
देश में सात चरणों में लोकसभा चुनाव खत्म हो चुके हैं और अब से 48 घंटों के बाद नतीजों का ऐलान भी हो जाएगा. इस दौरान हर राजनीतिक पार्टी ने अपना घोषणा पत्र जारी किया और बड़े-बड़े वादे भी किए. इस दौरान aajtak.in ने अपने रीडर्स से जाना कि क्या थे उनके लिए बड़े चुनावी मुद्दे. वो मुद्दे जिन्हें मेनिफेस्टो में जगह दी जानी चाहिए. हजारों लोगों ने इस विशेष प्रस्तुति के जरिए अपने-अपने मेनिफेस्टो तैयार किए. लोगों के इन मेनिफेस्टो में जो ट्रेंड देखने को मिला उसके लिहाज से इन चुनावों में रीडर्स के लिए सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा करप्शन का रहा. यही वजह है कि सबसे ज्यादा लोगों ने अपने मेनिफेस्टो में भ्रष्टाचारियों को जेल में डालने का वादा शामिल किया.
भ्रष्टाचार पर लगाम
आज तक के ऑनलाइन मेनिफेस्टो के परिणाम के मुताबिक 9 फीसदी लोगों के लिए पहली प्राथमिकता भ्रष्टाचारियों को जेल भेजना था. लोग देश में भ्रष्टचार के मामले में सख्त से सख्त कार्रवाई चाहते हैं. वहीं 8 फीसदी लोगों को मानना है कि देश में अच्छी सड़कें होनी चाहिए जिससे लोगों के लिए कम समय में एक जगह से दूसरी जगह पहुंचना आसान हो जाए. परिवहन सुगम होने पर इससे कारोबार को भी फायदा मिलता है.
वहीं अगर अलग-अलग मामलों में न्याय की बात की जाए तो 7 फीसदी लोगों का मत है कि देश में ऐसी व्यवस्था बननी चाहिए जिससे लोगों को किसी भी केस में जल्द से जल्द न्याय मिले. इसके अलावा देश में शिक्षा भी अहम मुद्दा है. आज तक के इलेक्शन मेनिफेस्टो में 7 फीसदी लोग चाहते हैं कि देश में पढ़ाई सस्ती हो. तमाम स्कूलों की बढ़ी हुई फीस से लोग परेशान हैं और वो अपने बच्चों की अच्छी पढ़ाई के साथ ही चाहते हैं कि फीस में कमी आए और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले.
नौकरी और क्राइम कंट्रोल बड़ा मुद्दा
इसके अलावा देश में नौकरियां और रोजगार बड़ा मुद्दा है. आज तक के इलेक्शन मेनिफेस्टो में 7 फीसदी लोग चाहते हैं कि नौकरियों को प्राथमिकता दी जाए. वहीं लोग देश में बढ़ते आपराधिक गितिविधि पर भी रोक चाहते हैं. आज तक के इलेक्शन मेनिफेस्टो के मुताबिक 6 फीसदी लोगों के लिए क्राइम कंट्रोल बड़ा मुद्दा है जिस पर लोग लगाम लगाना चाहते हैं.
एक देश एक चुनाव चाहते हैं लोग
आम लोग देश में बार-बार हो रहे चुनाव (लोकसभा-विधानसभा) और उस वजह से सरकारी विकास कार्यों में आने वाली रुकावट को भी दूर करना चाहते हैं. पब्लिक के इलेक्शन मेनिफेस्टो के मुताबिक 6 फीसदी लोग चाहते हैं कि एक देश एक चुनाव की व्यवस्था करनी चाहिए. इससे न सिर्फ संसाधन बचेंगे बल्कि एक साथ चुनाव होने की वजह से विकास कार्यों में रुकावट भी पैदा नहीं होगी. हालांकि मौजूदा केंद्र सरकार ने इसकी तैयारियां भी शुरू कर दी हैं और पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के नेतृत्व में इसके लिए एक कमेटी भी बनाई है.
देश में लोगों के लिए परिवार में किसी के बीमारी होने की स्थिति में इलाज कराना भी उनकी वित्तीय स्थिति पर गहरा प्रभाव डालता है. महंगे इलाज से ज्यादातर परिवार परेशान हैं, ऐसे में पब्लिक के इलेक्शन मेनिफेस्टो के मुताबिक 6 फीसदी लोग ऐसे हैं जो देश और राज्यों में सस्ते इलाज की सुविधा चाहते हैं. वहीं देश में 5 फीसदी लोग चाहते हैं कि सरकार ब्लैक मनी रखने वालों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई करे. साल 2014 के लोकसभा चुनाव में ब्लैक मनी बड़ा चुनावी मुद्दा बना था. पब्लिक के इलेक्शन मेनिफेस्टो में 5 फीसदी ऐसे लोग भी है जो भारत को हिंदू राष्ट्र बनते हुए देखना चाहते हैं.
किसानों की कर्ज माफी चाहती है जनता
देश में किसानों की खराब आर्थिक हालत भी एक बड़ी समस्या है. ऐसे में आज तक के इलेक्शन मेनिफेस्टो के मुताबिक 4 फीसदी ऐसे लोग हैं जो किसानों की कर्जमाफी चाहते हैं. किसान इस देश के अन्नदाता हैं इसलिए लोग चाहते है कि उन्हें समृद्ध बनाया जाए और उनकी आमदनी भी बढ़े. वहीं 3 फीसदी लोगों ने अपने मेनिफेस्टो में माना है कि देश में समान नागरिक संहिता भी लागू होनी चाहिए. बता दें कि मौजूदा सत्ताधारी पार्टी बीजेपी के लिए समान नागरिक संहिता एक बड़ा चुनावी मुद्दा भी है.
देश में आरक्षण को लेकर हमेशा बहस होती रहती है, ऐसे में आज तक के इलेक्शन मेनिफेस्टो में 3 फीसदी लोग चाहते हैं कि देश में पिछड़ी जातियों को मिलने वाले आरक्षण को खत्म कर दिया जाए. आरक्षण खत्म किए जाने के मुद्दे ने इस चुनाव में भी अहम भूमिका निभाई है. वहीं देश में बढ़ती महंगाई की वजह से घर का बजट गड़बड़ाने को लेकर भी लोग परेशान हैं. आज तक के मेनिफेस्टो के मुताबिक 3 फीसदी लोग महंगाई पर लगाम चाहते हैं ताकि उन्हें कुछ राहत मिल सके.