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ओडिशा में CM पटनायक संग नहीं बनी बात, अब अकेले लोकसभा और विधानसभा चुनाव लड़ेगी BJP

ओडिशा में भारतीय जनता पार्टी और बीजू जनता दल के बीच कई दिनों से गठबंधन को लेकर बैठकें जारी थीं. चर्चा जोरों पर थी कि दोनों पार्टियों गठबंधन के तहत ही लोकसभा और विधानसभा चुनाव लड़ेंगी, लेकिन इस पर पेंच फंस गया है और बीजेपी ने अब अकेले ही चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ओडिशा CM नवीन पटनायक (फाइल फोटो) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ओडिशा CM नवीन पटनायक (फाइल फोटो)
पॉलोमी साहा
  • नई दिल्ली,
  • 22 मार्च 2024,
  • अपडेटेड 5:58 PM IST

लोकसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान हो चुका है. सात चरणों में मतदान होना है. इसको लेकर सभी पार्टियां तैयारियों में जुटी हैं. गठबंधन और सीट शेयरिंग पर चर्चाओं का दौर जारी है. इस बीच ओडिशा में बीजेपी की मुख्यमंत्री नवीन पटनायक संग गठबंधन की बातचीत विफल हो गई है. इसके साथ ही बीजेपी की तरफ से ऐलान कर दिया गया है कि पार्टी अकेले ही आगामी लोकसभा और विधानसभा चुनाव लड़ेगी. 

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दरअसल, प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी और बीजू जनता दल के बीच कई दिनों से गठबंधन को लेकर बैठकें जारी थीं. चर्चा जोरों पर थी कि दोनों पार्टियों गठबंधन के तहत ही लोकसभा और विधानसभा चुनाव लड़ेंगी, लेकिन इस पर पेंच फंस गया है और बीजेपी ने अब अकेले ही चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है.

बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष मनमोहन सामल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर घोषणा करते हुए लिखा, "विगत 10 वर्षों से, नवीन पटनायक जी के नेतृत्व में ओडिशा की बीजू जनता दल (बीजेडी) पार्टी केंद्र की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार के अनेक राष्ट्रीय महत्व के प्रसंगों में समर्थन देती आई है, इसके लिए हम उनका आभार व्यक्त करते हैं. अनुभव में आया है कि देशभर में जहां भी डबल इंजन की सरकार रही है, वहां विकास व गरीब कल्याण के कार्यों में तेजी आई है और राज्य हर क्षेत्र में आगे बढे हैं.  लेकिन आज ओडिशा में मोदी सरकार की अनेक कल्याणकारी योजनाएं जमीन पर नहीं पहुंच पा रही हैं, जिससे ओडिशा के गरीब बहनों-भाइयों को उनका लाभ नहीं मिल पा रहा है."

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उन्होंने आगे कहा, "ओडिशा-अस्मिता, ओड़िसा-गौरव और ओडिशा के लोगों के हित से जुड़े अनेकों विषयों पर हमारी चिंताएं हैं. 4.5 करोड़ ओडिशावासियों की आशा, अभिलाषा और आकाँक्षाओं को पूरा करने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में विकसित भारत तथा विकसित ओडिशा बनाने के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) इस बार लोकसभा की सभी 21 सीटों और विधानसभा की सभी 147 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ेगी."

बता दें कि ओडिशा में कुल 21 लोकसभा और 147 विधानसभा सीटें हैं. बीजेपी और बीजेडी के बीच गठबंधन की चर्चाएं जोरों पर थीं. कहा जा रहा था कि दोनों पार्टियों में सीट-बंटवारे का फॉर्मूला इस बात पर आधारित होगा कि बीजेपी को लोकसभा में सीटों का बड़ा हिस्सा मिलेगा, जबकि बीजेडी को विधानसभा में अधिक सीटें मिलने की उम्मीद है. हालांकि दोनों में बातचीत विफल रही.

लोकसभा चुनाव में कैसा रहा आंकड़ा?

बीजेपी ने 2014 के लोकसभा चुनाव में 44.8 फीसदी वोट शेयर के साथ 21 में से 20 सीटें जीती थी. तब बीजेपी 21.9 फीसदी वोट शेयर के साथ एक सीट ही जीत सकी थी. 2019 में बीजेडी का वोट शेयर 43.3 फीसदी पर आ गया और पार्टी को 2014 के मुकाबले आठ सीट का नुकसान उठाना पड़ा वहीं इसके ठीक उलट बीजेपी का वोट शेयर बढ़कर 38.9 फीसदी पहुंच गया और पार्टी की सीटें भी एक से बढ़कर आठ हो गईं. तब से अब तक बहुत कुछ बदल चुका है. बीजेडी में नवीन पटनायक के बाद कौन? उत्तराधिकार का सवाल और गहरा हुआ है.

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2019 में 8 सीटों पर चुनाव जीती थी बीजेपी 

2019 के लोकसभा चुनाव में बीजद ने 12 और बीजेपी ने 8 सीटों पर जीत हासिल की थी. जबकि विधानसभा चुनाव में बीजद ने 112 और बीजेपी ने 23 सीटों पर जीत हासिल की थी. ओडिशा में एक बार फिर लोकसभा के साथ-साथ विधानसभा के चुनाव होने जा रहे हैं. 2009 में दोनों दलों के बीच गठबंधन टूट गया था. ओडिशा में बीजद औ बीजेपी पहले भी सहयोगी पार्टियां रह चुकी हैं. हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने एक रैली में सार्वजनिक रूप से एक-दूसरे की तारीफ की थी. इसके बाद से ही गठबंधन की चर्चाएं तेज हो गई थी.

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