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कांग्रेस को धोखा देने का सच क्या है, तेलंगाना गठन के बाद कैसे अलग हो गई थीं राहें? KCR Exclusive

तेलंगाना में चुनाव हैं और इन चुनाव में धोखे का मुद्दा छाया हुआ है. कांग्रेस ने केसीआर पर राज्य गठन के बाद सोनिया गांधी को धोखा देने का आरोप लगाते हुए मोर्चा खोल रखा है तो वहीं अब बीआरएस प्रमुख ने भी जवाब दिया है. उन्होंने ये भी बताया है कि तेलंगाना गठन के बाद कैसे कांग्रेस और बीआरएस (तब टीआरएस) की राहें अलग हो गई थीं.

तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव (फाइल फोटो) तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव (फाइल फोटो)
राज चेंगप्पा/अमरनाथ के. मेनन
  • नई दिल्ली,
  • 17 नवंबर 2023,
  • अपडेटेड 2:15 PM IST

तेलंगाना में चुनाव हैं और सत्ताधारी भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस), कांग्रेस के साथ ही भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) चुनावी बाजी जीतने के लिए पूरा जोर लगा रही है. अगले पांच साल तक हैदराबाद की गद्दी पर कौन बैठेगा? यह तय करने के लिए सूबे की जनता 30 नवंबर को वोट करेगी जिसके नतीजे 3 दिसंबर को आएंगे. कांग्रेस को धोखा देने का सच क्या है, तेलंगाना गठन के बाद बीआरएस और कांग्रेस की राहें कैसे अलग हो गई थीं? सीएम केसीआर ने इंडिया टुडे से एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में हर सवाल का खुलकर जवाब दिया.

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केसीआर ने कांग्रेस की ओर से लगाए जा रहे धोखा देने के आरोप का भी जवाब दिया. कांग्रेस ये कह रही है कि केसीआर ने सोनिया गांधी से कहा था कि तेलंगाना राज्य के लिए सहमत हो जाएं तो हम अपनी पार्टी का कांग्रेस में विलय कर देंगे लेकिन धोखा दिया. इससे जुड़े सवाल पर उन्होंने उल्टे कांग्रेस को कठघरे में खड़ा करते हुए आरोप लगाया कि सोनिया गांधी ने हमें धोखा दिया था.

केसीआर ने कहा कि ये लंबी प्रक्रिया थी और मैं यूपीए के साथ था. 2004 में ही उन्होंने (कांग्रेस ने) सत्ता में आने पर तेलंगाना को राज्य बनाने का वादा किया था. लेकिन जब वे सत्ता में आए तब अपने वादे से मुकर गए. बीआरएस प्रमुख ने कहा कि 2009 में जब वे फिर से सत्ता में आए, तब तेलंगाना राज्य गठन के लिए संसद से बिल पारित कराया. वह भी तब, जब मैं भूख हड़ताल पर चला गया. उन्होंने राज्य गठन के बाद दिग्विजय सिंह से मुलाकात को भी याद किया.

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कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह (फाइल फोटो)

दिग्विजय सिंह से क्या हुई थी बात?

तेलंगाना के सीएम ने कहा कि दिग्विजय सिंह ने सीट बंटवारा कांग्रेस की शर्तों पर होने की बात कही थी और ये भी कि राज्य के नेतृत्व को लेकर फैसला चुनाव के बाद होगा. केसीआर ने कहा कि इसके बाद हमने सर्वे कराया जिसमें हमें 50 से अधिक सीटें मिलने का अनुमान सामने आया. चुनाव हुए तो जनता ने हमें पूर्ण बहुमत दिया और हम सत्ता में आ गए. अब हमने कांग्रेस को धोखा दिया, ये सवाल ही कहां आता है?

अब देश के लिए योगदान की जरूरत

केसीआर ने भविष्य की राजनीति को लेकर ये भी कहा कि अब जरूरत है कि देश के लिए योगदान दूं. चुनाव बाद सीएम के सवाल पर उन्होंने कहा कि देश के लिए योगदान देने को सेंटर में जाना जरूरी नहीं, यहीं (तेलंगाना में) बैठकर भी ये किया जा सकता है. केसीआर ने महाराष्ट्र का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां करीब 25 लाख लोग बीआरएस से जुड़ गए हैं. हाल ही में आए महाराष्ट्र पंचायत चुनाव में भी बीआरएस का प्रदर्शन अच्छा रहा है.

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केसीआर ने ओपिनियन पोल्स में एंटी इनकम्बेंसी के सवाल पर दावा किया कि तेलंगाना में प्रो-इनकम्बेंसी है. उन्होंने ओडिशा में नवीन पटनायक और पश्चिम बंगाल में ज्योति बसु का जिक्र करते हुए कहा कि जिस तरह इन्होंने शासन किया और कई बार चुनाव जीते, उसी तरह तेलंगाना में भी प्रो-इनकम्बेंसी है.

नेतृत्व के सेंट्रलाइज्ड स्टाइल पर क्या बोले

नेतृत्व के सेंट्रलाइज्ड स्टाइल को लेकर अपने बयान से संबंधित सवाल पर तेलंगाना के सीएम ने कहा कि राज्य का फाउंडर होने के नाते मुझे पता है कि इसकी जरूरत क्या है. यही वजह है कि महत्वपूर्ण मुद्दों पर हम ही फैसले लेते हैं. उन्होंने साथ ही ये भी कहा कि कुछ लोगों को ये पसंद नहीं. कृषि और किसानों को लेकर सवाल पर केसीआर ने कहा कि 2014 में हम जब सत्ता में आए थे, तब राज्य में धान उत्पादन सात मिलियन टन के आसपास था.आज धान उत्पादन बढ़कर 26 मिलियन टन के आंकड़े को भी पार कर गया है और प्रदेश दक्षिण भारत का धान का कटोरा बन गया है.

बुलडोजर मॉडल की आलोचना

उन्होंने यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ के बुलडोजर मॉडल की आलोचना करते हुए कहा कि शूट ऐट साइट लोकतंत्र में ठीक नहीं. केसीआर ने कहा कि कानून और व्यवस्था के लिए अलग विभाग है और ये उसका काम है. न्यायिक तंत्र है, ये उसका काम है. उन्होंने कहा कि मैं बुलडोजर मॉडल का मजबूती से विरोध करता हूं.

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तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव (फाइल फोटो)

तेलंगाना में प्राइवेट इंडस्ट्री को बढ़ावा देने के लिए अपनी सरकार के रोडमैप को लेकर भी सीएम केसीआर ने बात की. उन्होंने टीएस-आईपास का जिक्र करते हुए कहा कि हमने सबकुछ ऑनलाइन कर दिया है. केसीआर ने कहा कि सरकार केवल इतना देखती है कि निवेशक सही है या नहीं. 15 दिन के अंदर सारी प्रक्रिया पूरी कर ली जाती है.

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केसीआर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी जमकर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी जब मुख्यमंत्री थे, तब वह केंद्र सरकार के खिलाफ शिकायतें करते रहते थे. लेकिन अब खुद उनकी सरकार के समय राज्यपाल विधानसभा से पारित विधेयक लटका रहे हैं. केसीआर ने कहा कि ये अपराध है. उन्होंने राज्यपाल पर निशाना साधते हुए कहा कि तेलंगाना की राज्यपाल तमिलनाडु बीजेपी की अध्यक्ष रही हैं. वह कई बिल रोक रही हैं जो थर्ड क्लास पॉलिटिक्स है.

हिंदुत्व पर क्या बोले केसीआर

हिंदुत्व को लेकर एक सवाल पर केसीआर ने कहा कि मैं भी हिंदू हूं लेकिन मेरा मानना है कि हिंदुत्व को राजनीति में नहीं लाना चाहिए. बाजार में राजनीतिक रूप से इसे कैश कराने के लिए लाते हैं तो आप हिंदुत्व की बेइज्जती कर रहे होते हैं. फिस्कल डेफिसिट से जुड़े सवाल पर केसीआर ने कहा कि तेलंगाना में ये स्टेट जीडीपी के 25 फीसदी से भी कम है. उन्होंने लोन को लेकर कहा कि दुनिया में सबसे अधिक कर्जदार कौन है? अमेरिका और जापान. तेलंगाना के बॉन्ड्स लेने के लिए तो बैंक लाइन लगाते हैं.

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