
लोकसभा चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) से लेकर कांग्रेस तक वोटर्स के छोटे-छोटे ब्लॉक को साधने के लिए हर दांव चल रहे हैं. यूपी और बिहार से लेकर मध्य प्रदेश तक जातीय वोट गणित में यादव वोटों की लड़ाई दिलचस्प हो गई है. यूपी में अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी (सपा) और बिहार में लालू यादव की अगुवाई वाले राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के कोर वोटबैंक को अपने पाले में लाने के लिए बीजेपी मध्य प्रदेश के सीएम मोहन यादव को ला रही है तो वहीं एमपी में कांग्रेस अखिलेश को घुमा रही है.
यूपी-बिहार के प्रचार में मोहन को ला रही बीजेपी
यूपी और बिहार में बीजेपी की राजनीति का बेस अभी तक गैर यादव ओबीसी रहा है. अब पार्टी इंक्लूसिव यादव पॉलिटिक्स पर आ रही है. एमपी का सीएम बनने के बाद मोहन यादव ने पटना का दौरा भी किया था जहां उनका सम्मान भी किया गया था. अब पार्टी मोहन को यूपी और बिहार के यादव लैंड में चुनाव प्रचार के लिए उतारने की तैयारी में है. मोहन का नाम यूपी के स्टार प्रचारकों की लिस्ट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह और सीएम योगी आदित्यनाथ के ठीक बाद है. बिहार के लिए जारी 40 स्टार प्रचारकों की लिस्ट में भी बीजेपी ने मोहन यादव का नाम रखा है.
एमपी में यादव वोट के लिए अखिलेश को घुमा रही कांग्रेस
बीजेपी की कोशिश मोहन के चेहरे पर यूपी-बिहार के यादव वोट साधने की है तो वहीं मध्य प्रदेश में कांग्रेस ने भी अब रणनीति बदल ली है. कांग्रेस अब मध्य प्रदेश के यादवों को अपने पाले में करने, मोहन फैक्टर की काट के लिए सपा प्रमुख अखिलेश यादव को घुमा रही है. सपा प्रमुख अखिलेश मध्य प्रदेश में कांग्रेस के लिए चुनाव प्रचार करते नजर आएंगे. इसे लेकर कांग्रेस और सपा के स्टेट लेवल नेताओं की बैठक भी हुई है जिसमें अखिलेश की रैलियों के कार्यक्रम पर व्यापक मंथन किया गया.
एमपी सपा के अध्यक्ष मनोज यादव के मुताबिक सूबे में कांग्रेस उम्मीदवारों के समर्थन में अखिलेश छह रैलियों को संबोधित करेंगे. एमपी कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के मीडिया एडवाइजर केके मिश्रा ने कहा है कि अखिलेश यादव की रैलियों का कार्यक्रम तैयार कर लिया गया है. दोनों ही दलों की स्टेट यूनिट्स की ओर से इसे जल्द ही अपने-अपने केंद्रीय नेतृत्व को भेज दिया जाएगा. सपा प्रमुख अखिलेश यादव को कांग्रेस गुना समेत ऐसी सीटों पर प्रचार के लिए उतार सकती है जहां यादव वोटर्स निर्णायक भूमिका निभाते हैं.
गुना में सिंधिया की राह मुश्किल करेंगे अखिलेश?
अखिलेश यादव की रैली गुना में भी होगी. गुना सीट से बीजेपी के टिकट पर केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया मैदान में हैं. कांग्रेस ने निवर्तमान सांसद केपी यादव पर दांव लगाया है. केपी यादव 2019 में बीजेपी के टिकट पर सिंधिया को हराकर ही सांसद निर्वाचित हुए थे. इस लोकसभा क्षेत्र में करीब डेढ़ लाख यादव वोटर्स हैं. सिंधिया इस सीट से 2014 की मोदी लहर में भी कांग्रेस के टिकट पर सांसद चुने गए थे लेकिन 2019 में हार गए थे. इस बार यादव उम्मीदवार और अखिलेश से प्रचार का कांग्रेस का दांव सिंधिया की राह मुश्किल कर पाता है या फेल साबित होता है, यह नतीजे बताएंगे.
यूपी-बिहार और एमपी में क्या है यादव वोटों का गणित
यूपी की बात करें तो सूबे के एटा, इटावा, फर्रुखाबाद, मैनपुरी, फिरोजाबाद, कन्नौज, बदायूं, आजमगढ़, फैजाबाद,संत कबीर नगर, बलिया, कुशीनगर और जौनपुर जैसे जिलों में यादव आबादी की बहुलता है. सूबे के 44 जिलों में 9 से 10 फीसदी यादव वोटर हैं तो वहीं करीब दर्जनभर जिलों में यादव मतदाताओं की 15 फीसदी के आसपास या उससे अधिक है.
यूपी में यादव सपा के कोर वोटर रहे हैं. यादव वोटर्स मैनपुरी, फर्रुखाबाद, फिरोजाबाद, बलिया, आजमगढ़ समेत करीब दर्जनभर लोकसभा सीटों के चुनाव नतीजे तय करने में निर्णायक भूमिका निभाते हैं. सीएसडीएस की रिपोर्ट के मुताबिक 2019 के लोकसभा चुनाव में 60 फीसदी यादव वोटर्स ने सपा-बसपा गठबंधन के पक्ष में मतदान किया था. बीजेपी को 23 और कांग्रेस को पांच फीसदी यादव वोट मिले थे.
बिहार सरकार की ओर से जारी जातिगत जनगणना के आंकड़ों के मुताबिक सूबे की आबादी में यादवों की भागीदारी लगभग 15 फीसदी है. पूर्णिया, अररिया, मधेपुरा समेत सूबे की दर्जनभर से अधिक सीटें यादव बाहुल्य हैं. बिहार में यादव लालू यादव की पार्टी आरजेडी के कोर वोटर माने जाते हैं. वहीं, मध्य प्रदेश में यादव समुदाय की आबादी अनुमानों के मुताबिक लगभग 12 से 14 फीसदी के बीच है. मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड रीजन में यादव अच्छी तादाद में हैं. एमपी में यादव वोट बीजेपी और कांग्रेस में बंटते रहे हैं.