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इस राज्य में लोकसभा और विधानसभा चुनाव लड़ रहे राजघरानों के 12 मेंबर

ओडिशा में लोकसभा और विधानसभा चुनाव के लिए 13 मई से 1 जून  के बीच एक साथ वोटिंग होनी है. इस बार ओडिशा के चुनाव में बीजेडी, बीजेपी और कांग्रेस ने कुल राजघरानों के 12 सदस्यों को चुनावी मैदान में उतारा है.

ओडिशा में राजघरानों के 12 सदस्य लड़ेंगे चुनाव. (सांकेतिक फोटो) ओडिशा में राजघरानों के 12 सदस्य लड़ेंगे चुनाव. (सांकेतिक फोटो)
aajtak.in
  • भुवनेश्वर,
  • 23 अप्रैल 2024,
  • अपडेटेड 1:33 PM IST

ओडिशा में एक साथ लोकसभा और विधानसभा चुनाव हो रहे हैं. राज्य की 21 लोकसभा सीटों और 147 विधानसभा सीटों के लिए 13 मई से 1 जून  के बीच में वोटिंग होनी है. इस बार ओडिशा के चुनाव में अलग-अलग राजघरानों के 12 सदस्य चुनावी मैदान में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं. प्रदेश की सत्ता पर काबिज बीजू जनता दल ने सबसे ज्यादा शाही परिवारों के सात सदस्यों को टिकट दिया है. उसके बाद भाजपा ने  चार और शाही परिवार के सदस्य को कांग्रेस ने चुनावी मैदान में उतारा है.

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चुनावी मैदान में उतरे शाही परिवार के 12 सदस्यों में से 10 सदस्य विधानसभा चुनाव लड़ रहे हैं, जबकि 2  सदस्य लोकसभा चुनाव में अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं. बीजेडी ने धाराकोटे के दिवंगत दिग्गज नेता एएन सिंहदेव की 28 वर्षीय सुलक्षणा गीतांजलि देवी को सनाखेमुंडी विधानसभा क्षेत्र से अपना उम्मीदवार बनाया है. गीतांजलि धाराकोट शाही परिवार से चुनाव लड़ने वाली पांचवी सदस्य हैं. सबसे पहले उनके दादा एएन सिंहदेव सुरदा निर्वाचन क्षेत्र से 1967, 71,77 और 1995 में चार बार प्रतिनिधित्व कर चुके हैं. इसके अलावा वो 1989 में अस्का लोकसभा क्षेत्र के सांसद रह चुके हैं.

उनकी दादी शांति देवी और पिता किशोर चंद्र सिंहदेव भी 1990 और 2004 के चुनावों में इस सीट से चुने गए थे. उनकी मां नंदिनी देवी 2014 में सनाखेमुंडी सीट से जीती थीं. इस बार गीतांजलि 20 मई को होने वाले चुनाव में कांग्रेस के मौजूदा विधायक रमेश चंद्र जेना के खिलाफ चुनाव लड़ेंगी.

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बीजेडी ने चिकिती विधानसभा से चिकिती के शाही परिवार के वंशज उषा देवी के बेटे चिन्मयानंद श्रीरूप देब को टिकट दिया है. इस सीट से चिन्यानंद की मां उषा देवी मौजूदा विधायक हैं. वह अपने परिवार से राजनीति में कदम रखने वाले तीसरे सदस्य हैं. उनके दादा सच्चिदानंद देव 1971 में इसी सीट से विधायक चुने गए थे, जबकि उनकी मां उषा देवी साल 2000 से लगातार पांच बार जीत हासिल की है.

वहीं, बामंदा रानी अरुंधति देवी को बीजेडी ने देवगढ़ विधानसभा सीट से अपना उम्मीदवार घोषित किया है. जो देवगढ़ राजा और भाजपा के संबलपुर सांसद नितेश गंगा देव की पत्नी है,  जबकि औल शाही परिवार के सदस्य प्रताप देब बीजद के लिए औल सीट से चुनाव लड़ेंगे. इसके अलावा बीजद ने नयागढ़ विधानसभा सीट से प्रत्यूषा राजेश्वरी को अपना उम्मीदवार बनाया है. 

इसके अलावा बीजेडी ने पुष्पेंद्र सिंह देव को धर्मगढ़ विधानसभा सीट से चुनावी मैदान में उतारा है. साथ ही बीजू जनता दल ने अंगुल विधानसभा सीट से मौजूदा विधायक रजनीकांत की पत्नी संजुक्ता सिंह को टिकट दिया है. रजनीकांत अंगुल शाही परिवार के वंशज हैं. जबकि बीजेडी ने बोलांगीर से दो बार के सांसद कलेश नारायण सिंह देव को इस बार विधानसभा सभा में उतारा है.

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भाजपा ने उतारे शाही परिवार के 4 उम्मीदवार

भाजपा ने बोलांगीर लोकसभा सीट से अपनी मौजूदा सांसद संगीता कुमारी सिंह पर फिर से दांव लगाया है. बोलांगीर शाही परिवार से आने वाली संगीत चार बार इस को जीत चुकी हैं. उनके पति वरिष्ठ भाजपा नेता केवी सिंह को भी भाजपा ने पटनागढ़ विधानसभा क्षेत्र से मैदान में उतारा है. संगीता बोलांगीर से लगातार चार बार सांसद निर्वाचित हो चुकी हैं और पांचवी बार इस सीट से संसद पहुंचने की कोशिश कर रही हैं.

भाजपा ने बोलांगरी के अलावा कालाहांडी लोकसभा सीट से पूर्व सांसद अरा केशरी देव की पत्नी मालविका केशरी देव को टिकट दिया है. साल 2019 में टिकट से कटने के बाद दोनों ने बीजेपी ज्वाइन कर ली थी.वह अरका कालाहांडी शाही परिवार के वंशज हैं. अरका कालाहांडी शाही परिवार के सदस्य और भाजपा नेता बिक्रम केशरी देव के बेटे हैं, जिन्होंने तीन बार इस सीट पर जीत दर्ज की थी.

कांग्रेस ने भी उतारा एक उम्मीदवार

वहीं, कांग्रेस ने ढेंकनाल विधानसभा सीट से ढेंकनाल शाही परिवार की सदस्य सुष्मिता सिंह देव को मैदान में उतारा है. राजनीतिक विश्लेषक प्रह्लाद सिन्हा ने कहा कि शाही परिवार का अब भी ग्रामीणों के बीच सम्मान है. लोगों को अब भी विश्वास है कि शाही परिवार के सदस्य उनकी समस्याओं का समाधान करेंगे और उनके मुद्दों को उचित स्थान पर उठाएंगे.

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