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तेलंगाना चुनाव: जुबली हिल्स की 'बाउंसी पिच' पर अजहर के खिलाफ केसीआर-ओवैसी का क्या प्लान?

जुबली हिल्स में 3.55 लाख मतदाता हैं. हर तीन में से एक मतदाता मुस्लिम है. समुदाय के वोटों में विभाजन से केवल बीआरएस को मदद मिलेगी. एआईएमआईएम बीआरएस के कब्जे वाली सीट पर चुनाव लड़ रही है, लेकिन असली निशाना अजहर हैं.

भारत के पूर्व क्रिकेट कप्तान मोहम्मद अजहरुद्दीन जुबली हिल्स से तेलंगाना विधानसभा का चुनाव लड़ रहे हैं. भारत के पूर्व क्रिकेट कप्तान मोहम्मद अजहरुद्दीन जुबली हिल्स से तेलंगाना विधानसभा का चुनाव लड़ रहे हैं.
टी एस सुधीर
  • हैदराबाद,
  • 23 नवंबर 2023,
  • अपडेटेड 12:46 PM IST

जब शर्ट के कॉलर की बात आती है तो मोहम्मद अजहरुद्दीन का अनोखा अंदाज याद आता है. अपने क्रिकेटिंग करियर के दिनों में, गर्दन के पिछले हिस्से को सूरज की तेज किरणों से बचाने के लिए, वह अपने कॉलर को ऊपर खींच लिया करते थे. उनकी वह आदत मैदान के अंदर और बाहर दोनों जगह बनी रही और एक स्टाइल स्टेटमेंट बन गई. जब उन्होंने 2009 में उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा था, तो अजहर-स्टाइल कॉलर पहने युवा बाइक पर घूमकर उनके लिए प्रचार कर रहे थे. हैदराबाद के जुबली हिल्स विधानसभा क्षेत्र में प्रचार अभियान के दौरान, जहां वह कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं, उनके सफेद कुर्ते ऊंचे कॉलर के साथ नहीं आते हैं.

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शायद यह एक कठिन पिच पर उस मुश्किल लड़ाई का प्रतिबिंब है जो भारत के पूर्व क्रिकेट कप्तान लड़ रहे हैं. वह यहां अपने आरामदायक कपड़ों में नहीं ​बल्कि एक परंपरागत राजनेता वाले परिधान में चुनाव प्रचार कर रहे हैं. हैदराबाद की धरती के सबसे मशहूर बेटों में से एक, अजहर को जुबली हिल्स में पैराशूट  उम्मीदवार के रूप में देखा जा रहा है. ऐसा इसलिए क्योंकि अजहर अपना पहला चुनाव उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद और दूसरी बार राजस्थान के  टोंक-सवाई माधोपुर से लड़े थे. यह पहली बार है, जब भारत के पूर्व क्रिकेट कप्तान घरेलू मैदान पर अपनी राजनीतिक क्षमता का परीक्षण कर रहे हैं. 

जुबली हिल्स में ओवैसी की पार्टी ने भी खड़ा किया उम्मीदवार

जुबली हिल्स में अजहर का मुकाबला दो कड़े विरोधियों बीआरएस (भारत राष्ट्र समिति) के मौजूदा विधायक मगंती गोपीनाथ और एआईएमआईएम (ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन) के मोहम्मद राशेद फराजुद्दीन से है. यह तेलंगाना में दो मित्र पार्टियों (बीआरएस और एआईएमएआईएम) की रणनीतिक चाल बताई जा रही है. क्योंकि एआईएमआईएम ने 2018 में जुबली हिल्स में चुनाव नहीं लड़ा था. कांग्रेस का आरोप है कि ओवैसी की पार्टी जुबली हिल्स में केवल मुस्लिम वोटों को विभाजित करने के लिए मैदान में उतरी है, जो अजहर को जाता. 

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जुबली हिल्स में 3.55 लाख मतदाता हैं. हर तीन में से एक मतदाता मुस्लिम है. समुदाय के वोटों में विभाजन से केवल बीआरएस को मदद मिलेगी. एआईएमआईएम बीआरएस के कब्जे वाली सीट पर चुनाव लड़ रही है, लेकिन असली निशाना अजहर हैं. कांग्रेस का मानना ​​है कि जुबली हिल्स को लेकर बीआरएस की घबराहट दिख रही है, यही वजह है कि उसे एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी का सहारा लेना पड़ रहा है. अजहर के लिए मुश्किलें खड़ी करने के लिए हैदराबाद के सांसद ओवैसी भी उन पर 'बॉडीलाइन अटैक' कर रहे हैं. वह अजहर को 'एक शानदार क्रिकेटर लेकिन एक फ्लॉप राजनेता' बताते हैं. 

झुग्गियों में रहने वाली 75 प्रतिशत आबादी पर कांग्रेस का फोकस

आपको बता दें कि असदुद्दीन ओवेसी संयोग से अपने विश्वविद्यालय के दिनों में एक तेज गेंदबाज थे और अजहर के करीबी पारिवारिक मित्र हैं. वह अजहर को फ्रंटफुट पर बल्लेबाजी करते हुए देखकर उन्हें बीमर गेंदबाजी कर रहे हैं. अजहर अपने चुनावी अभियान में जुबली हिल्स की सड़कों और स्वच्छता के मुद्दों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं. वह इलाके की जनता को बताने की कोशिश करते हैं कि जुबली हिल्स को एक पॉश निर्वाचन क्षेत्र भेल है, लेकिन यहां सड़क और स्वच्छता जैसी बुनियादी चीजें ठीक नहीं हैं. इस निर्वाचन क्षेत्र की 75 प्रतिशत आबादी झुग्गियों में रहती है और अजहर इस वर्ग के वोटों को लुभाने में लगे हुए हैं. 

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उनका इरादा बीआरएस को एक ऐसी पार्टी करार देने का है जिसने खुले नालों और बेरोजगारी, जमीन पर कब्जा और नशीली दवाओं की तस्करी जैसे मुद्दों को नजरअंदाज करते हुए केवल 25 प्रतिशत निर्वाचन क्षेत्र के लिए काम किया है. कांग्रेस ने रियल एस्टेट कारोबारी नवीन यादव को निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव से हटने के लिए मनाकर भी अजहर के लिए राह आसान बनाने की कोशिश की है. यादव ने 2018 में 18000 से अधिक वोट हासिल किए थे, जो कांग्रेस उम्मीदवार पर गोपीनाथ की 16000 वोटों की जीत के अंतर से 2000 अधिक था. हालांकि, यह फायदा तब बेअसर हो गया जब पी विष्णु वर्धन रेड्डी बीआरएस में चले गए. वह 2009 में कांग्रेस के टिकट पर जुबली हिल्स से जीते थे और फिर 2014 और 2018 में हार गए थे.

विपक्ष का आरोप- अजहर ने सांसद रहते मुरादाबाद में नहीं कराया विकास

व्यक्तिगत स्तर पर, 2023 वाले अजहर पुराने अजहर से एकदम विपरीत हैं. पहले, वह कम बोलने वाले व्यक्ति थे, जो किसी प्रश्न का बहुत कम शब्दों में उत्तर देते थे. अब सार्वजनिक बैठकों में वह अधिक आक्रामक, अधिक सशक्त, यहां तक ​​कि कभी-कभी थोड़ा क्रोधित भी हो जाते हैं. लेकिन अगर अजहर जुबली हिल्स में नहीं जीत पाए तो क्या इसका कारण सिर्फ मुस्लिम वोट का बंटवारा होगा? उत्तर है नहीं. विरोधी दल इस बात पर प्रकाश डाल रहे हैं कि कैसे उन्होंने सांसद रहते मुरादाबाद में कोई काम नहीं किया. जबकि अजहर ने सांसद के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान किए गए सड़कों के काम की ओर इशारा करते हुए इस आरोप से इनकार किया है.

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जब अजहर को हैदराबाद क्रिकेट एसोसिएशन का अध्यक्ष चुना गया तो उनके पास भी इस संस्थान को व्यवस्थित करने का मौका था, लेकिन ऐसा करने में सफल नहीं हो सके. विपक्ष इस बात को भी मुद्दा बना सकता है कि वर्ष 2000 के मैच फिक्सिंग में उनका नाम कैसे सामने आया. अजहर भले ही जीतें या हारें, जुबली हिल्स में जमीन पर काम करने की उनकी क्षमता पर भी संदेह उठाया गया है. अजहर की उम्मीदें इस निर्वाचन क्षेत्र में कांग्रेस पार्टी के परंपरागत वोट बैंक पर टिकी हुई हैं. 

अजहर को उम्मीद- जुबली हिल्स के मतदाता उन पर जताएंगे अपना विश्वास

उन्हें कांग्रेस के वोट बैंक और अपनी व्यक्तिगत छवि के सहारे जुबली हिल्स में जीत का परचम लहराने की उम्मीद है. और यहीं पर उनके क्रिकेट रिकॉर्ड का जिक्र मिलता है. वनडे सीरीज के फाइनल मुकाबलों में अजहर का जीत प्रतिशत 72.73 था, जो 1990 के बाद से सभी कप्तानों में सबसे अधिक है. उनके समर्थकों का मानना ​​है कि जुबली हिल्स को उनके नेतृत्व कौशल के किसी और प्रमाण की आवश्यकता नहीं है. अब जब उन्होंने अपनी पार्टी के 'मियां, एमएलए बनोगे?' वाले नारे के लिए हां कह दिया है, तो अजहर को उम्मीद होगी कि जुबली हिल्स के मतदाता बाकी काम करेंगे.

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