
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के नतीजे आ चुके हैं. बुंदेलखंड और रूहेलखंड के कई दिग्गजों की किस्मत का फैसला हो गया. रामपुर से सपा के दिग्गज नेता आजम खान मैदान में थे. उन्होंने इस सीट पर कब्जा कर लिया है. वहीं, शाहजहांपुर की राजनीति में सबसे सक्रिय और चर्चित नाम सुरेश खन्ना ने 9वीं बार अपनी जीत दर्ज कर ली है. योगी सरकार में सुरेश खन्ना का कद बेहद अहम है.
इधर, स्वार सीट से आजम खान के बेटे अब्दुल्ला आजम खान का मुकाबला बसपा के अध्यापक शंकर लाल और अपना दल (सोनेलाल) के हैदर अली खान उर्फ हमजा मियां से था. अब्दुल्ला ने 1,26,162 वोटों के साथ स्वार सीट पर अपना कब्जा जमा लिया है. उन्होंने साल 2017 में भी 53 हजार से ज्यादा वोटों से जीत हासिल की थी.
इधर, महोबा से बीजेपी के राकेश कुमार गोस्वामी जीत गए हैं. उन्हें 94490 वोट मिले हैं. ललितपुर सदर से भाजपा के रामरतन कुशवाहा ने 176550 वोटों के साथ अपनी जीत सुनिश्चित कर ली है. महरौनी सीट से भाजपा के मनोहरलाल पंथ चुनाव जीत गए हैं. उन्हें 184778 वोट मिले हैं. वहीं उरई सीट पर भाजपा के गौरी शंकर ने अपनी जीत दर्ज कर ली है. इन्हें 128644 वोट हासिल हुए हैं.
मुरादाबाद में 6 विधानसभा सीटें हैं. इनमें मुरादाबाद नगर सीट पर रितेश कुमार गुप्ता ने सपा के युसूफ अंसारी को 782 वोट के अंतर से हरा दिया है. वहीं मुरादाबाद ग्रामीण सीट पर समाजवादी पार्टी के मोहम्मद नासिर ने बाजी मार ली है. इन्होंने 56820 वोटों से भाजपा उम्मीदवार केके मिश्रा को हरा दिया है. इसके अलावा कांठ सीट पर सपा प्रत्याशी कमल अख्तर, ठाकुरद्वारा में सपा के नवाब जान, बिलारी से सपा के फहीम इरफान, कुंदरकी सीट से सपा के जियाउर्ररहमान और असमोली से सपा की पिंकी सिंह चुनाव जीत गई हैं.
उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड इलाके में झांसी, ललितपुर, महोबा, जालौन, हमीरपुर और बांदा जिले आते हैं. इन जिलों में कुल 19 विधानसभा सीटें आती हैं. वहीं, रुहेलखंड इलाके में संभल, मुरादाबाद, रामपुर, बरेली, बदायूं और शाहजहांपुर जिले की सीटें हैं.
बुंदेलखंड का इलाका एक दौर में बसपा का मजबूत गढ़ माना जाता है, लेकिन 5 साल पहले बीजेपी ने सपा-बसपा-कांग्रेस का इस पूरे इलाके से सफाया कर दिया था. 2017 में बीजेपी ने बुंदेलखंड में अपनी सियासी जड़े ऐसी मजबूत की सपा और बसपा गठबंधन भी 2019 में उसे नहीं हिला सका. सूबे में बीजेपी की सत्ता की वापसी में बुंदलेखंड की भूमिका काफी अहम रही थी.