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पैन इंडिया फिल्मों का जायका खराब कर रहे क्लैश, कहां गया 'इंडियन फिल्म इंडस्ट्री' वाला फंडा?

'बाहुबली' की कामयाबी के बाद साउथ की इंडस्ट्रीज और बॉलीवुड में पैन इंडिया फिल्में बनाने का फ़ॉर्मूला बड़ी तेजी से चल निकला. पिछले एक साल में तो जैसे हर बड़ी फिल्म पैन इंडिया रिलीज के साथ ही अनाउंस हुई. इतनी फिल्में पैन इंडिया रिलीज होना चाह रही हैं कि न ऑडियंस के देखने का स्कोप बचा है, न इनके चलने का!

'गणपत' और 'लियो' के पोस्टर 'गणपत' और 'लियो' के पोस्टर
सुबोध मिश्रा
  • नई दिल्ली ,
  • 20 सितंबर 2023,
  • अपडेटेड 4:00 PM IST

इंडियन सिनेमा की सबसे बड़ी फिल्मों में शामिल 'RRR' और 'KGF 2' के मार्केटिंग कैम्पेन से एक बड़ी खूबसूरत चीज निकली थी. यश, जूनियर एनटीआर या राम चरण से जब भी इंडस्ट्रीज में आपसी कॉम्पिटीशन की बात हुई तो इन कद्दावर हीरोज ने कहा कि अब इंडस्ट्रीज अलग-अलग नहीं हैं. इस बात पर खूब जोर दिया गया कि अब कोई बॉलीवुड-टॉलीवुड-कॉलीवुड नहीं है... अब ये 'इंडियन फिल्म इंडस्ट्री' है! 

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ये बात सुनने में जितनी सुंदर लगती है, फिल्म मार्किट में इसके फायदे भी उतने ही हैं. इससे न सिर्फ सभी इंडस्ट्रीज के बेस्ट टैलेंट को एकसाथ आने का मौका मिलता है बल्कि बड़ी फिल्मों के दमदार बिजनेस करने का माहौल भी बनता है. एक दूसरे के लिए ये सम्मान, फिल्मों के बिजनेस पर सबसे बड़ा असर ये दिखाता है कि रिलीज डेट पर क्लैश बच जाते हैं. क्लैश न होने से फिल्मों को स्क्रीन्स पर्याप्त मिलती हैं और मार्किट बड़ा होता है. फिल्में अच्छी हों तो चलना तय है लेकिन कमाई के लिए अच्छा चांस बनाने के लिए ये पहली शुरुआत बहुत मायने रखती है.  

टीम RRR के साथ सलमान खान, करना जौहर (क्रेडिट: सोशल मीडिया)

'RRR' जिस हफ्ते में रिलीज हुई, उसमें बॉलीवुड की तरफ से कोई बड़ी फिल्म नहीं थी. शाहरुख खान ने जब साउथ के पॉपुलर डायरेक्टर एटली और नयनतारा, विजय सेतुपति के साथ काम किया तो बॉलीवुड फिल्म 'जवान' के सामने साउथ की कोई बड़ी फिल्म नहीं थी. तेलुगू इंडस्ट्री से राजामौली, जूनियर एनटीआर-राम चरण जैसे स्टार्स ने 'ब्रह्मास्त्र' को डायरेक्ट-इनडायरेक्ट प्रमोट किया, तो तेलुगू इंडस्ट्री की कोई बड़ी फिल्म इसके साथ क्लैश नहीं हुई. 

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इंडस्ट्रीज के इस कोलेबोरेशन में ऑडियंस का ये फायदा है कि थिएटर्स में एंटरटेनमेंट के लिए अलग-अलग ऑप्शन मिलते हैं और हर फिल्म को एन्जॉय किया जा सकता है. लेकिन पिछले एक साल में इंडस्ट्रीज की ये आपसी अंडरस्टैंडिंग और प्रमोशन जैसे गायब सा हो गया. कभी साउथ की फिल्में उत्तर भारत में, और कभी बॉलीवुड की फिल्में साउथ में इस तरह पहुंचीं कि न फिल्मों को फायदा हुआ और न ऑडियंस को फिल्में एन्जॉय करने का मौका मिला.       

टीम 'ब्रह्मास्त्र' के साथ जूनियर एनटीआर, एसएस राजामौली (क्रेडिट: सोशल मीडिया)

क्लैश और प्रमोशन की कमी में मारी गईं साउथ की फिल्में
रजनीकांत सिर्फ तमिल सुपरस्टार नहीं हैं. 'रोबोट', '2.0' और 'शिवाजी- द बॉस' जैसी उनकी फिल्मों ने हिंदी फिल्मों के मार्किट में भी अच्छी कमाई की. लेकिन उनकी लेटेस्ट फिल्म 'जेलर', इस साल के सबसे बड़े बॉलीवुड क्लैश के बीच रिलीज हुई. जबतक मेकर्स ने इसकी रिलीज डेट, 10 अगस्त अनाउंस की, तबतक  'गदर 2' और 'OMG 2' पहले से 11 अगस्त के लिए शिड्यूल थीं. ऐसे में 'जेलर' को यकीनन उत्तर भारत में बहुत कम ही स्क्रीन्स मिलनी थीं. क्या आप सोच सकते हैं कि रिलीज के दूसरे ही दिन, हिंदी में सुपरस्टार रजनीकांत की फिल्म के शोज मुंबई में 13 और दिल्ली में मात्र 5 थे! 

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रजनीकांत की फिल्म ने इसके बावजूद अपनी लिमिटेड स्क्रीन्स पर 7 करोड़ रुपये से ज्यादा नेट कलेक्शन किया. ओटीटी पर आने के बाद 'जेलर' देखने वाले ये बात कन्फर्म कर सकते हैं कि इस फिल्म की हिंदी डबिंग भी ठीकठाक थी और अगर इसके हिंदी वर्जन को अच्छी रिलीज मिलती तो कमाई और भी बेहतर होती. साथ में ऑडियंस को एक बार फिर रजनीकांत का स्वैग बड़े पर्दे पर देखने को मिलता. 

गदर 2, जेलर, OMG 2 पोस्टर (क्रेडिट: सोशल मीडिया)

भारत के सबसे दमदार फिल्ममेकर्स में से एक मणिरत्नम की 'पोन्नियिन सेल्वन 1' ने पिछले साल हिंदी में अच्छा बिजनेस किया. हिंदी डबिंग वर्जन से फिल्म ने 23 करोड़ रुपये कमाए, जो इसके स्क्रीन काउंट और लिमिटेड रिलीज के हिसाब से बहुत सॉलिड कलेक्शन था. इस साल जब इसका दूसरा पार्ट आया तो मेकर्स ने हिंदी बेल्ट में फिल्म का प्रमोशन बहुत ढीला छोड़ दिया. 'पोन्नियिन सेल्वन 2' जब थिएटर्स में रिलीज हुई, तो इसे लेकर जनता में अवेयरनेस बहुत कम थी. जो पक्के फैन्स खोज-खोजकर फिल्मों की खबर रखते हैं, उन्हें ही इसकी रिलीज के बारे में पता था. 

तेलुगू इंडस्ट्री को इस साल मिली बड़ी हिट्स में से एक 'विरूपाक्ष' को जब ऑरिजिनल वर्जन में कामयाबी मिली, तो मेकर्स ने हिंदी में रिलीज का प्लान बनाया. फिल्म का हिंदी वर्जन, बॉलीवुड की सरप्राइज हिट 'द केरल स्टोरी' की आंधी के बीच रिलीज हुआ. फिल्म का क्या हश्र हुआ, ये अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है. बॉक्स ऑफिस क्लैश फिल्मों के लिए तभी फायदेमंद होता है जब दोनों फिल्मों को स्क्रीन्स मिलें. जब ऐसा होता है तभी जनता को भी थिएटर्स में ऑप्शन मिलते हैं और 'गदर 2' की आंधी के बीच 'OMG 2' भी सुपरहिट हो जाती है.  

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अभी भी जारी है आपस में क्लैश 
बॉलीवुड फिल्म 'जवान' जहां थिएटर्स में धमाल मचा रही है, वहीं साउथ में तमिल फिल्म 'मार्क एंटनी' भी अच्छी कमाई कर रही है. लेकिन क्या आपको पता है कि 'मार्क एंटनी' का हिंदी वर्जन 22 सितंबर को थिएटर्स में रिलीज हो रहा है? शायद न पता हो. और इसमें जनता की कोई गलती नहीं है, मेकर्स ने हिंदी वर्जन के लिए अभी तक कोई प्रमोशन ही नहीं किया.

ये फिल्म उस दिन रिलीज हो रही है, जब बॉलीवुड से विक्की कौशल की 'द ग्रेट इंडियन फैमिली' थिएटर्स में आएगी. तेलुगू फिल्म 'स्कंद' का हिंदी ट्रेलर काफी माहौल बना रहा है, लेकिन इसके मेकर्स ने हिंदी ऑडियंस तक पहुंचना शुरू ही नहीं किया है. जबकि 'स्कंद' अगले ही हफ्ते 28 सितंबर को रिलीज हो रही है और इसका क्लैश 'फुकरे 3', 'द वैक्सीन वॉर' जैसी फिल्मों के साथ है. 

द ग्रेट इंडियन फैमिली, मार्क एंटनी पोस्टर (क्रेडिट: सोशल मीडिया)

टाइगर श्रॉफ की 'गणपत' पैन इंडिया रिलीज के लिए पहले से 20 अक्टूबर को शिड्यूल थी. बाद में इस से ठीक एक दिन पहले, 19 अक्टूबर के लिए थलपति विजय की 'लियो' भी आ पहुंची और ये भी पैन इंडिया है. कमाल ये है कि 'लियो' डायरेक्टर लोकेश कनगराज के यूनिवर्स से आ रही है, जिसमें पिछली फिल्म 'विक्रम' थी. कमल हासन स्टारर 'विक्रम' का हिंदी वर्जन रिलीज करते समय मेकर्स ने कोई खास प्रमोशन नहीं किया था. फिर भी फिल्म ने हिंदी से ठीकठाक कमाई की. बाद में ओटीटी पर आने के बाद हिंदी ऑडियंस में ये एक कल्ट फिल्म बन गई. अगर 'लियो' के लिए मेकर्स मेहनत दिखाएं तो ये हिंदी में अच्छी कमाई कर सकती है. लेकिन क्लैश में नुक्सान होना तो तय ही है. 

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'लियो', 'गणपत' पोस्टर (क्रेडिट: सोशल मीडिया)

हाल ही में मलयालम सुपरस्टार मोहनलाल की पैन इंडिया फिल्म 'Malaikottai Vaaliban' की रिलीज डेट 25 जनवरी 2024 अनाउंस कर दी गई. जबकि ऋतिक रोशन और दीपिका पादुकोण की 'फाइटर' इसी डेट के लिए पहले से शिड्यूल है. रिपोर्ट्स बताई हैं कि इसे भी पैन इंडिया, कई भाषाओं में रिलीज किया जाना है. 

इंडियन सिनेमा के फैन के तौर पर ये सिचुएशन बहुत कन्फ्यूज करने वाली है. सवाल ये है कि अगर मेकर्स को जनता तक फिल्म लेकर जाने में मेहनत ही नहीं करनी, तो प्रोजेक्ट को 'पैन इंडिया' बोलकर अनाउंस ही क्यों करते हैं? शायद खेल ये है कि अपनी घरेलू मार्किट को साध लिया जाए और थोड़ा सा खर्च करके डबिंग के साथ दूसरी मार्किट में भी डाल दिया जाए. इसमें फायदा ये है कि अगर फिल्म चली तो मुनाफ़ा, वरना डबिंग और थोड़े-मोड़े प्रमोशन पर लगा खर्च तो वैसे भी निकल ही आता है. 

लेकिन ये रवैया भारतीय सिनेमा के उन फैन्स के साथ अन्याय है जो हर इंडस्ट्री से आ रही बेस्ट फिल्म देखने के लिए एक्साइटेड होते हैं. देशभर के सिनेमा पर नजर रखने वाला दिल्ली-मुंबई का एक सिने लवर, 'गदर 2' और 'OMG 2' के बीच रजनीकांत की फिल्म देखना चाहे तो भी नहीं देख सकता. क्योंकि पूरे शहर में गिने चुने शोज हैं, उनकी भी टाइमिंग अटपटी मिलेगी. ये उस माहौल के साथ भी अन्याय है जो राजामौली और यश मुंबई या दिल्ली जाकर 'RRR' के लिए बनाते हैं. या फिर शाहरुख खान चेन्नई में इवेंट करके 'जवान' के लिए बनाते हैं!

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अगर पैन इंडिया वाले फंडे को लेकर मेकर्स सीरियस हैं तो उन्हें साथ बैठना होगा और एक 'इंडियन फिल्म इंडस्ट्री' की तरह फंक्शन करना होगा. सबको मिलकर बड़ी फिल्मों का रिलीज कैलेंडर इस तरह तैयार करना होगा कि एक हफ्ते 5 बड़ी फ़िल्में और फिर अगले 5 हफ्ते कोई फिल्म नहीं वाला मामला न हो. इससे दर्शकों को भी ऑप्शन मिलेंगे और फिल्मों को भी थिएटर्स में सांस लेने का मौका मिलेगा.

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