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चुनाव जीतने के लिए अब फ्रीबीज के रास्ते पर चल पड़ी बीजेपी! MP-राजस्थान में की खूब घोषणाएं

देश के पांच राज्यों में विधानसभा चुनावों के लिए सभी पार्टियों ने अपना-अपना घोषणा पत्र जारी कर दिया है. एक ओर कांग्रेस ने कर्नाटक की तर्ज पर अपनी गारंटी का वादा किया है तो वहीं अब बीजेपी ने भी अपनी रणनीति में बदलाव करते हुए फ्रीबीज पर फोकस किया है.

राजस्थान में जेपी नड्डा ने बीजेपी का घोषणा पत्र जारी किया (फोटो- सोशल मीडिया) राजस्थान में जेपी नड्डा ने बीजेपी का घोषणा पत्र जारी किया (फोटो- सोशल मीडिया)
हिमांशु मिश्रा
  • नई दिल्ली,
  • 17 नवंबर 2023,
  • अपडेटेड 3:29 AM IST

बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने राजस्थान विधानसभा चुनाव के लिए संकल्प पत्र (घोषणा पत्र) जारी कर दिया है. 5 राज्यों के विधानसभा चुनाव को लेकर सभी राजनैतिक दल बड़ी घोषणा कर चुके हैं. इन चुनावों में बीजेपी ने हिमाचल प्रदेश और कर्नाटक चुनाव परिणामों को देखते हुए अपनी चुनावी रणनीति में बदलाव किया है और फ्रीबीज की घोषणाओं में पीछे नहीं रही है. 

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बीजेपी ने राजस्थान में जनता के लिए कई फ्रीबीज घोषणाएं की हैं. इनमें बेटी के जन्म पर दो लाख रुपए का बॉण्ड, 12वीं के बाद छात्राओं को स्कूटी के अलावा केंद्र सरकार से मिलने वाली छह हजार निधि में राज्य सरकार भी छह हजार रुपए देगी यानी किसानों को 12 हजार रुपए मिलेंगे. मातृ वंदना योजना में 5000 से बढ़ाकर 8000 रुपए, लखपति दादी उज्जवला लाभार्थियों को 450 रुपए में गैस का सिलेंडर, कमजोर वर्ग के लोगों को 1200 रुपए प्रतिमाह, गर्भवती महिलाओं और शिशुओं को 5 लीटर देशी घी समेत तमाम वादे बीजेपी ने राजस्थान की जनता से किए हैं.  

एमपी में फ्रीबीज के वादों की झड़ी 

बीजेपी ने कुछ इसी तरह की घोषणाएं मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में भी की हैं. जैसे मध्यप्रदेश में लाड़ली बहना योजना में प्रतिमाह 1000 रुपए और सरकार बनने के बाद इसको बढ़ाकर 3000 रुपए करने की योजना, लाड़ली बहना योजना के तहत सभी को पक्के मकान, गेहूं का समर्थन मूल्य 2700 रुपए, धान का समर्थन मूल्य 3100 रुपए, दिव्यांग, बुजुर्गों को प्रतिमाह 1500 प्रतिमाह पेंशन, अटल ज्योति योजना में सभी को 100 रुपए में 100 यूनिट बिजली, प्रत्येक परिवार में एक को रोजगार या स्वरोजगार, लाड़ली लक्ष्मी बेटियों को कुल दो लाख रुपए, पीएम उज्जवला व लाड़ली बहना योजना में 450 रुपए में गैस सिलेंडर, जारी, किसान सम्मान निधि में राज्य सरकार 6 हज़ार रुपए मिलाकर देगी यानी किसान सम्मान निधि 12 हजार रुपए जैसी कई फ्रीबीज घोषणाएं बीजेपी द्वारा की गई हैं. 

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छत्तीसगढ़ में बीजेपी ने की कई घोषणाएं 

वहीं छत्तीसगढ़ में 500 रुपए में गैस का सिलेंडर, राममंदिर दर्शन योजना, धान प्रति क्विंटल 3100 रुपए, हर विवाहिता को प्रतिमाह 1000 रुपए, 18 लाख पक्के घर का वादा जैसी अनेक फ्रीबीज योजनाओं की घोषणा बीजेपी ने की हैं. दरअसल दक्षिण भारत की राजनैतिक पार्टियों के लिए फ्रीबीज चुनाव जीतने में एक बड़ा रोल अदा करता रहा है, लेकिन उतर भारत में इसका जोर 2013 के दिल्ली विधानसभा चुनावों में देखने को मिला, जब अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व में आम आदमी पार्टी ने दिल्ली विधानसभा चुनाव में बिजली की 200 यूनिट और 20,000 लीटर पानी फ्री देने का वादा किया तो आम आदमी पार्टी को 28 सीटों पर जीत मिली और 2015 में 70 में से 67 सीटों जीत के पीछे भी फ्रीबीज का बड़ा रोल रहा है.  

AAP को देखकर कांग्रेस ने हिमाचल में की घोषणा 

आम आदमी पार्टी की फ्रीबीज को देखते हुए कांग्रेस ने हिमाचल प्रदेश और कर्नाटक में फ्रीबीज योजनाओं की झड़ी लगा दी और नतीजा बीजेपी को इन दोनों राज्यो में हार का सामना करना पड़ा. इन 5 राज्यों के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस छतीसगढ़, राजस्थान, मध्यप्रदेश और तेलंगाना में कर्नाटक की तर्ज पर 6 गारंटी यानी Freebies पर अपना चुनाव प्रचार शुरू किया, जिसका फायदा कांग्रेस को मिलता देख बीजेपी ने समय की मांग को देखते हुए अपनी रणनीति में बदलाव किया और छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश के साथ राजस्थान में कई Freebies की अपने संकल्प पत्र में घोषणा की हैं. 

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छत्तीसगढ़ में पिछले चुनाव में बीजेपी ने नहीं किया था ऐलान 

साल 2018 में छत्तीसगढ़ के तत्कालीन मुख्यमंत्री रमन सिंह के लाख कहने के बाद भी बीजेपी केंद्रीय नेतृत्व ने किसानों के कर्ज माफी और धान की बढ़ी कीमतों को देने के वादे को अपने घोषणा पत्र में शामिल नहीं किया था. सूत्रों की माने तो ये ही दो सबसे बड़े कारण थे पार्टी की इतनी बड़ी हार मिली और पार्टी 90 में से सिर्फ 15 सीटें ही जीत पाई. बीजेपी केंद्रीय नेतृत्व इस हार के बाद भी Freebies को बड़ा चुनावी मुद्दा बनाने को तैयार नहीं था. पीएम मोदी से लेकर तमाम बीजेपी के नेता Freebies को लेकर कहते थे चुनाव में फ्री की रेवड़ियों का वादा करके सत्ता में आना चाहते हैं आप इनके चक्कर में मत आइएगा. इसलिए कहते हैं कई बार राजनैतिक दल सत्ता के लिए अपनी विचारधारा को साइड में रखकर कई समझौते करते हैं. एक पुरानी कहावत है- सत्ता है तो पार्टी का वजूद है, बिना सत्ता के कोई भी राजनैतिक दल ज्यादा दिन नहीं चल सकता है.

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