
लोकसभा चुनाव में जम्मू कश्मीर की अनंतनाग-राजौरी लोकसभा सीट हॉट सीट बन गई है, इसकी मुख्य वजह है राज्य के दो पूर्व मुख्यमंत्री इस लोकसभा क्षेत्र से चुनावी मैदान में आमने-सामने हैं. पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की मुखिया महबूबा मुफ्ती इस सीट पर पार्टी की उम्मीदवार होंगी जिनका मुकाबला पूर्व सीएम और डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव आजाद पार्टी (डीपीएपी) के अध्यक्ष गुलाम नबी आजाद से होगा.
नेशनल कॉन्फ्रेंस ने प्रभावशाली गुर्जर नेता मियां अल्ताफ अहमद को अनंतनाग-राजौरी से मैदान में उतारा है और जम्मू कश्मीर अपनी पार्टी ने जफर इकबाल मन्हास को उम्मीदवार बनाया है. वहीं भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इस सीट के लिए अभी तक अपने उम्मीदवार की घोषणा नहीं की है. मुफ्ती और आजाद के चुनावी मुकाबले में उतरने से इस सीट पर लड़ाई रोचक हो गई है.
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सीट पर पीडीपी और एनसी में होता रहा है मुकाबला
महबूबा मुफ़्ती ने कहा कि उन्हें दुख इस बात का है कि नेशनल कॉन्फ्रेंस ने उनसे बिना किसी सलाह के अपने उम्मीदवार घोषित कर दिए हैं. इससे पीडीपी के कार्यकर्ता काफी निराश हैं. यही कारण है कि हम नेशनल कॉन्फ़्रेन्स को अपनी ताक़त दिखाएंगे. महबूबा मुफ़्ती ने अनंतनाग और राजौरी पुंछ के लोगों से कहा कि वह पीडीपी को मजबूत करें और जम्मू-कश्मीर के मुद्दों को लोकसभा में उठाने का अवसर दें.
2019 का जनादेश
इस सीट पर अधिकतर समय फारूक अब्दुल्ला की नेशनल कॉन्फ्रेंस का दबदबा रहा है. 2004 में इस सीट से पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती सांसद चुनी गई थीं. 2009 में नेशनल कॉन्फ्रेंस ने सीट को अपने पाले में कर लिया और मिर्जा महबूब बेग ने शानदार जीत दर्ज की. इसके बाद 2014 में एक बार फिर महबूबा मुफ्ती ने यहां से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की. 2019 में फिर से नेशनल कॉन्फ्रेंस सीट पर कब्जा कर लिया और उसके उम्मीदवार हसनैन मसूदी ने शानदार जीत दर्ज की.
अनंतनाग-राजौरी मुकाबला पीडीपी और एनसी के लिए अस्तित्व की लड़ाई है. अनंतनाग को नेशनल कॉन्फ्रेंस का गढ़ रहा है. 2019 में पीडीपी नेता और पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती तीसरे स्थान पर रहीं. मतदाताओं की बात करें तो 2019 में इस सीट पर तकरीबन 14 लाख वोटर थे. तब इस लोकसभा सीट पर तीन चरणों में मतदान हुए थे. आतंकवादियों की धमकी का असर यहां मतदान पर देखने को मिला था. यहां पर लगभग 12.86 प्रतिशत मतदान रिकॉर्ड किया गया था. यहां से तब 18 प्रत्याशी चुनाव मैदान में थें.
जीत हासिल करने वाले नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता हसनैन मसूदी को 40180 वोट मिले जबकि दूसरे नंबर पर रहे कांग्रेस के गुलाम अहमद मीर को 33504 वोट और तीसरे नंबर पर पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती को 30524 वोट मिले. वहीं पांचवे नंबर पर रही बीजेपी को 10225 वोट ही मिल सके.
परिसीमन के बाद बदली भगौलिक स्थिति
इस बीच, न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाले परिसीमन आयोग ने 2022 में इस सीट के राजनीतिक मानचित्र को फिर से तैयार किया. पूर्व राज्य में छह लोकसभा क्षेत्र- दो जम्मू क्षेत्र (जम्मू और उधमपुर) में, तीन कश्मीर में (श्रीनगर, बारामूला और अनंतनाग), और एक लद्दाख में थे. अब, जम्मू क्षेत्र, अपनी दो मूल सीटों को बरकरार रखते हुए, अनंतनाग-राजौरी सीट का एक हिस्सा कश्मीर से मिला हुआ है.
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अनंतनाग-राजौरी लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र की बात करें पहले इसमें 16 विधानसभा सीटें थी लेकिन परिसीमन के बाद इस लोकसभा सीट में 18 विधानसभाएं आ गई हैं जिनमें अनंतनाग में सात, कुलगाम में तीन, पुंछ में तीन, शोपियां के एक और राजोरी में चार विधानसभाएं हैं. परिसीमन के बाद इस सीट के सियासी समीकरण भी बदल गए हैं.
सात मई को होगा मतदान
ऐसे में इस बार मुकाबला दिलचस्प होने की पूरी उम्मीद है. गुलाम नबी आजाद ने 2014 में उधमपुर निर्वाचन क्षेत्र से कांग्रेस उम्मीदवार के रूप चुनाव लड़ा था लेकिन भाजपा नेता जितेंद्र सिंह से उन्हें शिकस्त मिली थी. बतौर खुद की पार्टी के उम्मीदवार के रूप में आजाद के लिए यह पहला लोकसभा चुनाव होगा. अनंतनाग-राजोरी सीट पर तीसरे चरण में सात मई (मंगलवार) को वोटिंग होगी.