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Amritsar North Assembly Seat: जिस पार्टी का विधायक उसी की सरकार... अब तक 7 बार कांग्रेस ने दर्ज की है जीत

अमृतसर उत्तर विधानसभा सीट: इस विधानसभा क्षेत्र में ज्यादातर लोगों ने कांग्रेस पर अपना विश्वास जताया और 5 बार कांग्रेस के उमीदवारों को जीता कर सत्ता में बैठाया. यहां 1980 से लेकर 1997 तक लगातार कांग्रेस के उमीदवार जीतते रहे.

Punjab Assembly Election 2022( Amritsar North Assembly Seat) Punjab Assembly Election 2022( Amritsar North Assembly Seat)
aajtak.in
  • अमृतसर,
  • 04 सितंबर 2021,
  • अपडेटेड 10:07 AM IST

अमृतसर के उत्तर विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं सुनील दत्ति. सुनील दत्ति ने विकास के मुद्दे पर अकाली-भाजपा सरकार को आड़े हाथों लेते हुए लोगों की वोट हासिल की थी. लेकिन अभी तक वो कुछ कर नहीं पाए हैं.

अमृतसर के उत्तरी विधानसभा क्षेत्र में अबतक 7 बार कांग्रेस और 3 बार बीजेपी के विधायक रहे हैं. ज्यादातर प्रदेश में जिसकी भी सरकार रही, इस विधानसभा क्षेत्र में उसी पार्टी का विधायक जीता. अभी कांग्रेस के सुनील दत्ति इस विधानसभा क्षेत्र में विधायक हैं. लेकिन सबसे पहले 1977 में इस विधानसभा क्षेत्र में जनता पार्टी के हरबंस लाल विधायक बने थे. जिन्होंने कांग्रेस के प्रताप चंद भंडारी को 4770 वोट से हराकर जीत दर्ज की.

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उसके बाद से इस विधानसभा क्षेत्र में ज्यादातर लोगों ने कांग्रेस पर अपना विश्वास जताया और 5 बार कांग्रेस के उमीदवारों को जीता कर सत्ता में बैठाया. यहां 1980 से लेकर 1997 तक लगातार कांग्रेस के उमीदवार जीतते रहे. लेकिन 1997 में बीजेपी के उम्मीदवार बलदेव राज चावला ने जीत दर्ज की और सेहतमंत्री बने. बलदेव राज चावला ने कांग्रेस के विधायक फकीर चंद को 16732 वोटों से हराया. लेकिन बीजेपी के लिए ये खुशी ज्यादा दिनों तक नहीं टिकी. 

2002 के चुनाव में एक बार फिर कांग्रेस के उमीदवार जुगल किशोर शर्मा ने बलदेव राज को हराकर बता दिया कि ये विधानसभा क्षेत्र कांग्रेस का है. इस क्षेत्र केलोग भी हमेशा विकास के मुद्दे को लेकर वोट का इस्तमाल करते रहे हैं. लेकिन जुगल किशोर शर्मा से जो उमीद लोगों ने लगाई थी, वह उसपर खरे नहीं उतरे और 2007 में बीजेपी उमीदवार अनिल जोशी से उन्हें शिकस्त का सामना करना पड़ा. 

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अनिल जोशी को नवजोत सिंह सिद्धू राजनीति में लेकर आये थे और 2004 में नवजोत सिंह सिद्धू अमृतसर से सांसद थे. लेकिन धीरे धीरे अनिल जोशी अपनी बयानबाजी की वजह से  नवजोत सिंह सिद्धू से दूर हो गए और अकाली-भाजपा गठजोड़ में बिक्रम मजीठिया से भी उनकी दूरी बन गयी. जिसका खामियाजा अनिल जोशी को 2017 के चुनावों में भुगतना पड़ा. 2017 के विधानसभा चुनाव में सुनील दत्ति ने अनिल जोशी को 24236 वोटों से हराया.

विधायक का रिपोर्ट कार्ड

कांग्रेस नेता सुनील दत्ति, 2002 में अमृतसर के मेयर भी रह चुके हैं. उसके बाद उन्हें विधानसभा चुनाव में पूर्वी सीट मिली. लेकिन नवजोत सिंह सिद्धू की पत्नी नवजोत कौर ने उन्हें 7000 वोटों से हराया. 2017 में  वे उत्तरी विधानसभा से अकाली भाजपा गठजोड़ के सबसे मजबूत उम्मीदवार अनिल जोशी के सामने उतरे और कांग्रेस को जीत दिलाई. सुनील दत्ति ने बीए तक की पढ़ाई की है. उनके दो बच्चे हैं. 

और पढ़ें- Meerut City Assembly Seat: 2017 में हारी सीट पर क्या फिर से 'कमल' खिला पाएंगे लक्ष्मीकांत वाजपेयी?

 2022 में इस सीट का महत्व

अमृतसर के उत्तरी विधानसभा सीट की एक खासियत है. जो भी इस विधानसभा सीट से जीतता है. सरकार पंजाब में उसी की बनती है. सुनील दत्ति अब तक लोगों की उम्मीदों पर खरे नहीं उतर पाए हैं. इससे पहले के विधायक अनिल जोशी विकास कार्यों के हिसाब से सबसे ऊपर थे. हालांकि विधायक बनने के बाद लोगों से नहीं मिलना, उनकी हार का कारण बना.

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अब इस सीट का इसलिए भी खास महत्व बन जाता है, क्योंकि बीजेपी के पूर्व मंत्री अनिल जोशी बीजेपी को अलविदा कह चुके हैं और अकाली-भाजपा गठजोड़ टूटने के बाद, अकाली-बसपा गठजोड़  ने ऐलान किया है कि बसपा का उमीदवार इस सीट से चुनाव लड़ेगा. इसलिए ये देखना रोमांचक होगा कि इस बार सरकार किसकी बनेगी? क्योंकि जिसका भी उमीदवार इस सीट से जीतता है सरकार पंजाब में उसी की बनती है. 
 

 

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