
देश की सियासत में एक बहस पुरानी है- युवा बनाम पुराने दिग्गज. कांग्रेस अध्यक्ष के चुनाव में मल्लिकार्जुन खड़गे ने तो बाकायदा संगठन में 50 अंडर 50 का फॉर्मूला तक दे दिया था. भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की बात करें तो गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में एक जनसभा को संबोधित करते हुए युवाओं को अपने कलेजे का टुकड़ा बता दिया था. यह तो हुई बयानों की बात, लेकिन क्या आपको यह पता है कि लोकसभा चुनाव में कितने युवा चुनाव मैदान में हैं और किस पार्टी ने कितने युवाओं को टिकट दिया है? कुछ युवा परिवार की सियासी विरासत आगे बढ़ाने के लिए चुनाव मैदान में हैं तो कुछ ऐसे भी हैं जिन्हें अपनी मेहनत पर भरोसा है. आइए, नजर डालते हैं संसद पहुंचने के लिए लोकसभा चुनाव में किस्मत आजमा रहे ऐसे ही कुछ युवा नेताओं पर जिनकी उम्र 25 से 30 साल के बीच है.
इस बार लोकसभा चुनाव में जहां समाजवादी पार्टी ने यूपी में ऐसे तीन युवाओं को टिकट दिया है तो वहीं कांग्रेस ने बिहार और राजस्थान में दो और चिराग पासवान की पार्टी एलजेपीआर ने एक प्रत्याशी को मैदान में उतारा है. इसके अलावा राजस्थान में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में एक ऐसा युवा चुनाव लड़ रहा है, जिसकी चारों ओर चर्चा है.
मछलीशहर सीट से प्रिया सरोज
उत्तर प्रदेश की मछलीशहर सीट से समाजवादी पार्टी ने पूर्व सांसद और वर्तमान विधायक तूफानी सरोज की बेटी प्रिया सरोज को टिकट दिया है. प्रिया सरोज ने पिछले साल नवंबर में ही 25 साल की उम्र पूरी की है. प्रिया की स्कूली पढ़ाई दिल्ली के एयरफोर्स गोल्डन जुबिली इंस्टीट्यूट से हुई और उसके बाद उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से लॉ की पढ़ाई की. फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस कर रही हैं. अब सपा ने उन्हें मछलीशहर से टिकट दिया है. वह यूपी के सबसे युवा प्रत्याशियों में से एक हैं, जिनकी राजनीति में एंट्री में हुई है. उनका मुकाबला बीजेपी के सिटिंग सांसद बीपी सरोज से होगा.
प्रिया सरोज के पिता तूफानी सरोज 1999 से लेकर 2014 तक सैदपुर और मछलीशहर से सांसद चुने गए. हालांकि 2014 में उन्हें मोदी लहर में हार का सामना करना पड़ा. उसके बाद 2022 के विधानसभा चुनाव में वो केराकत सुरक्षित विधानसभा सीट से विधायक चुने गए.
कौशाम्बी से पुष्पेंद्र सरोज
समाजवादी पार्टी ने उत्तर प्रदेश की कौशाम्बी लोकसभा सीट से अबतक के सबसे युवा प्रत्याशी को टिकट दिया है. इस आरक्षित सीट पर सपा ने अपने राष्ट्रीय महासचिव और पूर्व कैबिनेट मंत्री इंद्रजीत सरोज के बेटे पुष्पेंद्र सरोज को मैदान में उतारा है. उनकी उम्र हाल ही में 25 साल पूरी हुई है और वह क्वीन मैरी यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन से एकाउंटिंग एंड मैनेजमेंट की पढ़ाई कर राजनीतिक पारी शुरू कर रहे हैं.
पुष्पेंद्र सरोज सियासी परिवार से हैं. पुष्पेंद्र सरोज के पिता इंद्रजीत सरोज 5 बार के विधायक हैं. उनका अच्छा सियासी रसूख है. वह देश के सबसे युवा उम्मीदवार भी हो सकते हैं क्योंकि एक मार्च, 2024 को ही उनकी उम्र 25 साल हुई है. पुष्पेंद्र सरोज का इस सीट पर बीजेपी के सीनियर नेता और दो बार से लगातार सांसद विनोद सोनकर से मुकाबला है.
भरतपुर से संजना जाटव
राजस्थान की भरतपुर लोकसभा सीट से कांग्रेस ने संजना जाटव को अपना प्रत्याशी बनाया है. संजना की उम्र 25 साल है और वह राजस्थान में हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव भी लड़ चुकी हैं. साल 2021 में वह जिला परिषद की सदस्य बनी थीं और उसके बाद उनकी राजनीति में पकड़ मजबूत हुई थी. जिसके बाद कांग्रेस ने उन्हें कठूमर विधानसभा सीट से टिकट दिया था. हालांकि इसमें वह करीब 400 वोटों से हार गई थीं.
संजना जाटव अलवर जिले की कठूमर तहसील के गांव समूंची की रहने वाली हैं. हालांकि, संजना जाटव का पीहर भरतपुर जिले के भूसावर में हैं. उनके पति कप्तान सिंह राजस्थान पुलिस में कांस्टेबल हैं. संजना का मुकाबला बीजेपी के रामस्वरूप कोली से होगा. यहां बीजेपी ने वर्तमान सांसद रंजीता कोली का टिकट काटकर उन्हें मैदान में उतारा है.
झारखंड की रांची सीट से यशस्विनी सहाय
कांग्रेस ने झारखंड की रांची लोकसभा सीट से पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोध कांत सहाय की बेटी यशस्विनी सहाय को मैदान में उतारा है. यशश्विनी ने इटली की एक यूनिवर्सिटी से लॉ की डिग्री हासिल की है और फिलहाल मुंबई सेशन कोर्ट में प्रैक्टिस कर रही हैं. इसके अलावा वह कैलाश सत्यार्थी फाउंडेशन से भी जुड़ी हुई हैं. यशस्विनी झारखंड में बाल श्रम, यौन शोषण की रोकथाम और पॉक्सो एक्ट पर भी काम कर रही हैं.
यशस्विनी के पिता सुबोध कांत सहाय रांची सीट से तीन बार सांसद चुने गए. उन्होंने अपना आखिरी चुनाव 2009 में जीता था. इसके बाद से उन्हें रांची से जीत नहीं मिल सकी. अब उन्होंने अपनी बेटी को मैदान में कांग्रेस की टिकट से उतारा है. वहीं यशश्विनी की मां रेखा सहाय अभिनेत्री रह चुकी हैं. रांची में अब यशस्विनी का मुकाबला बीजेपी के वर्तमान सांसद संजय सेठ से होगा. एक ओर संजय सेठ बीजेपी के पुराने और मंझे हुए नेता हैं. वहीं कांग्रेस की ओर से एक युवा प्रत्याशी है, जिसके पास चुनावी राजनीति का कोई अनुभव नहीं है.
बिहार के समस्तीपुर से शांभवी चौधरी
बिहार की समस्तीपुर सीट पर लोक जनशक्ति पार्टी (R) की टिकट पर चुनाव लड़ रहीं शांभवी चौधरी भी सबसे युवा प्रत्याशियों में से हैं. शांभवी सियासी परिवार से आती हैं. उनके पिता अशोक चौधरी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के करीबी हैं और इस समय जेडीयू की बिहार इकाई के अध्यक्ष भी हैं. वहीं, शांभवी के ससुर कुणाल किशोर पूर्व पुलिस अधिकारी हैं. समस्तीपुर से उम्मीदवार बनने के बाद अब शांभवी चौधरी का भी राजनीति में डेब्यू हो गया है.
शांभवी चौधरी ने दिल्ली के लेडी श्रीराम कॉलेज और दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से पढ़ाई की है. शांभवी चौधरी ने सोशियोलॉजी से पीएचडी भी की है. वह काफी समय से सामाजिक कार्यों से जुड़ी हैं. शांभवी चौधरी के पति का नाम शायन कुणाल है. उनकी शादी साल 2022 में हुई थी.
अगर शांभवी के पिता की बात करें तो उन्होंने अपनी सियासी पारी कांग्रेस से शुरू की थी. वह पहली बार बिहार की बरबीघा सीट से विधायक बने थे और तत्कालीन राबड़ी सरकार में कैबिनेट मंत्री भी बने. कांग्रेस ने उन्हें बिहार का प्रदेश अध्यक्ष भी बनाया था. हालांकि बाद में कांग्रेस छोड़कर नीतीश कुमार के साथ चले आए और नीतीश ने उन्हें कैबिनेट मंत्री बनाया. अब उनकी बेटी एलजेपीआर उम्मीदवार के तौर पर समस्तीपुर से चुनाव लड़ रही है.
यूपी की कैराना सीट से इकरा चौधरी
यूपी की कैराना सीट से समाजवादी पार्टी ने 29 वर्षीय इकरा चौधरी को टिकट दिया है. इकरा ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के लेडी श्रीराम कॉलेज से ग्रेजुएशन किया और उसके बाद यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन से मास्टर्स किया था. वह कैराना से लगातार तीसरी बार मौजूदा विधायक चौधरी नाहिद हसन की छोटी बहन हैं. इससे पहले इकरा जिला पंचायत सदस्य का चुनाव भी लड़ चुकी हैं, लेकिन इसमें उनकी हार हुई थी.
कैराना सीट पर हसन परिवार का वर्चस्व माना जाता है. इकरा के दादा अख्तर हसन नगर पालिका के चेयरमैन रहे और फिर बाद में इसी सीट से सांसद बने थे. उसके बाद इकरा के पिता मुनव्वर हसन भी इस सीट से सांसद रहे. मुनव्वर के निधन के बाद उनकी पत्नी तबस्सुम हसन भी कैराना लोकसभा सीट से दो बार सांसद रहीं. तीसरी पीढ़ी में उनके भाई नाहिद हसन 2014 में उपचुनाव जीतकर पहली बार विधायक बने थे. उसके बाद से वो लगातार विधायक बन रहे हैं.
बाड़मेर-जैसलमेर से रविंद्र सिंह भाटी
इस समय अगर राजस्थान में सबसे अधिक किसी सीट की चर्चा है तो सीट है जैसलमेर-बाड़मेर. इसकी वजह है कि यहां से शिव सीट से 26 वर्षीय निर्दलीय विधायक रविंद्र सिंह भाटी भी चुनाव लड़ रहे हैं. उनकी रैलियों में आ रही भीड़ ने बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही दलों की नींद हराम कर दी है.
राजस्थान के सामान्य परिवार से आने वाले रविंद्र भाटी ने 2019 में ABVP के जरिए छात्र राजनीति से अपनी शुरुआत की. जय नारायण व्यास यूनिवर्सिटी के छात्रसंघ अध्यक्ष के लिए जब उन्हें टिकट नहीं मिला तो उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ा और 57 साल में पहली बार कोई निर्दलीय छात्रसंघ अध्यक्ष बना. इसके बाद वो चर्चा में तब आए, जब उन्होंने 2022 में अपने दोस्त को जय नारायण व्यास यूनिवर्सिटी में छात्रसंघ चुनाव जितवाया. 2023 में बीजेपी से जब उन्होंने शिव सीट से अपनी दावेदारी पेश की और उन्हें टिकट नहीं मिला तो उन्होंने निर्दलीय ताल ठोक दी.
विधानसभा चुनाव में उनके सामने बाड़मेर जिलाध्यक्ष स्वरूप सिंह खारा थे और कांग्रेस की ओर 9 बार के विधायक अमीन खान थे. इसके बावजूद भाटी ने जीत हासिल की और बीजेपी उम्मीदवार की जमानत जब्त करा दी. अब वो लोकसभा चुनाव के लिए एक बार फिर निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर सामने हैं.