
मणिपुर में भारी सुरक्षाकर्मियों की तैनाती के बीच आंतरिक मणिपुर संसदीय क्षेत्र के 11 मतदान केंद्रों पर दोबारा वोटिंग शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो गया. कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच सुबह सात बजे से शाम पांच बजे तक पुनर्मतदान हुआ. पुनर्मतदान में शाम पांच बजे तक 81.6 फीसदी मतदान हुआ.
पहले चरण में 19 अप्रैल को हुए मतदान के बाद सोमवार को इंफाल पूर्वी जिले के सात और इंफाल पश्चिम जिले के चार मतदान केंद्रों पर दोबारा वोटिंग हुई. 19 अप्रैल को मतदान के दौरान यहां दंगे, हिंसा की घटना हुई. इस बीच मणिपुर में लोकसभा चुनाव के दूसरे चरण के लिए चुनाव प्रचार तेज हो गया है.
विपक्षी कांग्रेस ने बड़ी संख्या में मतदान केंद्रों पर बूथ कैप्चरिंग होने का दावा करते हुए 47 मतदान केंद्रों पर पुनर्मतदान की मांग की थी. मणिपुर कांग्रेस के अध्यक्ष के मेघचंद्र सिंह ने कहा कि पार्टी ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी के पास शिकायत दर्ज कर आंतरिक मणिपुर निर्वाचन क्षेत्र के 36 और बाहरी मणिपुर निर्वाचन क्षेत्र के 11 मतदान केंद्रों पर पुनर्मतदान की मांग की.
अरुणाचल में भी दोबारा वोटिंग
चुनाव आयोग ने अरुणाचल प्रदेश के आठ बूथों पर पुनर्मतदान का आदेश दिया है, जहां 19 अप्रैल को लोकसभा और विधानसभा चुनावों के लिए एक साथ मतदान के दौरान हिंसा और EVM तोड़ने की घटनाएं सामने आई थीं. मुख्य निर्वाचन अधिकारी पवन कुमार सैन ने आठ बूथों पर मतदान को जीरो बताया और 24 अप्रैल को दोबारा चुनाव कराने का आदेश दिया.
चुनाव निकाय के अनुसार, पूर्वी कामेंग जिले के बामेंग विधानसभा क्षेत्र के सारियो, कुरुंग कुमेय के न्यापिन विधानसभा के लोंगटे लोथ, बोगने, सियांग जिले के रमगोंग विधानसभा क्षेत्र के मोलोम बूथ, डिंगसेर, बोगिया सियुम, जिम्बारी में पुनर्मतदान होगा.
बता दें कि मणिपुर गत एक वर्ष से जातीय हिंसा से प्रभावित है. पिछले साल 3 मई को राज्य में मैतेई और कुकी-जो समुदायों के बीच संघर्ष शुरू हुआ था. मणिपुर हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से मैतेई समुदाय को अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने पर विचार करने के लिए कहा था. मैतेई समुदाय की अधिकांश आबादी इंफाल घाटी में रहती है और कुकी-जो आदिवासी समुदाय आसपास की पहाड़ियों पर रहते हैं.
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 3 मई 2023 से 28 फरवरी 2024 तक जातीय हिंसा में 219 लोग मारे गए हैं और 60,000 लोग विस्थापित हुए हैं. पहले के आंकड़ों में भी 1,000 से अधिक लोगों के घायल होने और 32 लोगों के लापता होने की बात कही गई थी. वहीं, हिंसक भीड़ द्वारा अलग-अलग मौकों पर 4786 घर जला दिए गए, मंदिरों और चर्चों सहित 386 धार्मिक स्थलों को नष्ट कर दिया गया. राज्य में हिंसा भड़कने और बड़े पैमाने पर जान माल के नुकसान के बाद मणिपुर हाई कोर्ट ने कुछ दिन पहले मैतेई समुदाय को एसटी दर्जा देने पर विचार करने के लिए राज्य सरकार को दिया गया अपना निर्देश वापस ले लिया था.