
उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले की एक विधानसभा सीट है लैंसडाउन विधानसभा सीट. लैंसडाउन विधानसभा क्षेत्र पर्यटन के मानचित्र पर स्थापित नाम है. लैंसडाउन में ही गढ़वाल राइफल रेजिमेंट का मुख्यालय भी है. इसकी वजह से भी लैंसडाउन विधानसभा क्षेत्र की अलग पहचान है. इस विधानसभा क्षेत्र में टिपन टॉप और ताड़केश्वर महादेव जैसे पर्यटन और आस्था से जुड़े स्थल भी हैं.
राजनीतिक पृष्ठभूमि
लैंसडाउन विधानसभा सीट उत्तराखंड की सियासत में महत्वपूर्ण स्थान रखती है. इस विधानसभा सीट के चुनावी अतीत की बात करें तो साल 2012 के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने दिलीप सिंह रावत को चुनाव मैदान में उतारा था. बीजेपी के टिकट पर उतरे दिलीप सिंह रावत ने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी तेजपाल सिंह रावत को पांच हजार वोट से अधिक के अंतर से हरा दिया था.
2017 का जनादेश
लैंसडाउन विधानसभा सीट से 2017 के चुनाव में भी बीजेपी ने अपने निवर्तमान विधायक दिलीप सिंह रावत को चुनाव मैदान में उतारा. बीजेपी के टिकट पर उतरे दिलीप सिंह रावत के सामने इस बार भी तेजपाल सिंह रावत की चुनौती थी. बीजेपी के दिलीप सिंह रावत ने इस दफे पिछले चुनाव की तुलना में अधिक वोट के अंतर से विजय पाई.
सामाजिक ताना-बाना
लैंसडाउन विधानसभा क्षेत्र के सामाजिक समीकरणों की बात करें तो यहां हर जाति-वर्ग के लोग रहते हैं. लैंसडाउन विधानसभा क्षेत्र में राजपूत और ब्राह्मण मतदाताओं की तादाद अधिक है. अन्य पिछड़ा वर्ग के साथ ही पर्वतीय और अनुसूचित जाति जनजाति के मतदाता भी इस विधानसभा सीट का चुनाव परिणाम निर्धारित करने में निर्णायक भूमिका निभाते हैं.
विधायक का रिपोर्ट कार्ड
लैंसडाउन विधानसभा क्षेत्र से विधायक दिलीप सिंह रावत दो बार चुनाव जीते. विधायक का दावा है कि उनके कार्यकाल में इलाके का विकास हुआ है लेकिन विपक्षी नेताओं का दावा है कि इलाके की समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं. लैंसडाउन विधानसभा क्षेत्र के लोगों को पेयजल की किल्लत से जूझना पड़ता है तो साथ ही सड़कों की स्थिति भी बदहाल है. विधायक दिलीप सिंह रावत का निवास कोटद्वार के लालपानी क्षेत्र में है. दिलीप सिंह रावत सिद्धबली धाम के महंत भी हैं.
(रिपोर्ट- विकास वर्मा)