसको लेकर aajtak.in से खुद बीजेपी सांसद केपी यादव ने बातचीत की.
सांसद डॉक्टर केपी यादव ने कहा, बीजेपी कार्यकर्ता आधारित पार्टी है. यदि पांच वर्षों में मैंने अच्छा कार्य किया है तो पार्टी मुझ पर विश्वास जताएगी. नहीं तो ज्योतिरादित्य सिंधिया जी के नाम पर पार्टी सहमति देगी. फिलहाल यह संगठन ही तय करेगा कि किसे टिकट देना है. जनता ने 2019 में मुझे आशीर्वाद दिया था. सिंधिया जैसे बड़े नेता को चुनाव हराकर लोकतंत्र के सर्वोच्च मंदिर में पहुंचाया था.
दोनों नेताओं के बीच 5 साल से 'ठनी'
बता दें कि लोकसभा चुनाव से ठीक पहले सिंधिया और केपी यादव के बीच राजनीतिक नूराकुश्ती शुरू हो गई है. यह पहली बार नहीं है कि जब सिंधिया और केपी यादव के बीच रस्साकशी देखने को मिली हो. पिछले 5 साल में केपी यादव तमाम दफे शिकायतें दर्ज करा चुके कि केंद्रीय मंत्री के कार्यक्रमों में उन्हें तवज्जों नहीं दी जाती जबकि वह क्षेत्र के मौजूदा सांसद हैं.
हाल ही में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया चाहते थे कि पासपोर्ट केंद्र का लोकार्पण उनके द्वारा किया जाए, लेकिन सांसद केपी यादव ने नारियल फोड़कर अचानक पासपोर्ट केंद्र का शुभारंभ कर दिया. इसको लेकर सिंधिया समर्थक पूर्व मंत्री महेंद्र सिसोदिया ने अपनी ही पार्टी के सांसद केपी यादव पर निशाना साधा और कहा, किसी केंद्रीय कार्यालय का उद्घाटन अनाधिकृत तरीके से करना अक्लमंदी का काम नहीं है.
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बीते पांच साल में बीजेपी सांसद केपी यादव और कांग्रेस छोड़कर बीजेपी का दामन थामने वाले सिंधिया समर्थकों के बीच मन-मुटाव और एक-दूसरे के खिलाफ बयानबाजी की खबरें आती रहती हैं. बीते साल ही सांसद केपी यादव ने सूबे की शिवराज सरकार में मंत्री रहे सिंधिया समर्थक महेंद्र सिंह सिसोदिया को मूर्ख बता दिया था. मंत्री की ओर से लोकसभा चुनाव में सिंधिया की हार पर माफी मांगने को लेकर सांसद ने यह बात कही थी. BJP सांसद ने कहा, कार्यकर्ताओं को लगने लगा है कि 2020 में पार्टी से गलती हुई है, जो ऐसे लोगों को बिना सोचे-समझे, भाजपा में ले लिया. जिन्हें (सिंधिया समर्थक) भाजपा की रीति-नीति के बारे में जानकारी नहीं है. ऐसे लोगों को भाजपा में लेना, शायद हमारी गलती थी. बता दें कि साल 2020 में कमलनाथ सरकार को गिराकर बीजेपी ने सरकार बना ली थी. इसके ज्योतिरादित्य सिंधिया की अहम भूमिका रही.
बीजेपी ने ज्योतिरादित्य सिंधिया की पसंद को तरजीह देते हुए गुना जिले की राघोगढ़ विधानसभा सीट से हीरेंद्र सिंह को टिकट दिया था. इसको लेकर अखिल भारतवर्षीय यादव महासभा ने सिंधिया समर्थके खिलाफ मोर्चा खोल दिया था. देश के गृहमंत्री अमित शाह और बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा को लिखे पत्र में यादव महासभा ने लिखा था. खास बात यह है कि बीजेपी प्रत्याशी राघोगढ़ सीट से दिग्विजय सिंह के बेटे जयवर्द्धन सिंह के सामने चुनाव हार गए. गौर करने वाली बात है कि अखिल भारतवर्षीय यादव महासभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बीजेपी सांसद केपी यादव हैं.
पहली बार पराजित हुआ था 'महल'
गौरतलब है कि केपी यादव भी कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में आए थे और सिंधिया को बड़े अंतर से चुनाव हराकर इतिहास रच दिया था. विदित हो कि 2014 का चुनाव 1 लाख 20 हजार 792 वोटों से जीतने वाले कांग्रेस प्रत्याशी ज्योतिरादित्य सिंधिया को 2019 में BJP प्रत्याशी डॉ. केपी यादव ने 1 लाख 25 हजार 549 वोटों से हरा दिया था. 14 बार लगातार अजेय रहने वाले सिंधिया राजपरिवार के किसी प्रत्याशी की गुना-शिवपुरी संसदीय क्षेत्र में यह पहली हार थी. हैरानी की बात यह थी कि बीजेपी के टिकट पर चुनाव जीतने वाले केपी यादव पहले कांग्रेस में ही थे और सिंधिया के खास लोगों में शुमार थे.
2019 के लोकसभा चुनाव के आंकड़े
तीन जिलों शिवपुरी, गुना और अशोकनगर के इस संसदीय क्षेत्र में बीजेपी उम्मीदवार डॉ. केपी यादव को कुल 6 लाख 14 हजार 049 यानी 52.11% वोट मिले थे. जबकि उनके मुकाबले कांग्रेस प्रत्याशी सिंधिया को 4 लाख 88 हजार 500 यानी 41.45% मत हासिल हुए थे. संसदीय क्षेत्र की 8 विधानसभा सीटों पर यादव वोटों की संख्या करीब 3.50 लाख से ज्यादा है. करीब 1.50 लाख यादव वोटर्स सिर्फ गुना जिले में ही हैं.