
पंजाब का शहर अमृतसर स्वर्ण मंदिरर के लिए वैश्विक फलक पर अपनी पहचान रखता है. अमृतसर शहर की एक विधानसभा सीट है अमृतसर ईस्ट. अमृतसर ईस्ट सीट भी राष्ट्रीय फलक पर पहचान की मोहताज नहीं. क्रिकेट की दुनिया से सियासत की पिच पर उतरे पूर्व अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर और अब पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू अमृतसर ईस्ट विधानसभा सीट से विधायक हैं.
अमृतसर ईस्ट विधानसभा सीट का सियासी मिजाज देश की सियासत से अलग रहा. आजादी के बाद शुरुआती साल में भी जहां पूरे देश में जहां एक तरह से कांग्रेस का वर्चस्व था, अमृतसर ईस्ट की जनता ने साल 1967 तक गैर कांग्रेसी को अपना विधायक बनाया. साल 1969 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को अमृतसर ईस्ट सीट पर पहली बार जीत मिली. तब कांग्रेस के ज्ञानचंद खरबंदा विजयी रहे थे.
राजनीतिक पृष्ठभूमि
अमृतसर ईस्ट सीट से साल 1951 में हुए पहले चुनाव में सरुप सिंह विजयी रहे थे. साल 1957, 1962 और 1967 के चुनाव में यानी लगातार तीन दफे भारतीय जनसंघ के बलदेव प्रकाश अमृतसर ईस्ट सीट से विधायक रहे. 1969 और 1972 में ये सीट कांग्रेस के कब्जे में भी रही. इस सीट से अभी पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू विधायक हैं. नवजोत सिंह सिद्धू से पहले उनकी पत्नी नवजोत कौर सिद्धू भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर इस सीट का विधानसभा में प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं.
2017 का जनादेश
साल 2017 के विधानसभा चुनाव से पहले समीकरण तेजी से बदले. अमृतसर ईस्ट सीट से बीजेपी की विधायक नवजौत कौर पाला बदलकर कांग्रेस में शामिल हो गईं. नवजोत सिंह सिद्धू भी बाद में कांग्रेस में शामिल हो गए. कांग्रेस ने नवजोत कौर की सीट से नवजोत सिंह सिद्धू को चुनाव मैदान में उतार दिया. जनता ने नवजोत सिंह सिद्धू को विजयी भी बनाया. नवजोत सिंह सिद्धू को 60 फीसदी से ज्यादा वोट मिले. सिद्धू को 60 हजार से ज्यादा वोट मिले जबकि उनके निकटतम प्रतिद्वंदी बीजेपी के राकेश कुमार हनी महज 18 हजार के करीब वोट ही पा सके थे.
सामाजिक ताना-बाना
सामाजिक ताने-बाने की बात करें तो ये सीट सिख बाहुल्य है. यहां अनुमान के मुताबिक करीब डेढ़ लाख से अधिक वोटर हैं. पिछले चुनाव की बात करें तो करीब एक लाख मतदाताओं ने अपने मताधिकार का उपयोग किया था. इस सीट पर कांग्रेस के वोट में करीब 32 फीसदी का इजाफा हुआ था जबकि बीजेपी का वोट शेयर करीब 18 फीसदी घटा था.
विधायक का रिपोर्ट कार्ड
नवजोत सिंह सिद्धू को लेकर क्षेत्र की जनता में नाराजगी है. पंजाब सरकार में सिद्धू मंत्री भी रहे लेकिन अपने निर्वाचन क्षेत्र में कोई विकास कार्य नहीं करा पाए. अमृतसर ईस्ट में कई दफे सिद्धू की गुमशुदगी के पोस्टर लग चुके हैं. जनता का कहना है कि कोरोना काल में भी सिद्धू पुरसा हाल पूछने नहीं आए. विधानसभा चुनाव में कुछ ही समय शेष है और नवजोत सिंह सिद्धू अब पटियाला के अपने घर में शिफ्ट हो चुके हैं. ऐसे में यहां चर्चा ये भी है कि सिद्धू यहां से चुनाव लड़ेंगे भी या नहीं.