
लोकसभा चुनाव को लेकर समाजवादी पार्टी ने अपने पत्ते खोलने शुरू कर दिए हैं. बुधवार को सपा ने पीलीभीत समेत 6 सीटों पर उम्मीदवारों का ऐलान कर दिया है. पीलीभीत से भगवत शरण गंगवार को टिकट देकर मैदान में उतारा है. हालांकि, इस सीट पर भारतीय जनता पार्टी ने अब तक प्रत्याशी घोषित नहीं किया है. इसे लेकर असमंजस की स्थिति है और नामांकन का आज दूसरा दिन है. आइए जानते हैं कौन हैं भगवत शरण गंगवार?
समाजवादी पार्टी ने पीलीभीत का किला फतह करने की तैयारी शुरू कर दी है. पार्टी ने सपा सरकार में लघु उद्योग और निर्यात प्रोत्साहन राज्य मंत्री रहे भगवत शरण पर दांव खेला है. वे नवाबगंज से पांच बार विधायक भी रहे हैं. 2003 में सपा सरकार के दौरान उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री भी रहे हैं. गंगवार ने आखिरी चुनाव 2012 में जीता था. उसके बाद 2017 और 2022 के विधानसभा चुनाव में हार का सामना करना पड़ा है. 1991 और 1993 के दो चुनाव उन्होंने बीजेपी के टिकट पर जीते हैं. बाद में वो सपा में आए और फिर 2002, 2007 और 2012 में लगातार तीन बार सपा के टिकट पर विधायक चुने गए.
'हमारी प्राथमिकता गरीब और नौजवान'
अब सपा ने गंगवार को लोकसभा चुनाव में पीलीभीत से उतारने का फैसला किया है. टिकट की घोषणा होने के बाद भगवत सरन गंगवार ने मीडिया से बातचीत की और कहा, हम नए नहीं हैं. बहुत चुनाव लड़ चुके हैं. बहुत चुनाव जीते हैं. बहुत चुनाव हारे भी हैं और पूरी बरेली हमारे बारे में जानती है. हमारे प्राथमिकता में गरीब, जरूरतमंद और बीमार-विधवा महिलाएं हैं. खासतौर पर बेटे, जिनको पढ़ाई चाहिए. ऐसे और गरीबों के लिए हमारी पार्टी ने पीडीए का नारा दिया है, जिस शोषित समाज के लिए आज की पार्टियां दरकिनार करती हैं, उन सभी की सेवा हमारी पार्टी कार्य कर रही है. पीडीए का गरीब तबका, दलित वोटों के आधार पर अपनी जीत मानते हैं और निश्चित रूप से जीतेंगे.
वरुण गांधी को लेकर गंगवार बोले- अगर अखिलेश जी से कहें तो...
अगर वरुण गांधी का बीजेपी से टिकट नहीं होता है और वो सपा में शामिल होते हैं तो क्या उनके लिए पार्टी के दरवाजे खुले हैं? इस पर गंगवार ने कहा, मेरी स्वयं की कोई अपेक्षा नहीं है. मेरे मुखिया जो कहेंगे, वो करेंगे. वो कहेंगे कि भई अब मजबूरी है. वाकई मेरा मानना है कि अगर वरुण गांधी जैसे लोग अखिलेश यादव जी से कहें या बहन प्रियंका गांधी उनके लिए कहें या फिर राहुल गांधी जी कहें कि अखिलेश यादव जी एक हमारा (वरुण गांधी) भी लड़वा दो तो मेरा मानना है कि उन्हें लड़ाना भी चाहिए और मुझसे उन्हें कहने की जरूरत भी नहीं है. मैं वापस बरेली आकर प्रवीण सिंह के समर्थन में प्रचार करूंगा और चुनाव लड़ूंगा.
'पहले चरण में इन सीटों पर वोटिंग'
उत्तर प्रदेश की आठ संसदीय सीटों सहारनपुर, कैराना, मुजफ्फरनगर, बिजनौर, नगीना (एससी), मुरादाबाद, रामपुर और पीलीभीत में 19 अप्रैल को लोकसभा चुनाव के पहले चरण में मतदान होगा. चुनाव के लिए अधिसूचना 20 मार्च को जारी कर दी गई. 27 मार्च नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख है. चुनाव आयोग ने कहा कि नामांकन की जांच 28 मार्च को की जाएगी और उम्मीदवारी वापस लेने की आखिरी तारीख 30 मार्च है. वोटों की गिनती 4 जून को होगी.
'पीलीभीत से वरुण गांधी ने जीता था चुनाव'
पहले चरण में जिन आठ लोकसभा सीटों पर मतदान हो रहा है, उनमें से बीजेपी ने 2019 में मुजफ्फरनगर (संजीव कुमार बालियान), कैराना (प्रदीप कुमार चौधरी) और पीलीभीत (वरुण गांधी) संसदीय सीटों पर जीत हासिल की थी. समाजवादी पार्टी के एसटी हसन ने मुरादाबाद लोकसभा सीट से जीत हासिल की थी, जबकि समाजवादी पार्टी के आजम खान रामपुर लोकसभा सीट से चुनाव जीते थे. पिछले आम चुनाव में बसपा के हाजी फजलुर रहमान, मलूक नागर और गिरीश चंद्र ने सहारनपुर, बिजनौर और नगीना (एससी) लोकसभा सीटें जीती थीं.
इस बार बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने अकेले चुनाव लड़ने की घोषणा की है, जबकि समाजवादी पार्टी ने कांग्रेस के साथ गठबंधन किया है और दोनों पार्टियां विपक्षी इंडिया गुट का हिस्सा हैं. राष्ट्रीय लोक दल ने भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन से हाथ मिलाया है.