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यूपी में AAP का मुफ्त मॉडल, महंगी बिजली को चुनावी मुद्दा बनाने की जुगत

उत्तर प्रदेश में आम आदमी पार्टी ने आश्वासन दिया है कि यदि उसकी सरकार बनी तो हर परिवार को 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली दी जाएगी. ऐसे में माना जा रहा कि सूबे में मुफ्त और सस्ती बिजली देने का वादा कर दूसरी राजनीतिक पार्टियां भी 2022 के चुनाव में मतदाताओं को रिझाने का दांव चल सकती हैं, क्योंकि यूपी में मंहगी बिजली पहले से ही एक बड़ा मुद्दा बनाने में विपक्ष जुटा है.

अरविंद केजरीवाल और सीएम योगी आदित्यनाथ अरविंद केजरीवाल और सीएम योगी आदित्यनाथ
कुबूल अहमद
  • नई दिल्ली ,
  • 17 सितंबर 2021,
  • अपडेटेड 3:15 PM IST
  • AAP का यूपी में 300 यूनिट फ्री बिजली का वादा
  • यूपी में विपक्ष महंगी बिजली को बना रहा चुनावी मुद्दी
  • मुफ्त बिजली देने से कितना आर्थिक बोझ आएगा?

दिल्ली में मुफ्त बिजली देने की योजना का सियासी फायदा मिलने के बाद आम आदमी पार्टी अब दूसरे राज्यों में भी आजमा रही है. पंजाब, उत्तराखंड, गोवा के बाद अब उत्तर प्रदेश में आम आदमी पार्टी ने आश्वासन दिया है कि यदि उसकी सरकार बनी तो हर परिवार को 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली दी जाएगी. ऐसे में माना जा रहा कि सूबे में मुफ्त और सस्ती बिजली देने का वादा कर दूसरी राजनीतिक पार्टियां भी 2022 के चुनाव में मतदाताओं को रिझाने का दांव चल सकती हैं, क्योंकि यूपी में मंहगी बिजली एक बड़ा मुद्दा बन रहा. 

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AAP का 300 युनिट बिजली फ्री वादा

यूपी में अगले साल होने वाले चुनाव में किस्मत आजमाने उतरी आम आदमी पार्टी दिल्ली के मुफ्त मॉडल के लेकर सियासी बिसात बिछाने में जुट गई है. दिल्ली के उपमुख्यमंत्री और AAP के नेता मनीष सिसोदिया ने गुरुवार को लखनऊ में कहा कि उत्तर प्रदेश में आम आदमी पार्टी की सरकार बनने के 24 घंटे के अंदर हर आदमी को घरेलू उपयोग के लिए 300 यूनिट तक बिजली मुफ्त मिलेगी. 

आम आदमी पार्टी ने यूपी में मुफ्त व सस्ती बिजली देने की पहल करके सियासी एजेंडा सेट करने की कवायद की है. माना जा रहा है कि 2022 के चुनाव को देखते हुए मतदाताओं को रिझाने के लिए यूपी में दूसरी पार्टियां भी बिजली को लेकर बड़ा वादा कर सकती हैं. यूपी में महंगी बिजली से ग्रामीण से लेकर शहरी उपभोक्ता परेशान है. ऐसे में विपक्षी, महंगी बिजली को लेकर योगी सरकार को घेरने में जुटा है.

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यूपी में बिजली बिल का दर 

यूपी में ग्रामीण घरेलू उपभोक्ताओं जिनका कनेक्शन दो किलों वाट का है, उन्हें 50 रुपये फिक्स चार्ज और 100 यूनिट तक के लिए 3.35 रुपये प्रति युनिट की दर से देना होता है. इससे ज्यादा युनिट बढ़ने पर हर पचास यूनिट की प्रति यूनिट का रेट बढ़ता चला जाता है. एक उपभोक्ता को औसत बिल कम से कम हर महीने 500 रुपये देने पड़ जाते हैं. 

वहीं, शहरी उपभोक्ताओं को 100 रुपये फिक्स चार्ज और 100 यूनिट तक को 3.35 रुपये प्रति यूनिट देना पड़ता है जबकि इससे ज्यादा बढ़ने पर करीब 6 रुपये प्रति यूनिट के लिहाज से देना पड़ता है. शहरी उपभोक्ताओं को औसत बिल हजार रुपये आता है. इसके अलावा कॉमर्शियल कनेक्शन वाले उपभोक्ताओं का आठ रुपये प्रति यूनिट के दर से भुगतान करना पड़ा जबकि औद्योगिक कनेक्शन वालों को 12 रुपये यूनिट की दर से देना पड़ता है. 

यूपी में अभी नहीं मिल रही फ्री बिजली

उत्तर प्रदेश में फिलहाल किसी को भी मुफ्त बिजली तो नहीं मिल रही है, लेकिन किसानों और बीपीएल परिवारों को सस्ती दरों पर बिजली दी जा रही है. किसानों को 1.20 रुपये प्रति यूनिट और गरीबों को सौ यूनिट तक बिजली 3.00 रुपये प्रति यूनिट में दे रही है, लेकिन यह एक लिमिट तक है. किसान-गरीब उपभोक्ताओं को छूट के एवज में यूपी सरकार अभी 11 हजार करोड़ रुपये सब्सिडी कंपनियों को दे रही है. 

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सपा भी बिजली पर खेल सकती दांव 

यूपी चुनाव को देखते आम आदमी पार्टी ने मुफ्त बिजली देने का दांव खेल दिया है और सपाबिजली के मुद्दे पर सरकार को तो घेर रहे हैं, लेकिन मुफ्त देने का वादा नहीं किया है. सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि हमने सत्ता में रहते हुए सबसे ज्यादा बिजली के लिए काम किया है और और जब वो सरकार में आएंगे तो गरीबों को, किसान को व्यापारी को सभी को बेहतर बिजली मिलेगी. हालांकि, अखिलेश ने इस बात का खुलासा नहीं किया कि उनके मेनिफेस्टो में बिजली को लेकर क्या घोषणा होगी, लेकिन ये संकेत साफ दे दिए कि बिजली के बहाने जनता को रिझाने में वह भी पीछे नहीं रहेंगे. 

AAP 'मुफ्तखोरी के लालच' दे रही-बीजेपी

यूपी के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने मुफ्त बिजली के ऐलान पर आम आदमी पार्टी को आड़े हाथों लिया है. गुरुवार को शाही ने कहा कि केजरीवाल प्राइवेट लिमिटेड को यह तो मालूम ही है कि यूपी में गरीबों, गांव में रहने वालों और किसानों का योगी सरकार ने कितना ध्यान रखा है. योगी सरकार बिजली का मीटर रखने वाले ग्रामीण उपभोक्ताओं को प्रति यूनिट 2.80 रुपए के और बगैर मीटर वालों को 4.07 रुपए की छूट दे रही है. कृषि मंत्री ने तंज किया कि केजरीवाल के पास यूपी की जनता के लिए विकास का कोई मॉडल नहीं है. यही वजह है कि 'मुफ्तखोरी के लालच' को आम आदमी पार्टी चुनावी हथियार बना रही है, लेकिन सूबे की जनता उनके चाल में फंसने वाली नहीं है. 

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यूपी में फ्री बिजली देना क्या आसान है

यूपी में मुफ्त बिजली वादों को हकीकत में बदलना न बिजली कंपनियों के लिए और न ही किसी भी सरकार के लिए आसान होगाय कारण है कि सूबे की बिजली कंपनियां एक लाख करोड़ रुपये के घाटे में चल रही हैं. ऐसे में केवल किसानों और 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली देने के लिए ही सरकार को अपने खजाने से तकरीबन 35 हजार करोड़ रुपये देने होंगे. इसे अमल में लाने के लिए लगभग 24 हजार करोड़ रुपये और सब्सिडी चाहिए होगी. 

यूपी में  300 यूनिट बिजली 2.50 करोड़ लाइफ लाइन व घरेलू उपभोक्ताओं को मुफ्त में देने के एवज में सरकार पर 22 हजार करोड़ रुपये का वित्तीय भार आएगा. इसी तरह 13 लाख किसानों के ट्यूबवेल को मुफ्त बिजली के लिए 1845 करोड़ रुपये चाहिए होंगे. ऐसे में देखना है कि सूबे की सियासी पिच पर बिजली को लेकर किस तरह का शह-मात का खेल चलता है और आम आदमी पार्टी के एजेंडा सेट करने के बाद कौन-कौन पार्टियां बिजली को लेकर क्या लोकलुभावने वादे करते नजर आते हैं. 

 

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