Advertisement

तीसरे चरण में हुई 65.68% वोटिंग, चुनाव आयोग ने चार दिन बाद जारी किया आंकड़ा

चुनाव आयोग ने तीसरे चरण की वोटिंग के ठीक बाद आंकड़ा जारी किया था, जिसमें  64.40 फीसदी वोटिंग की बात सामने आई थी. चुनाव आयोग की कई कोशिशों के बावजूद तीसरे चरण में भी मतदान का आंकड़ा 2019 से कम ही रहा. जिन राज्यों में कम वोटिंग हुई है उनमें बिहार, महाराष्ट्र, यूपी, गुजरात शामिल रहे.

ऐश्वर्या पालीवाल
  • नई दिल्ली,
  • 11 मई 2024,
  • अपडेटेड 4:27 PM IST

लोकसभा चुनाव का माहौल जारी है. तीन चरणों के चुनाव हो चुके हैं और अब 13 मई को चौथे चरण का चुनाव होना है. इससे पहले शनिवार को तीसरे चरण में हुए चुनाव को लेकर निर्वाचन आयोग ने वोटिंग का आंकड़ा जारी कर दिया है. सामने आया है कि, तीसरे चरण के चुनाव का फाइनल वोटिंग टर्नआउट 65.68% है.

बता दें कि इससे पहले चुनाव होने के बाद भी चुनाव आयोग ने आंकड़ा जारी किया था, जिसमें  64.40 फीसदी वोटिंग होने की बात सामने आई थी, हालांकि शनिवार को जारी हुआ आंकड़ा, चुनाव के दिन जारी हुए आंकड़े से तकरीबन 1 प्रतिशत अधिक है. 

Advertisement

चुनाव आयोग ने वोटिंग के ठीक बाद जारी किया था आंकड़ा
चुनाव आयोग ने तीसरे चरण की वोटिंग के ठीक बाद आंकड़ा जारी किया था, जिसमें  64.40 फीसदी वोटिंग की बात सामने आई थी. चुनाव आयोग की कई कोशिशों के बावजूद तीसरे चरण में भी मतदान का आंकड़ा 2019 से कम ही रहा. जिन राज्यों में कम वोटिंग हुई है उनमें बिहार, महाराष्ट्र, यूपी, गुजरात शामिल रहे.

2019 में तीसरे चरण में कितनी फीसदी हुई थी वोटिंग?
बता दें कि 2019 में मतदान का डाटा 67.33 प्रतिशत था. इस तरह से इस बार पिछली बार के मुकाबले मतदान का डाटा तकरीबन 2 फीसदी कम रहा. चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक इस बार उत्तर प्रदेश, बिहार, गुजरात, महाराष्ट्र चार ऐसे राज्य रहे जहां मतदान का प्रतिशत कम रहा. बीती सात मई को तीसरे चरण में उत्तर प्रदेश की 10, बिहार की 5, गुजरात की 25 और महाराष्ट्र की 11 सीटों पर वोटिंग हुई थी. ये चार राज्यों की कुल 51 सीटें हैं जहां मतदान सबसे कम हुआ था.

Advertisement

चुनाव आयोग ने ये आंकड़ा ऐसे समय में जारी किया है, जब कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने वोटिंग प्रतिशत जारी के आंकड़े जारी करने में लेट-लतीफी पर सवाल उठाए थे. 

कांग्रेस अध्यक्ष ने देरी पर उठाए थे सवाल
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने INDIA ब्लॉक के अपने साथी दलों को एक चिट्ठी लिखी थी. इस चिट्ठी में कहा गया था कि ये लोकसभा चुनाव ‘लोकतंत्र और संविधान’ बचाने की लड़ाई है. उन्होंने चुनाव आयोग के चिंताजनक रवैये के बारे में लिखते हुए कहा था कि अंतिम मतदान प्रतिशत के आंकड़े जारी करने में हो रही अत्यधिक देरी और उस डेटा में पाई गई विसंगतियां इन चुनावों की स्वतंत्र और निष्पक्ष प्रकृति पर गंभीर संदेह पैदा कर रही है.

खड़गे ने कहा था कि यह कोई सामान्य चुनाव नहीं है, यह हमारे लोकतंत्र और संविधान को बचाए रखने की लड़ाई है. इस संदर्भ में, लोकतंत्र की रक्षा के लिए आवाज उठाना और ईसीआई को जवाबदेह बनाना हमारा सामूहिक कर्तव्य है ताकि वह अपने मामलों को जिम्मेदारी से संचालित कर सके.

इसके साथ ही खड़गे ने यह भी कहा था कि 'पहले चुनाव आयोग 24 घंटे के अंदर यह बता देता था कि कितना फीसदी मतदान हुआ है, लेकिन इस बार देरी हो रही है, उसकी वजह क्या है? इसे लेकर अभी तक आयोग द्वारा कोई सफाई क्यों नहीं दी गई है. देरी के बाद भी जो डेटा आयोग ने रिलीज किया है उसमें कई अहम जानकारियां नहीं हैं. आयोग को बताना चाहिए कि हर पोलिंग स्टेशन पर कितना प्रतिशत मतदान हुआ.' उन्होंने सभी सहयोगी दलों से इस तरह की कथित गड़बड़ी के खिलाफ आवाज उठाने की अपील की.

Advertisement

चुनाव आयोग ने खड़गे की बात को बताया था गैरजरूरी
चुनाव आयोग ने मल्लिकार्जुन खड़गे के बयानों को चुनाव संचालन के महत्वपूर्ण पहलुओं पर आक्रामकता करार दिया. चुनाव आयोग ने कहा कि मतदान से जुड़ा डेटा जारी करने के संबंध में आरोप निराधार हैं. इससे स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने में भ्रम पैदा होता है. आयोग ने कहा कि ऐसे बयानों से चुनावों में मतदाताओं की भागीदारी पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है. राज्यों में बड़ी चुनाव मशीनरी इससे हतोत्साहित भी हो सकती है. 

चुनाव आयोग ने की खड़गे के बयान की आलोचना
निर्वाचन आयोग ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के उस बयान की आलोचना की है जिसमें उन्होंने चुनाव प्रक्रिया के दौरान मतदान के लिए कुल मत और कुल डाले गए मतों की संख्या समय से घोषणा न करने पर आयोग की मंशा पर सवाल उठाए थे. आयोग का कहना है कि खड़गे का बयान चुनाव प्रक्रिया पर असर नकारात्मक असर डालेगा. आयोग ने खड़गे की प्रतिक्रिया को निराधार बताया है. मतदान के दौरान डाटा बताने से बेवजह भ्रम की स्थिति होगी. वैसे भी आयोग के आधिकारिक एप वोटर टर्न आउट के जरिए आम जनता को मत प्रतिशत की लाइव जानकारी मिलती रहती है. 

चुनाव आयोग ने मतदाता मतदान डेटा पर इंडिया गठबंधन के नेताओं को संबोधित खड़गे के पत्र का संज्ञान लिया है और इसे गैरजरूरी बताया है. आयोग ने खड़गे की दलीलों को स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया. 

Advertisement

 

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement