
विक्की कौशल स्टारर फिल्म 'छावा' इन दिनों थिएटर्स में जमकर भीड़ जुटा रही है. बॉलीवुड की सबसे बड़ी फिल्मों में से एक बन चुकी 'छावा' लगातार बॉक्स ऑफिस पर कमाई के नए रिकॉर्ड बना रही है. 13 दिन पहले रिलीज हुई ये फिल्म अब वर्ल्डवाइड बॉक्स ऑफिस पर 500 करोड़ ग्रॉस कलेक्शन का आंकड़ा पार कर चुकी है.
फिल्म में छत्रपति संभाजी का किरदार निभा रहे विक्की कौशल की जमकर तारीफ हो रही है और 'छावा' की धुआंधार कामयाबी को उनके स्टारडम के बढ़ते कद से जोड़ा जा रहा है. लेकिन पर्दे के पीछे, फिल्म के असली हीरो यानी 'छावा' के डायरेक्टर लक्ष्मण उतेकर पर बात किए बिना इस फिल्म की कामयाबी का सेलिब्रेशन अधूरा ही रहेगा. लक्ष्मण का सफर अपने आप में सपने पूरे होने की किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है.
स्क्रीन पर शानदार हीरो उतारने वाला, रियल लाइफ हीरो
श्रीदेवी की फिल्म 'इंग्लिश विंग्लिश' या आलिया भट्ट की 'डियर जिंदगी' देखते हुए आप इन फिल्मों के फ्रेम्स से इम्प्रेस हुए बिना नहीं रह सकते. इन फिल्मों के कई महत्वपूर्ण सीन्स को जानदार बनाने में इन फ्रेम्स की सेटिंग, लाइटिंग और कैमरा का बहुत बड़ा रोल था. कई फ्रेम इतने प्यारे थे कि उन्हें देखते आपका दिल नहीं भरेगा. ये फ्रेम लक्ष्मण उतेकर की देन थे. डायरेक्टर बनने से पहले वो फिल्म इंडस्ट्री के नामी सिनेमेटोग्राफर थे.
लक्ष्मण की फिल्मों के फ्रेम देखकर ये लग सकता है कि उन्होंने किसी बड़े सिनेमा इंस्टिट्यूट से सिनेमा पढ़ाई की होगी. लेकिन लक्ष्मण ने असल में सिनेमा की नहीं, जिंदगी की वो पढ़ाई की है जिसने दुनिया को एक नई नजर से देखने का ज्ञान दे दिया.
लक्ष्मण ने वो चार साल के थे जब उन्हें अपना गांव छोड़कर अपने एक अंकल के साथ रहने के लिए मुंबई आना पड़ा. वो छुट्टियों में गांव वापस जाया करते थे. पढ़ाई में लक्ष्मण का मन नहीं लगता था तो कई छोटे-मोटे काम करने लगे. उन्होंने सबसे पहला काम मुंबई के शिवाजी पार्क में वड़ा पाव बेचने का किया. फिर एक दिन BMC (बॉम्बे म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन) वाले उनका ठेला उठा ले गए. कुछ साल पहले रेडिफ को दिए एक इंटरव्यू में लक्ष्मण ने बताया था कि वो खुद वड़ा पाव बेचने से बोर हो चुके थे इसलिए उन्हें लगा 'अच्छा हुआ.' उन्होंने कहा, 'तब मैं पूरे दिल से वड़ा पाव बनाता था, और वो लोगों को पसंद आता था. अब मैं पूरे दिल से फिल्में बनाता हूं और वो लोगों को पसंद आती हैं.'
किस्मत से मिले मौकों को कसकर पकड़ने की कहानी है लक्ष्मण का सफर
फिर एक दिन लक्ष्मण ने अखबार में एक ऐड देखा, जिसने उनकी तकदीर बदल दी. ऐड ये था कि मुंबई के एक स्टूडियो को स्वीपर यानी सफाई करने वाले की जरूरत थी. लक्ष्मण पहुंच गए और नौकरी शुरू कर दी. उन्हें स्टूडियो की लाइफ और खाना पसंद आने लगा था. एक बार स्टूडियो में कोई कैमरा अटेंडेंट नहीं था और चीफ कैमरामैन खफा हो रहे थे तो स्टूडियो मालिक ने लक्ष्मण की तरफ इशारा करते हुए कहा, 'अरे ये बैठा है, इसे ले जा.' इस तरह वो कैमरा अटेंडेंट बन गए. फिर चीफ कैमरा अटेंडेंट, असिस्टेंट कैमरामैन बनते हुए वो फाइनली कैमरामैन बन गए.
एक बार लक्ष्मण ने डायरेक्टर एंथनी डी'सूजा के लिए एक प्रोमो डायरेक्ट किया था, जिन्होंने उन्हें एक म्यूजिक वीडियो डायरेक्ट करने का मौका दिया. सुभाष घई ने ये म्यूजिक वीडियो देखा और लक्ष्मण को अपने प्रोडक्शन में बन रही फिल्म 'खन्ना एंड अय्यर' शूट करने के लिए बुलाया. इस फिल्म से बतौर डायरेक्टर ऑफ फोटोग्राफी लक्ष्मण का करियर शुरू हो गया. इसके बाद लक्ष्मण को म्यूजिक वीडियो का चांस देने वाले एंथनी ने फिल्म 'ब्लू' शूट करने का मौका दिया. अक्षय कुमार, संजय दत्त, लारा दत्ता जैसे बड़े स्टार्स के साथ बनी ये फिल्म बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप हो गई. लेकिन इसकी सिनेमेटोग्राफी की बहुत चर्चा हुई.
लक्ष्मण बताते हैं, 'लोगों को लगा कि किसी फिरंग (विदेशी) ने 'ब्लू' शूट की है. लेकिन जब उन्होंने क्रेडिट्स में मेरा नाम देखा तो उन्हें ऐसा हुआ कि 'ये कौन खतरनाक आदमी है यार?'' इसके बाद लक्ष्मण को 'इंग्लिश विंग्लिश', 'डियर जिंदगी', 'हिंदी मीडियम' और '102 नॉट आउट' जैसी फिल्में मिलती चली गईं. लेकिन फिर एक वक्त बाद लक्ष्मण को लगा कि सिनेमेटोग्राफी बहुत हो चुकी, कुछ और करना चाहिए. उन्हें ये एहसास था कि वो कहानी अच्छी सुना सकते हैं और इसलिए उन्होंने पहली फिल्म अपनी भाषा मराठी में बनाई क्योंकि वो इस भाषा, संस्कृति और कहानी के फ्लेवर को समझते थे.
मराठी फिल्मों से शुरू किया डायरेक्शन, बनाईं इमोशनल फिल्में
लक्ष्मण की पहली फिल्म 'टपाल' एक बच्चे की कहानी है जो अपने बचपन की दोस्त को एक चिट्ठी लिखता है. लेकिन उसे डर है कि कहीं उसकी चिट्ठी उस लड़की की बजाय किसी और के हाथों में ना पहुंच जाए. वो एक डाकिए की मदद से अपनी चिट्ठी को वापस खोजने चल देता है. उनकी दूसरी मराठी फिल्म 'लालबागची रानी' एक मेंटली चैलेंज्ड लड़की की कहानी है जो मुंबई में खो जाती है. अपनी नजर से वो जिस तरह दुनिया की समस्याओं को देखती है, वो फिल्म में कई इमोशनल और खूबसूरत मोमेंट लेकर आता है.
फिर लक्ष्मण के करियर का बड़ा ब्रेक आया और उन्होंने अपनी पहली हिंदी फिल्म 'लुका छुप्पी' में कार्तिक आर्यन और कृति सेनन को डायरेक्ट किया. ये रोमांटिक कॉमेडी फिल्म जनता को पसंद आई और लक्ष्मण की पहली ही हिंदी फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर 100 करोड़ से ज्यादा ग्रॉस कलेक्शन किया. ये लक्ष्मण के करियर की धमाकेदार शुरुआत थी. इस फिल्म में अपनी एक्ट्रेस कृति के साथ लक्ष्मण ने एक बार फिर से कोलेबोरेट किया और नेटफ्लिक्स पर 'मिमी' लेकर आए. कॉमेडी भरे मोमेंट्स के साथ इस फिल्म की कहानी ने ऑडियंस को इमोशनली बहुत अपील किया. 'मिमी' को दर्शकों के बीच तो जमकर पॉपुलैरिटी मिली ही, साथ ही इस फिल्म को नेशनल अवॉर्ड में नॉमिनेशन भी मिले. कृति सेनन को 'मिमी' के लिए 'बेस्ट एक्ट्रेस' और पंकज त्रिपाठी को 'बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर' का नेशनल अवॉर्ड मिला.
विक्की कौशल के साथ दीं दो बैक टू बैक हिट्स
लक्ष्मण की अगली फिल्म विक्की कौशल और सारा अली खान की फैमिली ड्रामा 'जरा हटके जरा बचके' थी. इस लाइट कॉमेडी से लक्ष्मण ने एक बार फिर जनता को इम्प्रेस किया और इस बार भी उनकी फिल्म ने वर्ल्डवाइड 100 करोड़ से ज्यादा ग्रॉस कलेक्शन किया. इस फिल्म में विक्की के साथ काम करते हुए ही लक्ष्मण ने 'छावा' भी प्लान की और एक बार फिर से अपनी फिल्म में विक्की को कास्ट किया.
'टपाल' से लेकर 'छावा' तक लक्ष्मण की फिल्मों का रिकॉर्ड जबरदस्त रहा है. उनकी फिल्में तारीफ बटोरने के साथ-साथ बॉक्स ऑफिस पर भी कामयाब रही हैं. और 'छावा' से तो वो उन बड़े डायरेक्टर्स की लिस्ट में शामिल हो गए हैं जिन्होंने बॉक्स ऑफिस पर 500 करोड़ कमाने वाली फिल्में दी हैं.
लक्ष्मण की फिल्मों में एक कॉमन चीज है... कहानी के किसी ना किसी मोड़ पर इमोशंस का खेल बहुत नजर आएगा और इन सीन्स को लक्ष्मण ने बड़े करीने से तैयार किया होगा. अपने इंटरव्यू में लक्ष्मण ने बताया कि जिस तरह की जिंदगी उन्होंने जी है, उसे लोग आमतौर पर 'सख्त' कहते हैं लेकिन उन्हें ये मजेदार लगी. इसी लाइफ में उनका सामना ढेर नाजुक इमोशंस से हुआ, इसलिए उन्हें अपनी फिल्मों में इमोशंस एक्सप्रेस करने में कोई दिक्कत नहीं होती.
रियल जिंदगी ने सिखाए सिनेमा के सबक
स्कूल की छुट्टियों में लक्ष्मण जब अपने गांव लौटते तो अपने घर के बाहर बैठकर, आसमान में उड़ते हवाई जहाज देखा करते थे. प्लेन देखकर वो अपनी मां से पूछते थे, 'अगर कोई प्लेन में सुसु करता है, तो नीचे गिरगा क्या?' लक्ष्मण की फिल्म 'मिमी' के अंत में एक बच्चा ऐसा ही सवाल पूछता नजर आया था.
लक्ष्मण ने खर्च चलाने के लिए गणेश विसर्जन से भी कमाई की है. पैसेवाले लोग गणेश विसर्जन के लिए पानी में जाने से डरते थे, तो दूसरों को पैसे देकर अपने गणपति का विसर्जन पानी में करवाते थे. लक्ष्मण ने ये काम किया है. उनकी फिल्म 'लालबागची रानी' में भी इसी तरह का सीन मिलता है. लक्ष्मण के अनुभव उनके कुछ फिल्मी सीन्स में भले उतर आते हों मगर ऐसा नहीं है कि उन्हें फिल्में बनाने का पूरा मोटिवेशन ही अपनी उस लाइफ से मिलता हो जिसे दुनिया 'सख्त' कहती है.
लक्ष्मण का कहना है, 'जब लोग कहते हैं कि ऐसे अनुभवों से उन्हें प्रेरणा मिलती है, तो झूठ कहते हैं! जब आपका पेट खाली हो और आप उसे भरने की कोशिश करते हो शिद्दत से, तो आप सिर्फ उसपर फोकस करते हो. आपको और किसी चीज की प्रेरणा नहीं मिलती. जब पेट भर गया, वड़ा पाव खा लिया, पानी पी लिया तब आप संतुष्ट हो जाते हो.' कामयाबी के शानदार रिकॉर्ड के साथ लक्ष्मण इन दिनों 'छावा' की कामयाबी का स्वाद चख रहे हैं. जनता की नजर अब इस बात पर रहेगी कि 2025 की सबसे बड़ी हिंदी फिल्म डिलीवर करने वाला डायरेक्टर अब नया क्या लेकर आता है.