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'बेटा 3 महीने ICU में था, हफ्ते में एक दिन थी मिलने की इजाजत', दीया मिर्जा का छलका दर्द

बॉलीवुड एक्ट्रेस दीया मिर्जा ने अपनी प्री-मैच्यॉर डिलीवरी का खुलासा करते हुए सोशल मीडिया पर पोस्ट किया था. बता दें, कॉम्प्लीकेशन की वजह से दीया को बेटे अव्यान आजाद की डिलीवरी 6 महीने में ही करनी पड़ी थी.

दीया मिर्जा दीया मिर्जा
नेहा वर्मा
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  • 15 मार्च 2023,
  • अपडेटेड 9:06 AM IST

दीया मिर्जा जल्द ही अनुभव सिन्हा की फिल्म 'भीड़' में नजर आने वाली हैं. लॉकडाउन पर अधारित इस फिल्म में दीया का रोल काफी अहम है. फिल्म में दीया एक मां के किरदार में हैं. मां बनने के बाद वो इस किरदार से खुद को कितना रिलेट कर पाती हैं. इसके साथ ही दीया हमसे लॉकडाउन के दौरान मां बनने के अनुभव को शेयर कर रही हैं. 

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दीया ने भीड़ में अपने रोल पर क्या कहा?

भीड़ से जुड़ने पर दीया कहती हैं, मैं अनुभव सिन्हा को कैसे मना कर सकती हूं. मैं अनुभव सिन्हा के साथ कैश और थप्पड़ में काम कर चुकी हूं. भीड़ के लिए उन्होंने मुझे कॉल कर बस यही कहा कि इस फिल्म में तुम्हारे लिए कुछ ऐसा है, जो तुम्हारी इमेज से बिलकुल अलग है. पता नहीं तुम उसे करोगी या नहीं, पहले तुम स्क्रिप्ट पढ़ लेना फिर बताना. स्क्रिप्ट पढ़ने के बाद मैं बिना किसी सेकेंड थॉट के ही राजी हो गई थी. मैं खुश हूं कि मुझे उन्होंने अपनी इस फिल्म का हिस्सा बनने का मौका दिया है. दर्शक भी जब यह फिल्म देखेंगे, तो उन्हें एहसास होगा कि कन्वेंशनल दीया इसमें बिलकुल भी नहीं है. इस किरदार को करने के बाद यही समझ आया कि यहां कोई भी परफेक्ट नहीं होता है. हर किसी में कुछ न कुछ कमी तो जरूर होती है. 

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मां बनने के बाद वो इस मां के किरदार से खुद को कितना रिलेट कर पा रही हैं. इसके जवाब में दीया कहती हैं, मुझमें हमेशा से मैटरनल इमोशन रहा है. काफी वक्त तक तो मैं मां नहीं बनी थी लेकिन शूटिंग के दौरान भी मेरे इमोशन में कोई कमी नहीं दिखी होगी. मैं उस बच्ची से इमोशनली कनेक्ट भी हो गई थी. हां, बात सही है कि असल जिंदगी में मां बनने के बाद फर्क तो आता है. मुझे याद है जब बेटा 6 महीने का था, तो मैं उसे घर पर छोड़ शूटिंग के लिए बाहर निकली थी. तो मेरा दिल जानता है कि मैंने कितनी हिम्मत जुटाई थी. लाइफ तो बदली है, मेरा बच्चा मेरी जिंदगी की धुरी है. 

 

लॉकडाउन कैसा गुजरा था?

लॉकडाउन पर आधारित इस फिल्म का हिस्सा रहीं दीया से जब हमने जानना चाहा कि उनके लिए लॉकडाउन कैसा गुजरा था. इसके जवाब में दीया अपनी इनसिक्यॉरिटी के बारे में कहती हैं- पहले फेज के दौरान तो मुझे यही एहसास हुआ कि मैं बहुत लकी हूं कि मैं अपनी मां के साथ एक छत के नीचे आराम से रह रही थी. इसी दौरान मैं अपने पति से भी मिली. हमने फर्स्ट लॉकडाउन के दौरान ही शादी भी कर ली थी. उस वक्त तो सबकुछ सही चल रहा था. फिर अगले लॉकडाउन के वक्त मैं मां बनीं. वहां से दिक्कतें समझ आईं.

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मुझे प्रेगनेंसी के दौरान एमआरआई की जरूरत थी और मैं जिस अस्पताल में एडमिट थी, वहां इसकी सुविधा नहीं थी. दरअसल कोविड की वजह से माहौल ऐसा था कि हमें लिमिटेड सुविधाओं में ही सरवाइव करना था. जो आगे चलकर कॉम्प्लीकेशन बना और मुझे 6 महीने में ही अपने बच्चे की डिलीवरी करनी पड़ी थी. मैं उस वक्त खुद को पावरलेस महसूस कर रही थी. अगर उस अस्पताल में एमआरआई मशीन होता, तो शायद मैं नॉर्मल डिलीवरी कर बच्चे को जन्म देती. जब बेटा हुआ, तो उसे आईसीयू में तीन महीने के लिए रखा गया था. मुझे हफ्ते में केवल एक ही दिन उससे मिलने की इजाजत थी. सेकेंड फेज के दौरान मेरे आसपास हर कोई सरवाइव ही तो कर रहा था. सबकी अपनी दिक्कतें थीं, कितनों ने अपनों को खोया था. सबके अपने-अपने गम थे. 

 


 

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