
उत्तर प्रदेश में आदिगंगा गोमती नदी के तट पर बसे सुलतानपुर जिले की सदर विधानसभा सीट ऐसी सीटों में गिनी जाती है जहां का जनादेश प्रदेश की सत्ता का निर्धारण करता है. इसे सत्ता के लिए 'लकी' माना जाता है. पिछले कुछ साल के चुनाव परिणाम पर नजर डालें तो सुलतानपुर सदर विधानसभा सीट से जिस दल का विधायक जीता, सूबे में उसी दल की सरकार बनी.
सुलतानपुर सदर विधानसभा सीट राजधानी लखनऊ से 165 किलोमीटर दूर है. प्रयागराज की दूरी यहां से 125 किलोमीटर है जबकि अयोध्या महज 65 किलोमीटर दूर है. इस विधानसभा क्षेत्र में ऊंचे टीले पर स्थित चौरासी बाबा का आश्रम श्रद्धा का केंद्र है. यहां से गोमती नदी की मुख्य धारा उल्टी दिशा में बहती है. इस आश्रम का अपना आध्यात्मिक महत्व है.
राजनीतिक पृष्ठभूमि
सुलतानपुर सदर विधानसभा सीट का नाम 2008 के परिसीमन से पहले जयसिंह पुर था. 2017 के चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने चुनाव अभियान का आगाज इसी सीट से किया था. जयसिंह पुर, सुलतानपुर जिले की एक तहसील है. इस विधानसभा सीट से सबसे अधिक दफे बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के उम्मीदवारों को विजय मिली है. 1996 से 2007 तक ये सीट बसपा के कब्जे में रही. 1969 से अब तक के चुनाव परिणाम पर नजर डालें तो बसपा की हैट्रिक के अलावा कांग्रेस, जनता दल, सपा और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के उम्मीदवार भी दो-दो दफे इस सीट से लखनऊ की विधानसभा में पहुंचने में कामयाब रहे हैं.
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सुलतानपुर सदर विधानसभा सीट (पुराना नाम जयसिंह पुर विधानसभा) से 1969 में कांग्रेस के श्यो कुमार, 1977 में जनता पार्टी के मकबूल हुसैन खान, 1980 में कांग्रेस प्रत्याशी देवेंद्र पांडेय जीते थे. 1989 के चुनाव में जनता पार्टी से अलग हुए जनता दल के उम्मीदवार सूर्यभान सिंह, 1991 में पहली दफे यहां कमल खिला. 1993 में सपा के ए रईस, 1996 में बसपा के राम रतन यादव विजयी रहे तो वहीं 2002 और 2007 में बसपा के ही ओपी सिंह विधानसभा पहुंचे.
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नए परिसीमन के बाद जयसिंह पुर विधानसभा सीट का नाम परिवर्तित होकर सुलतानपुर विधानसभा सीट हो गया. सुलतानपुर विधानसभा सीट पर पहली दफे 2012 में मतदान हुआ और जीत का चौका लगाने की बसपा की उम्मीदें टूट गईं. सपा के टिकट पर चुनाव मैदान में उतरे अरुण वर्मा चुनाव जीतकर पहली बार विधायक निर्वाचित हुए.
2017 का जनादेश
सुलतानपुर सदर विधानसभा सीट से 2017 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने सीताराम वर्मा को टिकट दिया. बीजेपी के टिकट पर चुनाव मैदान में उतरे सीताराम वर्मा ने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी बसपा के राज प्रसाद को 18 हजार से अधिक वोट के अंतर से हरा दिया. सपा के टिकट पर उतरे तब के निवर्तमान विधायक अरुण यादव तीसरे स्थान पर रहे थे.
सामाजिक ताना-बाना
सुलतानपुर सदर विधानसभा सीट पर जनवरी 2021 की मतदाता सूची के मुताबिक 3 लाख 36 हजार से अधिक मतदाता हैं. 2017 के विधानसभा चुनाव में सदर सीट में कुल 3 लाख 24 हजार 223 मतदाता थे. इस सीट पर 58.37 फीसदी मतदाताओं ने अपने मताधिकार का उपयोग किया था. यहां हर जाति-वर्ग के मतदाता निवास करते हैं.
विधायक का रिपोर्ट कार्ड
सुलतानपुर सदर विधानसभा सीट से विधायक सीताराम वर्मा का जन्म 17 फरवरी 1948 को हुआ था. 73 साल के सीताराम वर्मा पोस्ट ग्रेजुएट और पेशे से अधिवक्ता हैं. साल 2016 तक ये बसपा में थे. 2017 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले सीताराम वर्मा बसपा छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए थे. सीताराम वर्मा सुल्तानपुर जिले के जिला पंचायत अध्यक्ष भी रह चुके हैं.