Advertisement

मेनका गांधी के लिए ये चुनाव नहीं आसान... सुल्तानपुर में सपा-बसपा के इस दांव ने फंसा दिया

यूपी की सुल्तानपुर लोकसभा सीट से बीजेपी उम्मीदवार मेनका गांधी के सामने सपा निषाद और बसपा ने कुर्मी बिरादरी से उम्मीदवार उतार दिया है. यह दोनों ही जातियां इस सीट पर बीजेपी को वोट करती रही हैं.

मेनका गांधी (फाइल फोटो) मेनका गांधी (फाइल फोटो)
aajtak.in
  • सुल्तानपुर,
  • 17 अप्रैल 2024,
  • अपडेटेड 12:00 PM IST

उत्तर प्रदेश की हॉट सीटों में से एक सुल्तानपुर से भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के टिकट पर पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी चुनाव लड़ रही हैं. बीजेपी उम्मीदवार मेनका के सामने विपक्षी इंडिया ब्लॉक की ओर से समाजवादी पार्टी (सपा) ने पूर्व मंत्री रामभुआल निषाद और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने उदराज वर्मा को उतारा है. सपा के निषाद और बसपा के कुर्मी कार्ड ने बीजेपी के लिए इस सीट पर चुनौती कड़ी कर दी है.

Advertisement

मेनका गांधी बड़े कद की नेता हैं लेकिन सपा-बसपा के गणित ने सुल्तानपुर की लड़ाई को त्रिकोणीय बना दिया है. सपा ने इस सीट से भीम निषाद को टिकट दिया था. पार्टी ने भीम का टिकट काटकर रामभुआल निषाद पर दांव लगा दिया. रामभुआल की गिनती बड़े निषाद नेताओं में होती है. वह बसपा से दो बार विधायक और मायावती की सरकार में मंत्री रहे हैं. वहीं, बसपा ने सवर्ण उम्मीदवार के ट्रेंड को दरकिनार कर कुर्मी बिरादरी से आने वाले जिला पंचायत सदस्य उदराज वर्मा को प्रत्याशी बनाया है.

बसपा उम्मीदवार उदराज वर्मा (फाइल फोटो)

बसपा ने उदराज को 2022 के यूपी चुनाव में सुल्तानपुर की लम्भुआ विधानसभा सीट से उम्मीदवार घोषित करने के बाद टिकट काट दिया था. बसपा के उम्मीदवार इस सीट से 1999 और 2004 के लोकसभा चुनाव में जीत हासिल कर चुके हैं वहीं सपा यह सीट कभी नहीं जीत पाई है. इस सीट से सबसे ज्यादा आठ बार कांग्रेस, पांच बार बीजेपी, दो बार बसपा और एक बार जनता दल के उम्मीदवार जीते हैं. सपा ने पहली बार साइकिल दौड़ने की उम्मीद से निषाद कार्ड खेला तो वहीं बसपा के कुर्मी-दलित समीकरण ने चुनावी मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है.

Advertisement

यह भी पढ़ें: 'वरुण अपना भविष्य खुद ही तय करेंगे', मेनका गांधी बोलीं- प्रचार करेंगे या नहीं अभी फैसला नहीं किया

मेनका के लिए मुश्किल क्यों

मेनका गांधी के लिए मुश्किल यह है कि पिछले चुनावों में उनके प्रचार अभियान की बागडोर संभालते रहे वरुण गांधी इस बार पीलीभीत से टिकट कटने के बाद साइलेंट मोड में हैं. 2019 के चुनाव में मेनका की जीत के पीछे बीजेपी संगठन था ही, वरुण गांधी के प्रचार और रणनीति को भी श्रेय दिया गया. बीजेपी के कोर वोटर ब्राह्मण और राजपूत में भी घनश्याम तिवारी हत्याकांड को लेकर तनातनी चल रही है. विजय नारायण सिंह हत्याकांड में घनश्याम की पत्नी और भाइयों का नाम आने के बाद ब्राह्मण वोटर बीजेपी से नाराज बताए जा रहे हैं और इसका नुकसान मेनका गांधी को हो सकता है.

सपा उम्मीदवार रामभुआल निषाद (फाइल फोटो)

सुल्तानपुर का जातीय समीकरण

सुल्तानपुर सीट के जातीय समीकरणों की बात करें तो यहां करीब ढाई लाख निषाद मतदाता हैं. कुर्मी जाति के मतदाता भी अच्छी तादाद में हैं. यह दोनों ही जातियां सुल्तानपुर में बीजेपी के लिए वोट करती रही हैं लेकिन अबकी सपा और बसपा के इन्हीं प्रभावी जातियों से उम्मीदवार उतारने के दांव ने बीजेपी को फंसा दिया है. ब्राह्मण मतदाता पहले ही नाराज थे, अब सजातीय उम्मीदवार आ जाने से अगर निषाद और कुर्मी वोटर भी छिटके तो मेनका की मुश्किलें बढ़ सकती हैं.

Advertisement

यह भी पढ़ें: सुल्तानपुर से मेनका गांधी को मिल रही है गठबंधन उम्मीदवार से कड़ी चुनौती, जानिए यहां के चुनावी मुद्दे

कैसा रहा था 2019 का नतीजा

पिछले चुनाव में सपा और बसपा गठबंधन कर चुनाव मैदान में थे. बीजेपी की मेनका के खिलाफ गठबंधन से बसपा के टिकट पर चंद्रभद्र सिंह मैदान में थे. कांग्रेस ने तब डॉक्टर संजय सिंह को उम्मीदवार बनाया था. मेनका गांधी को 4 लाख 58 हजार 281 वोट मिले थे. तब चंद्रभद्र सिंह 4 लाख 44 हजार 422 वोट के साथ दूसरे और कांग्रेस के डॉक्टर संजय 41 हजार 588 वोट के साथ तीसरे स्थान पर रहे थे. मेनका गांधी करीब 14 हजार वोट के अंतर से चुनाव जीत सकी थीं.

रिपोर्टः नितिन श्रीवास्तव

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement