
राजस्थान के बाड़मेर-जैसलमेर लोकसभा सीट से निर्दलीय प्रत्याशी रविंद्र सिंह भाटी हेलीकॉप्टर से चुनाव प्रचार कर रहे हैं. 'आजतक' से साथ खास बातचीत करते हुए भाटी ने दावा किया है कि इस बार कितना भी बड़ा कोई स्टार प्रचारक आ जाए जीत उनकी ही है. कंगना रनौत से लेकर खली किसी को भी बुला लें, लेकिन बाड़मेर की जनता मन बना चुकी है. इसी के साथ भाटी ने पक्ष और विपक्ष के तमाम आरोपों का भी जवाब दिया.
रविंद्र सिंह भाटी ने आजतक से बातचीत करते हुए कहा कि रिफाइनरी में पिछले कई सालों से लगातार कुछ विशेष लोगों को काम दिया जाता है. इसी को लेकर मैंने बयान दिया था. हरीश चौधरी ने जो मुझे चैलेंज दिया है वो मुझे स्वीकार है. चुनाव के बाद में हरीश चौधरी से रिफाइनरी के आगे बहस करने को भी तैयार हूं. मुझ पर देशद्रोही और विदेशी फंडिंग के आरोप लगा रहे हैं.
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'आरोप साबित कर देंगे, तो मैं राजनीति छोड़ दूंगा'
इसको लेकर हरीश चौधरी से मैं इतना ही कहना चाहता हूं कि अगर यह आरोप साबित कर दोगे, तो मैं राजनीति छोड़ दूंगा. वरना बुनियाद आरोप से कुछ भी नहीं होगा. भाटी ने कहा कि हेलीकॉप्टर हो या चुनावी प्रचार पूरा खर्चा जनता उठा रही है. क्योंकि, उनको अपने भाई और अपने बेटे पर विश्वास है. बाड़मेर की जनता अब बदलाव चाहती है.
भाटी का कहना है कि बाड़मेर की इलाके में सबसे बड़ी समस्या पानी और रोजगार है. इससे पहले जनता ने नेताओं को वोट दिया. लेकिन किसी ने भी समस्याओं का समाधान नहीं किया. मैं अब दावे के साथ कह रहा हूं कि पानी समस्या की स्थायी हल के लिए दिल्ली की सबसे बड़ी पंचायत में यह बात करूंगा और समाधान करवाएंगे.
कौन हैं रविंद्र भाटी?
बाड़मेर के छोटे से गांव दूधोड़ा के रहने वाले रविंद्र सिंह भाटी बेहद सामान्य परिवार से आते हैं. उनके पिता शिक्षक हैं. भाटी के परिवार का राजनीति से दूर-दूर तक कोई नाता नहीं रहा है. रविंद्र सिंह भाटी ने अपनी शुरुआती शिक्षा गांव के पास स्थित सरकारी स्कूल से पूरी की. फिर बाड़मेर शहर के एक स्कूल से इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई पूरी की. वह उच्च शिक्षा के लिए जय नारायण व्यास यूनिवर्सिटी जोधपुर पहुंचे. यहीं पर उन्होंने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ता के रूप में छात्र राजनीति में कदम रखा. भाटी ने ग्रेजुएशन के बाद वकालत की पढ़ाई पूरी की.
एबीवीपी ने टिकट नहीं दिया, निर्दलीय जीता छात्रसंघ चुनाव
साल 2019 में रविंद्र सिंह भाटी ने छात्रसंघ अध्यक्ष पद के लिए एबीवीपी से टिकट की दावेदारी पेश की. लेकिन, एबीवीपी ने भाटी को टिकट न देकर किसी और को अपना प्रत्याशी घोषित किया. इससे नाराज भाटी ने निर्दलीय ताल ठोक दी और यूनिवर्सिटी के 57 साल के इतिहास में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में छात्रसंघ अध्यक्ष पद का चुनाव जीतने वाले पहले छात्र नेता बने. इसके बाद भाटी ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा. कोरोना काल के दौरान चाहे छात्रों की फीस माफी का मुद्दा हो या गहलोत सरकार के कार्यकाल में कॉलेज की जमीन का मुद्दा, भाटी ने छात्र आंदोलन का आगे बढ़कर नेतृत्व किया. छात्र हितों के लिए वह कई बार जेल भी गए. यहां तक कि छात्रों की मांगों को लेकर विधानसभा का घेराव किया. अपनी इसी जुझारू छवि के कारण रविंद्र सिंह भाटी छात्रों और युवा वर्ग के चहेते बन गए.
ऐसे बने युवाओं के चहेते
रविंद्र सिंह भाटी तब और चर्चा में आ गए, जब उन्होंने 2022 में अपने दोस्त अरविंद सिंह भाटी को जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय के छात्रसंघ चुनाव में अध्यक्ष का चुनाव जितवाया. एनएसयूआई ने अरविंद को टिकट नहीं दिया तो, वह SFI से चुनाव लड़े. रविंद्र भाटी ने अपने दोस्त अरविंद के चुनाव प्रचार का जिम्मा खुद अपने कंधों पर उठाया और अध्यक्ष पद के लिए हुए इलेक्शन में जीत भी दिलाई. उसी दिन से राजस्थान में इस युवा की चर्चा और ज्यादा तेज हो गई. इसके बाद रविंद्र सिंह भाटी राज्य की राजनीति में उतरे. उन्होंने बीजेपी जॉइन की और 2023 के राजस्थान विधानसभा चुनाव में शिव सीट से टिकट की मांग की.
बीजेपी से बगावत कर निर्दलीय जीता था विधानसभा चुनाव
लेकिन बीजेपी ने रविंद्र भाटी को टिकट ना देकर संघ की पृष्ठभूमि वाले और उस समय के अपने बाड़मेर जिलाध्यक्ष स्वरूप सिंह खारा को शिव से उम्मीदवार बना दिया. इससे नाराज भाटी ने बीजेपी से बगावत कर शिव विधानसभा से निर्दलीय चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया. विधानसभा चुनाव में भाटी के सामने शिव सीट पर सबसे बड़ी चुनौती कांग्रेस के पूर्व मंत्री अमीन खान थे. अमीन खान ने कांग्रेस के सिंबल पर 9 बार पहले चुनाव लड़ा था और 84 साल की उम्र में 10वीं बार ताल ठोक रहे थे. इसके अलावा बीजेपी के स्वरूप सिंह खारा और कांग्रेस के बागी फतेह खान और पूर्व विधायक जालम सिंह रावत जैसे चेहरे इस 26 वर्षीय युवा के सामने थे.
रविंद्र सिंह भाटी ने इन सभी चुनौतियों को पार किया और 4000 वोटों के अंतर से शिव विधानसभा सीट से जीत दर्ज की. उन्होंने बीजेपी उम्मीदवार स्वरूप सिंह खारा की तो जमानत जब्त करवा दी. भाजपा इस बार राजस्थान में क्लीन स्वीप का टारगेट लेकर चल रही थी. लेकिन गत 4 अप्रैल को जब रविंद्र सिंह भाटी ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में बाड़मेर सीट से अपना नामांकन दाखिल किया और उनकी रैली में जनसैलाब उमड़ा तो बीजेपी की टेंशन बढ़ गई.
भाटी की दावेदारी से भाजपा को नुकसान
भाटी की उम्मीदवारी से बाड़मेर सीट पर अगर किसी को सीधे नुकसान पहुंचता दिख रहा तो वह बीजेपी प्रत्याशी कैलाश चौधरी हैं. चूंकि रविंद्र सिंह एबीवीपी के सदस्य रहे हैं और खुद को वैचारिक रूप से बीजेपी के करीब पाते हैं, इसलिए उनके समर्थक भी बीजेपी के कार्यकर्ता और वोटर ही हैं. ऐसे में भाटी इस सीट पर भाजपा का ही वोट काटते दिख रहे हैं.