
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले छोटे दल भी अपनी सियासी चाल चलने में जुटे हुए हैं, लेकिन समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav Shivpal Yadav) और उनके चाचा शिवपाल यादव के रिश्तों पर जमी बर्फ पिघलने का नाम नहीं ले रही है. शिवपाल अब सपा के साथ गठबंधन के लिए लंबा इंतजार करने के मूड में नहीं हैं. अखिलेश को 11 अक्टूबर तक गठबंधन फाइनल करने का शिवपाल ने आखिरी अल्टीमेटम दे दिया है. हालांकि, यह माना जा रहा था कि मुलायम सिंह के जन्मदिन पर यादव परिवार एक हो जाएगा, लेकिन 22 नवंबर में अभी काफी समय है.
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव इस बार सूबे के छोटे-छोटे दलों के साथ गठबंधन कर चुनाव लड़ने की कोशिश में जुटे हैं. इसी कड़ी में उन्होंने अपने चाचा शिवपाल यादव की पार्टी को भी साथ लेने की बात लगातार की है. वहीं, शिवपाल भी साफ तौर पर कह चुके हैं कि सपा के साथ गठबंधन उनकी पहली प्राथमिकता है. इतना ही नहीं शिवपाल तो अपनी पार्टी का सपा में शर्त के साथ विलय करने तक को राजी हो गए थे. शिवपाल यादव कई बार ये संकेत दे चुके हैं कि यदि उनको अखिलेश का बुलावा आता है तो वो उनसे मिलने जाएंगे.
मुलायम ने कर लिया शिवपाल को राजी!
सूत्रों की मानें तो इसी सिंतबर के पहले सप्ताह में शिवपाल यादव और मुलायम सिंह यादव के बीच दिल्ली में डेढ़ घंटे की मुलाकात हुई थी. इस दौरान उन्होंने शिवपाल यादव को राजी कर लिया था. इसके बाद मुलायम सिंह की अखिलेश के साथ दिल्ली में बैठक हुई थी. मुलायम सिंह ने भाई और बेटे दोनों को समझा दिया था यदि अभी परिवार एकजुट नहीं हुआ तो चुनाव में इसके गंभीर परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहें. इसके बाद ही शिवपाल यादव अपनी पार्टी का सपा में विलय करने की बात करने लगे थे.
अखिलेश और शिवपाल दोनों ही मिलकर चुनाव लड़ने की बातें तो कर रहे हैं, लेकिन उनके बीच गठबंधन को लेकर न तो कोई मुलाकात हो रही है और न ही कई फॉर्मूला तय हो पा रहा है. ऐसे में माना जा रहा था कि सपा संस्थापक मुलायम सिंह के जन्मदिन 22 नवंबर को सैफाई में पूरा परिवार एकजुट होगा तो उसी दौरान चाचा-भतीजे के बीच सुलह-समझौता का ऐलान किया जाएगा.
अखिलेश को अल्टीमेटम
मुलायम सिंह का जन्मदिन आने में अभी पौने दो महीने का समय बचा है. ऐसे में शिवपाल यादव का धैर्य अखिलेश का बुलावा नहीं मिलने से टूटने लगा है. मंगलवार को इटावा में उन्होंने यह जाहिर किया और बोले-अब बहुत हो गया भतीजे के बुलावे का इंतजार. उन्होंने कहा कि अगर गठबंधन पर 11 अक्टूबर तक अखिलेश का कोई जवाब नहीं आता है तो प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीट पर अपनी पार्टी के प्रत्याशी को उतारने की तैयारी शुरू कर देंगे और 12 तारीख से मथुरा से प्रदेश भर के भ्रमण पर निकल जाएंगे. शिवपाल ने कहा कि हमने सपा से गठबंधन के सारे प्रयास कर लिए अब इंतजार अखिलेश यादव के जवाब का है.
इसलिए टूट रहा शिवपाल का धैर्य
शिवपाल यादव का धैर्य इसीलिए भी टूट रहा है, क्योंकि विपक्षी खेमे के दूसरे दल अपने-अपने गठबंधन को स्वरूप देने में जुटे हैं. असदुद्दीन ओवैसी के साथ सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी की अगुवाई में बने भागीदारी संकल्प मोर्चा में शामिल दल अब सीट शेयरिंग फॉर्मूले पर मंथन कर रहे हैं. राजभर और ओवैसी के साथ शिवपाल की कई दौर की बैठक हो चुकी है, लेकिन सपा के चक्कर में कोई निर्णय नहीं ले पा रहे हैं.
शिवपाल ने कहा कि हमारी कई छोटे-बड़े दलों से वार्ता हो रही है. वहीं, ओवैसी-राजभर अक्टूबर के महीने में यूपी में एक बड़ा कार्यक्रम करने जा रहे हैं, जिसमें भागीदारी संकल्प मोर्चा में शामिल सभी दल के नेता एक साथ उपस्थित होंगे. राजभर-ओवैसी ने शिवपाल यादव को भी कह दिया है कि गठबंधन को लेकर अपना स्टैंड साफ करें ताकि सीट बंटवारे का फॉर्मूल तय हो. यही वजह है कि शिवपाल अब सपा का बहुत लंबा इंतजार नहीं करना चाहते हैं.
शिवपाल को यह भी लग रहा है कि कहीं अखिलेश के चक्कर में रहने से छोटे दलों के साथ का मौका भी हाथ से निकल न जाए. इसीलिए वो अल्टीमेटम देने के साथ अपनी ताकत भी बता रहे हैं. उन्होंने कह कि कि प्रदेश के हर जिले में प्रसपा का संगठन मजबूत है. जिला पंचायत चुनाव में भतीजे अंशुल यादव ने गठबंधन किया तो सभी का विरोध झेलने के बावजूद जिला पंचायत अध्यक्ष के साथ जसवंतनगर क्षेत्र के तीन ब्लाक प्रमुख भी निर्विरोध निर्वाचित करा दिए. हमारी पार्टी इटावा-औरैया की सभी विधानसभा सीटों पर जीत दर्ज करेगी.
शिवपाल यादव ने अब सबकुछ साफ कर दिया है, ऐसे में देखना है कि अब अखिलेश यादव क्या पहल करते हैं?