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बॉलीवुड से परेशान अनुराग कश्यप, किया मुंबई छोड़ने का ऐलान, बोले- थक गया हूं...

बॉलीवुड के जाने-माने डायरेक्टर अनुराग कश्यप ने मुंबई छोड़ देने का फैसला कर लिया है. उन्होंने ये खुलासा हाल ही में अपने एक इंटरव्यू में किया है. अनुराग ने कहा है कि उनके अंदर फिल्में बनाने का उत्साह खत्म हो गया है. उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री में रिस्क फैक्टर कम होने और रीमेक बनने को लेकर चिंता जताई जिससे उन्हें कुछ नया करने को नहीं मिल पा रहा. 

अनुराग कश्यप अनुराग कश्यप
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 31 दिसंबर 2024,
  • अपडेटेड 5:52 PM IST

बॉलीवुड के जाने-माने डायरेक्टर अनुराग कश्यप ने मुंबई छोड़ देने का फैसला कर लिया है. उन्होंने ये खुलासा हाल ही में अपने एक इंटरव्यू में किया है. अनुराग ने कहा है कि उनके अंदर फिल्में बनाने का उत्साह खत्म हो गया है. वो इसका कारण एक्टर्स की टैलेंट एजेंसियों को ठहरा रहे हैं. जिन्होंने एक नया चलन शुरू किया है, जिसमें एक्टर्स को एक्टिंग के बजाए स्टार बनने पर जोर दिया जा रहा है. उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री में रिस्क फैक्टर कम होने और रीमेक बनने को लेकर चिंता जताई जिससे उन्हें कुछ नया करने को नहीं मिल पा रहा. 

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मुंबई छोड़कर साउथ शिफ्ट हो रहे अनुराग

अनुराग ने कहा कि आज के समय में मैं बाहर जाकर कोई नई अलग तरह की फिल्म नहीं बना सकता, क्योंकि सबकुछ अब पैसे पर आ गया है. जिसमें मेरे प्रोड्यूसर्स सिर्फ फायदे और मार्जिन के बारे में सोचते हैं. फिल्म शुरू होने से पहले ही सब ये सोचते हैं कि इसे कैसे बेचेंगे. तो वो फिल्म बनाने का मजा अब खत्म हो चुका है. इसलिए मैं अगले साल मुंबई छोड़कर साउथ में शिफ्ट होने जा रहा हूं. मैं वहां जाना चाहता हूं जहां काम करने के लिए सब उत्सुक रहें. वरना मैं एक बूढ़े आदमी की तरह मर जाउंगा. मैं अपनी ही इंडस्ट्री से निराश और परेशान हो गया हूं. मैं परेशान हो गया हूं उनकी सोच से. 

अनुराग ने आगे हिंदी सिनेमा की सोच पर कमेंट करते हुए कहा कि वो 'मंजुम्मेल बॉयज' जैसी फिल्में तबतक नहीं बना सकते जबतक वो इसका रीमेक का बनाएं. उन्होंने कहा, 'वहां की सोच ये है कि वो फिल्म दोबारा से बनाओ जो चल गई. उन्हें कुछ नया नहीं बनाना है.' उन्होंने आगे एक्टर्स की टैलेंट एजेंसियों पर भी निशाना साधा. 

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अनुराग का टैलेंट एजेंसी पर निशाना

अनुराग कहते हैं कि पहली जेनेरेशन के एक्टर्स के साथ काम करना बेहद मुश्किल होता है क्योंकि उन्हें स्टार बनने का शौक है. वो एक्टिंग नहीं करना चाहते. एजेंसियां पहले किसी को भी स्टार नहीं बनाती, लेकिन जिस वक्त वो एक्टर स्टार बनता है वो उससे खूब सारा पैसा लूटती है. उनका काम होता है एक अच्छे टैलेंटेड एक्टर को ढूंढना. 

जब एक फिल्म बनती है, तो वो उस एक्टर को पकड़कर पहले उसे स्टार बनाते हैं. फिर उसके दिमाग में उलटी-सीधी बातें डालते हैं. उन्हें बताते हैं कि आपको एक स्टार बनने के लिए क्या-क्या करना होगा. वो एक्टर्स को वर्कशॉप में नहीं भेजेंगे, लेकिन जिम भेज देंगे वर्कआउट कराने. ये सब अब ग्लैम-ग्लैम ही रह गया है क्योंकि सभी को सबसे बड़ा स्टार बनना है. 

अनुराग ने एक्टर्स के करियर के साथ खिलवाड़ करने का आरोप भी लगाया. उन्होंने बताया कि एक बार एक एक्टर किसी  एजेंसी की बात सुनकर उनकी फिल्म छोड़कर चला गया था, लेकिन बाद में उन्हीं के पास वापस आया क्योंकि उस एजेंसी ने उन्हें धोखा दे दिया था. 

हर एक्टर को चाहि‍ए स्टार ट्रीटमेंट, इस बात से परेशान अनुराग 

अनुराग ने हिंदी सिनेमा में एक्टर्स के अहम और स्टार ट्रीटमेंट पर भी कमेंट किया. उन्होंने इसकी तुलना मलयालम फिल्म इंडस्ट्री से की जहां एक्टर्स अलग होकर नहीं, बल्कि एक साथ आकर एक फिल्म में काम करते हैं जिससे वो फिल्म की खूबसूरती और भी बढ़ जाती है जो हिंदी सिनेमा में नहीं देखने को मिलता. 

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उन्होंने इस स्टार ट्रीटमेंट का जिम्मेदार OTT स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स को ठहराया है. वो कहते हैं कि स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स इस स्टार ट्रीटमेंट को लेकर आए हैं. एक अच्छी फिल्म बनाने के बजाए हम इस बात पर ध्यान देते हैं कि हमें कैसे स्टार की तरह ट्रीट किया जाए. खासकर हिंदी फिल्मों में. स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स आए और उन्हें शायद इंडस्ट्री में अपनी जगह महसूस करानी थी, इसलिए वो अमेरिका के काम करने के तरीके को भी अपने साथ लेकर आए. अब क्या हो रहा है कि सभी को स्टार ट्रीटमेंट चाहिए नहीं तो वो अपमानित महसूस करते हैं जो गलत है. इस इंडस्ट्री की आधी से ज्यादा समस्या ये है कि वो लोग अपमानित महसूस करने लगते हैं. 

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