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1965 जंग के बाद PM लालबहादुर शास्त्री के कहने पर मनोज कुमार ने बनाई थी 'उपकार', ऐसे पड़ा था भारत कुमार नाम

लाल बहादुर शास्त्री ने मनोज को उनके लोकप्रिय नारे 'जय जवान जय किसान' पर एक फिल्म बनाने को कहा था. शास्त्री के कहने पर मनोज कुमार ने 1967 में फिल्म बनाई थी उपकार. देशभक्ति से सराबोर इस फिल्म ने क्रिटिक्स और प्रशंसकों से वाहवाही लूटी. ये ऑल टाइम ब्लॉकबस्टर साबित हुई.

मनोज कुमार मनोज कुमार
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 04 अप्रैल 2025,
  • अपडेटेड 10:46 AM IST

लेजेंडरी एक्टर मनोज कुमार अब हमारे बीच नहीं रहे. मुंबई में उनका निधन हुआ. अपने 4 दशक के फिल्मी करियर में उन्होंने एक से बढ़कर एक फिल्में कीं. लेकिन देशभक्ति पर आधारित फिल्मों ने उन्हें पहचान दिलाई. एक्टिंग के अलावा उन्होंने डायरेक्शन में भी कदम रखा था. उनकी पहली फिल्म उपकार बनाने के पीछे मजेदार किस्सा है. जानते हैं इस रिपोर्ट में.

कैसे बनी थी फिल्म उपकार?
मनोज कुमार के रिलेशन नेताओं से अच्छे थे. 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के बाद एक्टर की मुलाकात पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री से हुई थी. लाल बहादुर शास्त्री ने मनोज को उनके लोकप्रिय नारे 'जय जवान जय किसान' पर एक फिल्म बनाने को कहा था. शास्त्री के कहने पर मनोज कुमार ने 1967 में फिल्म बनाई थी उपकार. देशभक्ति से सराबोर इस फिल्म ने क्रिटिक्स और प्रशंसकों से वाहवाही लूटी. उपकार मूवी उस साल बॉक्स ऑफिस पर सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म थी. ये ऑल टाइम ब्लॉकबस्टर साबित हुई.

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इसका म्यूजिक 1960 के दशक का छठा सबसे ज्यादा बिकने वाला हिंदी फिल्म एल्बम था. उपकार का गाना 'मेरे देश की धरती' आज भी फेमस है. हर साल भारत के गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर इसे बजाया जाता है. इस फिल्म ने कुमार को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार दिलवाया था. मूवी को मनोज कुमार ने ही डायरेक्ट किया था.  ये उनकी डायरेक्टोरियल डेब्यू फिल्म थी. मूवी में मनोज कुमार के अलावा प्रेम चोपड़ा, आशा पारेख, कामिनी कौशल, प्राण भी अहम रोल में थे. इसे 7 फिल्मफेयर अवॉर्ड मिले थे. मनोज कुमार की ये फिल्म तेलुगू में भी रीमेक की गई. इसका नाम Padipantalu  रखा गया.

कैरे हरिकृष्ण से बने थे मनोज 
मनोज कुमार का रियल नाम हरिकृष्ण गिरी गोस्वामी था. ये नाम बदलकर मनोज रखने की कहानी काफी दिलचस्प है. मनोज कुमार को बचपन से फिल्मों का शौक था. हिंदू कॉलेज से बैचलर ऑफ आर्ट्स की डिग्री लेने के बाद उन्होंने फिल्मों में अपना लक आजमाया था. वो दिग्गज एक्टर दिलीप कुमार, अशोक कुमार और कामिनी कौशल के फैन थे. उन्होंने दिलीप कुमार की फिल्म शबनम (1949) में उनके किरदार 'मनोज' से इंप्रेस होकर अपना नाम बदलकर मनोज कुमार रख लिया था. बस तभी से उनका ये नाम लोगों के बीच फेमस हो गया था. 

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कैसे पड़ा था भारत कुमार नाम

फिल्म पूरब और पश्चिम, क्रांति, रोटी कपड़ा और मकान, उपकार में उनका रील नाम भारत कुमार था, सभी फिल्में देशभक्ति से सराबोर थीं. इन मूवीज ने बंपर कमाई की. मनोज कुमार के काम को भी सराहा गया. उनके रोल इस कदर पॉपुलर हुए कि लोग उन्हें 'भारत कुमार' बुलाने लगे. अपने एक पुराने इंटरव्यू में उन्होंने कहा था- ''अक्सर जो अच्छा किरदार होता है, उसका नाम वही रह जाता है. मैंने सोचा कि भारत देश गांवों में बसता है, किसानों का देश है, तो उस किरदार का नाम मैंने 'भारत' रख दिया. हमारे देश की जनता इतनी दयालु है कि अगर उन्हें कोई चीज सच्ची और अच्छी लगती है, तो वे उसे इतना प्यार और इज्जत देते हैं जो दुनिया में कोई नहीं देता. मैं तो एक सीधा-सादा लड़का था, आप लोगों ने मुझे 'भारत' बना दिया.''

 

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