
अगले कुछ महीनों में उत्तरप्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर में विधानसभा चुनाव होने हैं. चुनाव को लेकर आयोग जल्द ही तारीखों की घोषणा भी कर सकता है, लेकिन इन सबके बीच चुनाव आयोग के लिए इन पांच में से एक राज्य चुनौती बन गया है. दरअसल, मणिपुर में अब तक मात्र 45 फीसदी से कुछ ज्यादा लोगों को कोरोना के दोनों डोज लग पाए हैं जबकि मात्र 57 फीसदी लोगों को पहला डोज लगा है. ऐसे में संक्रमण के खतरे की आशंका और बढ़ रही है जो आयोग के लिए भी चिंता का विषय बना हुआ है.
पहले से ही कोविड संक्रमण की मार झेल रहे पूर्वोत्तर के इस राज्य में ओमिक्रॉन के संक्रमण की रफ्तार भी काफी तेज है. कोरोना की गति से मुकाबला करने के लिए न सिर्फ टीकाकरण की गति तेज करनी होगी, बल्कि युद्ध स्तर पर तैयारी भी करनी होगी. संभावना है कि फरवरी के अंत तक या मार्च के पहले सप्ताह में वहां विधानसभा चुनाव हो सकते हैं.
कहा ये जा रहा है कि टीकाकरण की रफ्तार कम नहीं बल्कि आबादी को लेकर जमीनी हकीकत और आंकड़ों में काफी अंतर है. असल आबादी कम है जबकि कागजों और अन्य वजह से ये ज्यादा बताई जाती है. इसके अलावा नगा जनजातियों की बहुलता वाले जिलों में टीकाकरण बेहद कम हुआ है. अपनी पारंपरिक मान्यताओं की वजह से भी वो आधुनिक इलाज, टीका आदि लेने के प्रति उत्साहित नहीं हैं. उनमें जागरूकता का भी अभाव और पुरातन मान्यताओं का प्रभाव है.
अन्य चुनावी राज्यों में टीकाकरण की स्थिति
- पंजाब में भी टीके की दोनों खुराक लेने वाले 43 फीसदी लोग हैं और पहली खुराक 77 फीसद लोगों ने ले ली है.
- उत्तर प्रदेश में भी दोनों खुराक लेने वालों की संख्या सिर्फ 60 फीसदी है जबकि पहली खुराक 89 फीसदी लोगों ने ली है.
- उत्तराखंड में 82 फीसदी लोगों ने दोनों डोज ले लिया है, जबकि पहले डोज के मामले में कुछ दिनों में आंकड़ा 100 फीसदी पहुंच जाएगा.
- गोवा वालों ने पहली खुराक तो 100 प्रतिशत लोगों ने ले ली है जबकि 98 फीसदी ने दोनों खुराक ले ली है.
यानी आयोग के सामने मणिपुर और पंजाब बड़ी चुनौती बने हुए हैं. आयोग ने वैसे तो पांचों राज्यों में टीकाकरण का लक्ष्य पूरा करने के लिए अतिरिक्त और विशेष टीमें भेजने पर जोर दिया है लेकिन मणिपुर और पंजाब पर ज्यादा फोकस है.
प्रशांत किशोर ने भी टीकाकरण पर दिया था जोर
चुनाव में राजनीतिक दलों के लिए रणनीति तैयार करने वाले प्रशांत किशोर ने कहा है कि चुनाव आयोग को अगले कुछ महीनों के अंदर होने वाले 5 राज्यों में कम से कम 80 फीसदी वैक्सीनेशन सुनिश्चित करना चाहिए. उन्होंने कहा है कि पांचों चुनावी राज्यों में कम से कम 80 प्रतिशत लोगों को कोरोना की दोनों डोज लगा दी जानी चाहिए.