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क्या मध्य प्रदेश बीजेपी के लिए अगला गुजरात बनता जा रहा है? अगर इंडिया टुडे-एक्सिस माई इंडिया का एग्जिट पोल के अनुमान सही साबित होते हैं तो मध्य प्रदेश बीजेपी के लिए अगला गुजरात साबित हो सकता है.
लोकसभा चुनाव की वोटिंग खत्म होने के बाद शनिवार शाम आए एग्जिट पोल में बीजेपी एक बार फिर मध्य प्रदेश में क्लीन स्विप कर सकती है. इस बार बीजेपी यहां की सभी सीटों पर जीत हासिल कर सकती है. बीजेपी को 28 या फिर सभी 29 सीटों पर जीत मिलने का अनुमान है. जबकि, कांग्रेस पिछली बार की तरह ही एक सीट पर जीतती नजर आ रही है.
2019 के चुनाव में बीजेपी ने यहां की 29 में से 28 सीटों पर जीत हासिल की थी. 2024 में भी पार्टी उसी नतीजे को दोहराते नजर आ रही है. 2014 में बीजेपी ने 27 सीटें जीती थीं और कांग्रेस सिर्फ छिंदवाड़ा और गुना में ही जीती थी. 2019 में बीजेपी ने छिंदवाड़ा छोड़कर बाकी सभी सीटों पर जीत हासिल की थी.
2023 के आखिरी में हुए विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने मध्य प्रदेश की 230 सीटों में से 163 सीट जीत ली थी. बीजेपी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर चुनाव लड़ा था और नारा दिया था- 'एमपी के मन में मोदी, मोदी के मन में एमपी.' चुनाव के बाद शिवराज सिंह चौहान की जगह उज्जैन से विधायक मोहन यादव को मुख्यमंत्री बनाकर बीजेपी ने चौंका दिया. चौहान विदिशा लोकसभा सीट से चुनाव लड़ रहे हैं, जो बीजेपी की सुरक्षित सीटों में से एक है.
लोकसभा चुनाव में बीजेपी कांग्रेस को न सिर्फ झटका दे सकती है, बल्कि पार्टी का वोट शेयर भी लगभग 3 प्रतिशत बढ़कर 61 फीसदी के पार जा सकता है. अब तक बड़े राज्यों में केवल गुजरात ही ऐसा था, जहां बीजेपी का प्रदर्शन इतना दमदार रहा है.
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कांग्रेस का सफाया हो गया
2023 में कांग्रेस के कई बड़े नेता विधानसभा चुनाव हार गए थे. पार्टी हाई कमांड ने भी कमलनाथ की जगह जीतू पटवारी को प्रदेश कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष बना दिया. जबकि, इंदौर से आने वाले पटवारी खुद भी चुनाव हार गए थे. हालांकि, पार्टी को उम्मीद थी कि उनसे पार्टी को आम चुनाव में नई ऊर्जा मिलेगी. लेकिन इंदौर लोकसभा सीट से ही आखिरी वक्त में कांग्रेस उम्मीदवार के पाला बदलने के बाद कांग्रेस को यहां से वॉकओवर मिल गया. इसके बाद पटवारी को शर्मिंदगी का सामना भी करना पड़ा.
अगर एग्जिट पोल का अनुमान सही निकला तो कांग्रेस मध्य प्रदेश में अपना आखिरी किला छिंदवाड़ा भी गंवाने जा रही है. 1990 के दशक में हुई उपचुनाव में एक हार को छोड़ दिया जाए, तो चार दशकों से कांग्रेस का यहां दबदबा रहा है. 2019 में कमलनाथ के बेटे नकुलनाथ ने यहां से चुनाव जीता था.
2018 से 2020 तक कुछ समय के लिए कांग्रेस मध्य प्रदेश में सत्ता में रही थी. लेकिन ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीजेपी में आने के बाद कमलनाथ सरकार गिर गई. 2019 में गुना सीट से हारने वाले सिंधिया इस बार बीजेपी के टिकट पर यहां से चुनाव लड़ रहे हैं. एग्जिट पोल में सिंधिया की बड़ी जीत का अनुमान है.
एमपी में शुरुआती दो चरणों में मतदान कम रहा, लेकिन आखिरी दो चरणों में इसकी रफ्तार बढ़ी. 2024 में सीधी और ग्वालियर में सबसे कम मतदान रहा. अगर कांग्रेस को एमपी में एक सीट मिलती है तो इन्हीं दो में से कोई एक सीट हो सकती है.
गुजरात में कांग्रेस पर भारी पड़ती है बीजेपी
दरअसल, गुजरात में बीजेपी हमेशा कांग्रेस पर भारी रही है. 1989 से प्रत्येक लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने कांग्रेस से ज्यादा सीटें जीती हैं. 2004 से 2014 तक जब केंद्र में यूपीए सरकार थी, तब भी बीजेपी ने कांग्रेस से ज्यादा सीटों पर जीत दर्ज की थी. 2014 से 2019 के आम चुनाव में बीजेपी ने क्लीन स्वीप किया है और सभी 26 सीटों पर जीत दर्ज की है. इतना ही नहीं, 2019 में बीजेपी के 18 उम्मीदवार राज्य में ढाई लाख से ज्यादा वोटों के अंतर से चुनाव जीते थे. इस बार भी एग्जिट पोल में गुजरात में सभी सीटों पर बीजेपी की जीत होने का अनुमान लगाया जा रहा है. बीजेपी ने इस बार गुजरात में प्रत्येक सीट पर 5 लाख से ज्यादा वोटों से जीत हासिल करने का टारगेट रखा है.