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अब्बाजान बनाम चाचाजान: यूपी में ओवैसी की सक्रियता से क्यों बेचैन हैं राकेश टिकैत?

यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इन दिनों अखिलेश यादव पर तंज कसने के लिए उनके पिता मुलायम सिंह यादव को 'अब्बाजान' कह कर निशाना साध रहे हैं. इस बीच भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने असदुद्दीन ओवैसी को बीजेपी का 'चाचाजान' बता दिया है. ऐसे में सवाल उठता है कि असदुद्दीन ओवैसी की यूपी में सक्रियता से राकेश टिकैत क्यों बेचैन हो रहे हैं? 

कुबूल अहमद
  • नई दिल्ली ,
  • 15 सितंबर 2021,
  • अपडेटेड 8:14 AM IST
  • यूपी में अब्बाजान बनाम चाचाजान पर सियासत तेज
  • टिकैत के निशाने पर अब असदुद्दीन ओवैसी भी आए
  • पश्चिम यूपी में जाट-मुस्लिम एकता के बिखरने का डर?

उत्तर प्रदेश की सियासत 'अब्बाजान' बनाम 'चाचाजान' के इर्द-गिर्द सिमट रही है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इन दिनों अखिलेश यादव पर तंज कसने के लिए उनके पिता मुलायम सिंह यादव को 'अब्बाजान' कह कर निशाना साध रहे हैं तो भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने असदुद्दीन ओवैसी को बीजेपी का 'चाचाजान' बता दिया है. टिकैत ने कहा कि ओवैसी बीजेपी को गाली देते हैं, फिर भी उनके खिलाफ कोई केस दर्ज नहीं होता है, क्योंकि ये दोनों एक ही टीम हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि असदुद्दीन ओवैसी की यूपी में सक्रियता से राकेश टिकैत क्यों बेचैन हो रहे हैं? 

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कृषि कानून के खिलाफ आंदोलन कर रहे राकेश टिकैत यूपी में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में बीजेपी को सबक सिखाने का ऐलान कर चुके हैं. बीजेपी को वोट से चोट देने के लिए सूबे में घूम-घूमकर रैलियां और जनसभाए कर रहे हैं ताकि पश्चिम यूपी में जाट-मुस्लिम की बीच दूरियों को पाटा जा सके. किसान आंदोलन के बहाने जाट-मुस्लिम एकता के प्रयास में जुटे राकेश टिकैत की राह में सबसे बड़ी दिक्कत ऑल इंडिया मजलिस-ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी बन रहे हैं.

ओवैसी बीजेपी के चाचाजान- टिकैत

असदुद्दीन ओवैसी उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में पूरे दमखम के साथ लड़ने की तैयारी में जुटे हैं. ऐसे में उन्होंने सूबे की 100 मुस्लिम बहुल सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारने का ऐलान किया है. ओवैसी सूबे में मुस्लिम को अपने साथ जोड़ने के लिए सबसे ज्यादा अखिलेश यादव को निशाने पर ले रहे हैं, क्योंकि मुस्लिम मतदाता सपा का परंपरागत वोटर माना जाता है. ऐसे में ओवैसी सपा को टारगेट कर मुस्लिमों को अपने पाले में लाने की कवायद में जुटे हैं. 

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ओवैसी ने यूपी में बढ़ाई सक्रियता

असदुद्दीन ओवैसी की राजनीतिक सक्रियता से राकेश टिकैत चिंतित नजर आ रहे हैं, क्योंकि मुस्लिम वोटों का बिखराव बीजेपी की राह आसान बना सकता है. यही वजह है कि टिकैत ने हापुड़ की एक रैली को संबोधित करते हुए कहा कि बीजेपी के चाचाजान असदुद्दीन ओवैसी अब उत्तर प्रदेश में आ गए हैं. ओवैसी को बीजेपी ने ही बुलाया है, यह बात गांव के लोग कह रहे हैं. देश में जहां-जहां चुनाव होंगे, वहां-वहां बीजेपी के चाचाजान आएंगे. ओवैसी बीजेपी को कुछ भी कहेंगे, लेकिन उन पर केस दर्ज नहीं होगा. दोनों एक ही टीम हैं.

पश्चिम यूपी में जाट-मुस्लिम सियासत

दरअसल, पश्चिमी यूपी में एक दौर ऐसा था जब जाट और मुस्लिम समुदाय करीब थे, लेकिन पश्चिम यूपी के इस शुगर बेल्ट के मुजफ्फरनगर में साल 2013 के सांप्रदायिक दंगों के बाद दोनों समुदायों के बीच कड़वाहट आ गई. जाट और मुस्लिम बिखर गया, जिसके बाद हुए चुनावों में बीजेपी को सीधा फायदा मिला. जाट समुदाय बीजेपी का कोर वोटबैंक बन गया और मुस्लिम सपा, बसपा व कांग्रेस के साथ चले गए. 2014 के लोकसभा और 2017 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने वेस्ट यूपी में आरएलडी की जाट-मुस्लिम केमिस्ट्री को तोड़ते हुए नया समीकरण तैयार किया.

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2017 के विधानसभा चुनाव में पश्चिम यूपी की कुल 136 सीटों में से 109 सीटें बीजेपी ने जीती थीं जबकि महज 20 सीटें ही सपा के खाते में आई थीं. कांग्रेस दो सीटें और बसपा चार सीटें जीती थी. वहीं, एक सीट आरएलडी के खाते में गई थी, जहां से विधायक ने बाद में बीजेपी का दामन थाम लिया. यह सिलसिला 2019 लोकसभा चुनाव में भी जारी रहा, लेकिन 2014 के मुकाबले सपा और बसपा ने मुस्लिम बहुल सीटों पर जरूर जीत दर्ज करने में सफल रही. 

136 सीटों पर जाट-मुस्लिम का प्रभाव

उत्तर प्रदेश में जाट समुदाय की आबादी करीब 4 फीसदी है जबकि पश्चिम यूपी में यह 20  फीसदी के आसपास है. वहीं, मुस्लिम आबादी यूपी में भले ही 20 फीसदी है, लेकिन पश्चिम यूपी में 35 से 50 फीसदी तक है. जाट और मुस्लिम समुदाय सहारनपुर, मेरठ, बिजनौर, अमरोहा, मुजफ्फरनगर, बागपत और अलीगढ़-मुरादाबाद मंडल सहित पश्चिम यूपी की 136 विधानसभ सीटों पर असर रखते हैं. सूबे की 136 विधानसभा सीटों में 55 सीटें ऐसी है, जाट-मुस्लिम मिलकर 40 फीसदी से अधिक बैठती है. 

पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह देश में जाट समुदाय के सबसे बड़े नेता के तौर पर जाने जाते थे. उन्होंने प्रदेश और देश की सियासत में अपनी जगह बनाने और राज करने के लिए 'अजगर' (अहीर, जाट, गुर्जर और राजपूत) और 'मजगर' (मुस्लिम, जाट, गुर्जर और राजपूत) फॉर्मूला बनाया था. चौधरी चरण सिंह जाट और मुस्लिम समीकरण के सहारे लंबे समय तक सियासत करते रहे. 

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मुजफ्फरनगर दंगे से जाट-मुस्लिम बिखरा

पश्चिम यूपी में इसी समीकरण के सहारे आरएलडी किंगमेकर बनती रही है, लेकिन 2013 में मुजफ्फरनगर दंगे के बाद यह समीकरण पूरी तरह से टूट गया और जाट व मुस्लिम दोनों ही आरएलडी से अलग हो गए. इसके चलते पिछले दो चुनाव से अजित सिंह और उनके बेटे जयंत चौधरी को हार का मुंह देखना पड़ा है. किसान आंदोलन के बहाने जाट और मुस्लिम एक साथ आए हैं और अब उन्हीं के वोट के सहारे 2022 के चुनाव में बीजेपी को चोट देने के नारे बुलंद किए जा रहे हैं.

राकेश टिकैत जाट-मुस्लिम समीकरण के जरिए पश्चिम यूपी में बीजेपी को सबक सिखाना चाहते हैं. इसीलिए उसी मुजफ्फरनगर में राकेश टिकैत ने किसान महापंचायत के दौरान हर-हर महादेव और अल्लाहु अकबर का नारा लगाया. इसका सीधा संकेत पश्चिम यूपी में जाट और मुस्लिम के बीच एकता का संदेश देना था. इतना ही नहीं 2013 के दंगे के बाद भारतीय किसान यूनियन से नाता तोड़कर अलग हो चुके किसान नेता गुलाम मोहम्मद जौला भी वापसी कर चुके हैं.

मुस्लिम वोटों पर ओवैसी की नजर 

राकेश टिकैत की तमाम कोशिशें जाट-मुस्लिम को एक करने की हैं, उधर असदुद्दीन ओवैसी की नजर भी मुस्लिम वोटबैंक पर है. ऐसे में टिकैत को लगता है कि असदुद्दीन ओवैसी के प्रभाव में अगर मुस्लिम छिटक गया तो फिर पश्चिम यूपी में बीजेपी के विजय रथ को रोक पाने में सफल नहीं हो सकेंगे. यही वजह है कि उन्होंने अब ओवैसी को लेकर आक्रामक रुख अपना लिया है और ओवैसी को बीजेपी की बी टीम करार दे रहे हैं. 

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AIMIM के प्रवक्ता असीम वकार ने इस पर कहा है कि राकेश टिकट कितने सेक्युलर हैं, उन्हें मुझसे और मेरे लोगों से बेहतर कोई नहीं जानता. 2017 और 2019 के चुनाव में वो बीजेपी को जिताने का काम रहे थे. अब मुसलमानों के कंधे पर बैठकर अपना राजनीतिक सफर तय कर रहे हैं. मंच पर चढ़कर अल्लाहु अकबर का नारा बुलंद कर रहे हैं, लेकिन मुजफ्फरनगर का दंगा हुआ था तो कहां छुप कर बैठे थे? उस समय इन्हीं के लोग हर-हर महादेव और जय श्रीराम के नारों के साथ मुसलमानों का कत्लेआम कर रहे थे और अब ओवैसी को बीजेपी की बी टीम बता रहे हैं जबकि हम यकीन से कह रहे हैं कि राकेश टिकट खुद बीजेपी की पिच पर बीजेपी के बल्ले और गेंद से खेल रहे हैं और मुसलमानों को किसानों के नाम पर धोखा दे रहे हैं. 


 

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