
उत्तर प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी उम्मीदवारों को विधानसभा का टिकट देने से पहले कई स्तरों पर उनकी जांच परख कर रही है. बीएसपी का टिकट लेने के इच्छुक उम्मीदवारों को एक टेस्ट पास करना होगा.
ये टेस्ट इस बात तो लेकर होगा कि उन्होंने अपने विधानसभा क्षेत्र में क्या काम किया है, जनता से उनका कनेक्ट कैसा है? बीएसपी की नीतियों का प्रचार प्रसार उन्होंने कैसा किया है. इस काम के लिए मायावती ने उम्मीदवारों को 2 महीने का समय दिया है.
बहुजन समाज पार्टी ने विधानसभा उम्मीदवार घोषित करने से पहले अपने प्रत्याशियों को हर विधानसभा क्षेत्र में प्रभारी बनाया है. यहां पर कामकाज करने के लिए उनके पास 2 महीने का समय है.
भावी प्रत्याशी इन दो महीनों में पार्टी का मैनजमेंट लेवल, सोशल मीडिया मैनेजमेंट, अनुसूचित जातियों की स्थिति पर खाका तैयार कर बीएसपी चीफ मायावती को पेश करेंगे. अगर पार्टी अध्यक्ष मायावती की नजर में भावी प्रत्याशियों का 2 महीने का रिकॉर्ड ठीक रहा तो इन्हें ठीक दिया जाएगा. भावी प्रत्याशियों के रिकॉर्ड से अगर मायावती संतुष्ट नहीं हुईं तो इनकी दावेदारी खत्म कर दूसरे नेता को मौका दिया जाएगा.
बीएसपी के टिकटार्थियों को ये भी बताना होगा कि उन्होंने कितने गावों का दौरा किया, कितने बूथ मजबूत किये, लोगों से किस स्तर पर बातचीत की, संगठन को कैसे मजबूत बनाया? इन सभी मुद्दों पर वृहद तैयारी के साथ उम्मीदवारों को मायावती के सामने पेश होना पड़ेगा.
यही नहीं बीएसपी चीफ मायावती भावी कैंडिडेट की सोशल मीडिया पर सक्रियता, बसपा संस्थापक कांशीराम और मायावती के विचारों के प्रचार प्रसार पर भागीदारी का भी आकलन करेगी. बता दें कि उत्तर प्रदेश में अगले साल फरवरी मार्च में विधानसभा के चुनाव प्रस्तावित हैं.