
लोकसभा चुनाव के लिए ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) पार्टी ने राज्य की सभी 42 सीटों पर उम्मीदवारों के नाम का ऐलान किया है. इस बार ममता बनर्जी ने मिमी चक्रवर्ती और नुसरत जहां जैसे मौजूदा सांसदों को टिकट नहीं दिया है. उनकी जगह रचना बनर्जी और शताब्दी रॉय जैसे कई नए चेहरों पर दांव लगाया गया है.
बंगाल की बशीरहाट सीट से सांसद नुसरत जहां और जादवपुर सीट से सांसद मिमी चक्रवर्ती को इस बार टीएमसी ने टिकट नहीं दिया है. पार्टी ने इस बार बशीरहाट सीट से हाजी नुरुल इस्लाम को जबकि जादवपुर सीट से सायनी घोष को चुनावी मैदान में उतारा है.
ममता का नए चेहरों पर दांव
ममता बनर्जी ने हुगली सीट से इस बार रचना बनर्जी को चुनावी मैदान में उतारा है. इस सीट पर चुनावी टक्कर के जोरदार होने के आसार हैं क्योंकि बीजेपी ने इस सीट से लॉकेट चटर्जी को खड़ा किया है. लॉकेट ने 2019 लोकसभा चुनाव में इस सीट से जीत दर्ज की थी. वहीं, जादवपुर सीट से युवा अभिनेत्री सयानी घोष को टिकट दिया गया है. इस सीट से पार्टी की मौजूदा सांसद मिमी चक्रवर्ती को इस बार टिकट नहीं दिया गया है.
बांग्ला फिल्मों के सुपरस्टार दीपक अधिकारी (देव) को घाटल लोकसभा सीट से टिकट दिया गया है. शताब्दी रॉय को बीरभूम से पार्टी ने चुनावी मैदान में उतारा है. वहीं, जून मालिया को मिदनापुर लोकसभा सीट से टिकट दिया है. घाटल लोकसभा सीट से टॉलीवुड सुपरस्टार दीपक अधिकारी (देव) को टिकट दिया है. उनके अलावा शताब्दी रॉय बीरभूम से चुनावी मैदान में हैं.
टीएमसी ने पूर्व क्रिकेटर यूसुफ पठान को भी लोकसभा का टिकट दिया है. यूसुफ पठान को ममता बनर्जी की पार्टी ने बरहामपुर से कैंडिडेट बनाया है है. इस बात की पूरी संभावना है कि पठान के सामने कांग्रेस के दिग्गज नेता अधीर रंजन चौधरी चुनाव लड़ेंगे. हालांकि कांग्रेस की ओर से इस सीट के लिए उम्मीदवार का ऐलान नहीं किया गया है. अधीर रंजन ही इस सीट से मौजूदा सांसद हैं. भारतीय जनता पार्टी (BJP) बरहामपुर से डॉ. निर्मल कुमार साहा का नाम पहले ही फाइनल कर चुकी है.
बंगाल में अकेले चुनाव क्यों लड़ेंगी टीएमसी?
इस तरह ममता बनर्जी की पार्टी ने बंगाल में अपने दम पर अकेले लोकसभा चुनाव लड़ने का फैसला किया है. पश्चिम बंगाल में इंडिया ब्लॉक टूटने के पीछे कई वजह बताई जा रही हैं. जानकारों का मानना है कि टीएमसी और कांग्रेस गठबंधन न हो पाने के पीछे मुख्य वजह कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी की बयानबाजी है, क्योंकि अधीर रंजन पिछले साल 2023 से लगातार ममता के खिलाफ बयान दे रहे हैं. ऐसे में साफ हो गया है कि ममता अधीर के खिलाफ कोई भी मौका नहीं छोड़ना चाहती. और इसलिए अधीर को हराने के लिए पार्टी के सबसे कद्दावर चेहरे को मैदान में उतारा है.
दरअसल, ममता बनर्जी का बंगाल में अकेले चलने का फैसला कांग्रेस के लिए चौंकाने वाला है, क्योंकि उन्होंने पहले कई बार मंच से कांग्रेस नेतृत्व पर उनके सुझाव और प्रस्ताव अस्वीकार करने का आरोप लगाए. और इसके बाद उन्होंने बंगाल में अकेले चुनाव लड़ने का फैसला किया है.