
मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव का माहौल है. धीरे-धीरे चुनाव प्रचार अभियान में तेजी देखी जा रही है. साथ ही साथ उतनी ही तेजी MP के झाबुआ के कड़कनाथ मुर्गे के दामों में भी देखी जा रही है. झाबुआ का विश्व प्रसिद्ध कड़कनाथ मुर्गा आम दिनों में 750 रुपये प्रतिनग बिकता था, वही इन दिनों 1500 से 2000 रुपए के बीच त्वरित उपलब्धता की शर्तों पर बिक रहा है. इससे कड़कनाथ बेचने वालों के साथ-साथ अंचल के ढाबों वालों की भी चांदी हो गई है.
आखिर कड़कनाथ मुर्गे के दामों में अचानक उछाल क्यों आया है? इस सवाल के जवाब में कड़कनाथ विक्रेताओं ने बताया कि जब मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव होते हैं, उस समय ठंड का मौसम होता है. उस पर से बड़ी तादाद में बाहरी प्रदेशों और जिलों से प्रचार करने या प्रचार देखने ऐसे लोग आते हैं, जो झाबुआ आने पर कड़कनाथ खाने की इच्छा रखते हैं. अपने स्थानीय संपर्कों की मदद से वह अपना शौक पूरा करने की कोशिश करते हैं. इससे मांग बढ़ती है और पूर्ति प्रभावित होती है, इसलिए दाम लगभग दोगुने हो जाते हैं.
जिले के चिकन विक्रेता यामीन कहते हैं कि वह तो हर पांचवें साल यानी विधानसभा चुनाव के वर्ष में वोटिंग के चार-पांच महीने पहले से चूजे लेकर बड़ा करते हैं और प्रचार अभियान के दौरान अच्छा मुनाफा कमाते हैं.
क्या कहते हैं राजनीतिक दलों के लोग?
कड़कनाथ के बढ़े हुए दामों के साथ चुनाव लड़ना राजनीतिक दलों के नेताओं की भी मजबूरी है. कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता और झाबुआ निवासी साबिर फिटवेल कहते हैं कि हर सियासी दल को बढ़े हुए कड़कनाथ मुर्गे के दामों को चुकाना है, क्योंकि बड़ी संख्या में जब लोग प्रचार अभियान के लिए आते हैं तो कड़कनाथ अपेक्षा करते हैं. अपेक्षा पूरी नहीं हो पाती तो स्वयं के खर्चों से झाबुआ का कड़कनाथ खाते हैं. इसलिए दाम तो बढ़ना ही है.
आम आदमी पार्टी के जिलाध्यक्ष कमलेश कहते हैं कि चुनावी साल में कड़कनाथ मुर्गे महंगे हो जाते हैं, लेकिन यह अच्छा है. कम से कम कड़कनाथ का धंधा करने वाले हमारे आदिवासी भाइयों को तो मुनाफा हो रहा है.
इसी तरह बीजेपी नेता दौलत भावसार भी कहते हैं कि कड़कनाथ झाबुआ की पहचान है और इस पहचान से चुनावी मौसम में स्थानीय कड़कनाथ विक्रेताओं को मुनाफा हो रहा है तो अच्छी बात है.
कड़कनाथ मुर्गा मूलतः मध्यप्रदेश के झाबुआ का ब्रीड है, इसलिए भारत सरकार ने इसे झाबुआ का कड़कनाथ नाम से जीआई टैग दिया हुआ है.
एक्स्ट्रा आयरन और मेलोनिन का सोर्स
झाबुआ के कृषि विज्ञान केन्द्र के विज्ञानी डॉ. चंदन राय कहते हैं कि कड़कनाथ का रंग इसलिए काला होता है कि इसमें अतिरिक्त आयरन और मेलोनिन पाया जाता है. डॉक्टर राय कहते हैं कि कड़कनाथ मुर्गे के सेवन से मानव शरीर की इम्यूनिटी बढ़ती है, इसलिए इसके सेवन की सलाह दी जाती है.
यह है कड़कनाथ मुर्गे की विशेषता
काली कलगी
काला रंग - काला पंख
काला मांस - काली हड्डी
कोलेस्ट्रॉल - फैट - 1%
आयरन-प्रोटीन- देशी मुर्गों से ज्यादा