
उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव का ऐलान हो चुका है. बरेली को कांग्रेस का गढ़ कहा जाए तो कुछ गलत नहीं होगा क्योंकि आजादी के बाद सबसे ज्यादा बार यहां से कांग्रेस प्रत्याशी ही जीत कर विधानसभा पहुंचे हैं. इलाके में आर्मी कैंट होने की वजह से मध्य बरेली वाले इस. हिस्से को बरेली कैंट भी कहा जाता है.
राजनीतिक पृष्ठभूमि
बरेली में 9 विधानसभा क्षेत्रों में कैंट सीट की अधिकांश आबादी शहर में ही रहती है. यहां 1957 से लेकर अब तक 16 बार चुनाव हो चुके हैं. आजादी के बाद हुए चुनाव में कांग्रेस के प्रत्याशी यहां से 7 बार चुनाव जीत चुके हैं. जबकि 2 बार सपा का यहां से परचम लहरा चुकी है.
एक बार निर्दलीय प्रत्याशी तो दो बार बीजेपी ने इस सीट पर जीत हसिल की है. वर्तमान में बीजेपी के राजेश अग्रवाल बरेली कैंट से विधायक हैं. वह 2012 से लगातार इस सीट पर कब्जा जमाये हुए हैं. राजेश अग्रवाल ने 2012 में समाजवादी पार्टी के शानदार प्रदर्शन के बावजूद इस सीट पर जीत दर्ज की थी.
2017 का जनादेश
2012 के चुनाव में राजेश अग्रवाल ने समाजवादी पार्टी के नेता फहीम साबिर को हराकर इस सीट पर अपना कब्जा जमाया था. वहीं 2017 के विधानसभा चुनाव में राजेश अग्रवाल ने सपा-कांग्रेस गठबंधन के उम्मीदवार नबाब मुजाहिद हसन को 1 लाख 12 हजार 664 वोटों से हराया था.
विधायक का रिपोर्ट कार्ड
चुनाव जीतने के बाद उनको योगी सरकार में वित्त मंत्री भी बनाया गया था. बाद में कुछ कारणों से मंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद 2020 में उन्हें बीजेपी का राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष बनाया गया.
कैंट विधानसभा सीट में कुतुबखाना चौराहा, शाहमतगंज, सिकलापुर, रोडवेज बस स्टैंड, घंटाघर, जिला अस्पताल, कचहरी, रामपुर गार्डन, नगर निगम, नॉवल्टी चौराहा, चौकी चौराहा, चौपला चौराहा, रेलवे स्टेशन जंक्शन, कैंट, सुभाष नगर, मढ़ीनाथ, वंशीनगला, सिठौरा, बांस मंडी, एमजेपी रोहेलखंड विश्वविद्यालय जैसे क्षेत्र आते हैं.
इस विधानसभा का अधिकांश इलाका शहरी है. लेकिन गांव का भी कुछ हिस्सा इस विधानसभा क्षेत्र आता है.
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