
हॉरर और कॉमेडी फिल्मों के लिए शानदार कमाई लेकर आए इस साल में, ऑनस्क्रीन भूत-प्रेत कम्युनिटी की असली उस्ताद मंजुलिका भी दमदार वापसी करने के लिए तैयार है. हाल ही में कार्तिक आर्यन स्टारर 'भूल भुलैया 3' का ट्रेलर आया जिसमें सबसे बड़ी अट्रेक्शन विद्या बालन उर्फ असली मंजुलिका की वापसी है.
हालांकि, ट्रेलर में साइबर फ्रॉड की तर्ज पर हुए किसी हॉरर फ्रॉड जैसा मसला भी है और माधुरी दीक्षित भी मंजुलिका के रोल में नजर आ रही हैं. 'भूल भुलैया 3' में जहां कार्तिक का किरदार रूह बाबा दो प्रेतात्माओं के कन्फ्यूजन का सॉल्यूशन खोजने में परेशान है, वहीं जनता इस फिल्म से दिवाली के मौके पर थिएटर्स में धमाका करने की उम्मीद लगाए हुए है.
2007 में शुरू हुई 'भूल भुलैया' फ्रैंचाइजी अपनी तीसरी फिल्म तक पहुंच चुकी है. अब जबकि 'भूल भुलैया 3' के ट्रेलर में लोग मंजुलिका नाम की दो भूतनियों के बीच 'तेजा मैं हूं, मार्क इधर है' वाला बवाल देखकर एक्साइटेड हो रहे हैं, तब एक बड़ी लॉजिकल मगर भुला दी गयी बात पर ध्यान जाता है- क्या आपको याद है कि 'भूल भुलैया' के नए सीक्वल जिस मंजुलिका भूतियापे पर टिके हैं, असल में वैसी कोई भूतनी कहानी में है ही नहीं?!
30 साल पहले स्क्रीन पर जन्मी थी 'मंजुलिका' की कहानी
1993 में रिलीज हुई नेशनल अवॉर्ड विनिंग मलयालम फिल्म 'मनिचित्रथालु' को, इंडियन सिनेमा में बनी बेस्ट साइकोलॉजिकल थ्रिलर्स में से एक माना जाता है. आज इंडिया के सबसे टैलेंटेड एक्टर्स में से एक फहाद फाजिल के पिता, फाजिल ने ये फिल्म डायरेक्ट की थी और प्रियदर्शन इस फिल्म में सेकंड यूनिट के डायरेक्टर्स में से एक थे. इस फिल्म को अपने समय से बहुत आगे की फिल्म कहा गया क्योंकि 90s के दौर में ये फिल्म मेंटल हेल्थ कंडीशन 'डिसोसिएटिव आइडेंटिटी डिसऑर्डर' (Dissociative Identity Disorder) की बात कर रही थी.
सैकड़ों साल पुराने महल में एक लड़की गंगा, बहू बनकर आती है और पुरखों के राज में आई नर्तकी, नागवल्ली की कहानियों से खूब प्रभावित होने लगती है. लोगों को लगता कि उस नागवल्ली का भूत महल में लौट आया है. बाद में पता लगता है कि ये तो घर की बहू है, जो खुद को नागवल्ली समझने लगी है और फिर अमेरिका के साइकेट्रिस्ट बनकर उसका इलाज करने आते हैं मलयालम सिनेमा के आइकॉन मोहनलाल. फिल्म में गंगा / नागवल्ली का किरदार निभाने के लिए शोभना को भी नेशनल अवॉर्ड मिला था.
प्रियदर्शन ने इसी कहानी को अक्षय कुमार, विद्या बालन और शाइनी आहूजा के साथ रीमेक किया. इस तरह 14 साल बाद, 2007 में आई 'भूल भुलैया'. इतने लंबे वक्त बाद रीमेक बना तो नाम भी बदले गए. नागवल्ली बनी मंजुलिका और डॉक्टर सनी का नाम बदलकर हो गया डॉक्टर आदित्य. यानी अब 'भूल भुलैया 3' में मंजुलिका का जो मिथ आप देखने जा रहे हैं वो असल में 30 साल से ज्यादा पुराना है. पॉइंट की बात ये है कि पहली फिल्म तक मंजुलिका 'मिथ' ही थी, 'घोस्ट' नहीं. मगर तीसरी फिल्म तक आते-आते इस किरदार के साथ ऐसा वन टू का फोर हुआ है कि मंजुलिका सच में कहीं होती तो उसे चक्कर आ जाते!
मनमोहक मंजुलिका की मेंटल हेल्थ वाली कथा
पहली 'भूल भुलैया' अगर आपको याद हो तो (ना याद हो तो दोबारा देख लीजिए, अच्छा समय है), चतुर्वेदी परिवार के एक पूर्वज महाराज विभूति नारायण के दरबार में मंजुलिका एक राज नर्तकी थी. डॉक्टर आदित्य श्रीवास्तव (अक्षय कुमार) की जुबान में कहें तो 'लम्पट राजा, खूबसूरत मंजुलिका पर लट्टू हो गया और उसके प्रेमी, शशिधर को मरवा दिया.' प्रेम की आग में, प्रेमी की हत्या ने पेट्रोल का काम किया और मंजुलिका ने फांसी लगाकर जान दे दी. मरने से पहले उसने कसम खाई कि राजा से बदला जरूर लेगी. राजा विभूति नारायण की असमय, रहस्यमयी मौत हुई तो लोगों ने दोष मंजुलिका के भूत पर मढ़ दिया. भूतों की सबसे बड़ी खासियत ये है कि वो बड़े जिम्मेदार होते हैं, हर अनहोनी का जिम्मा उनके सर मढ़ा जा सकता है.
'भूल भुलैया' की शुरुआत इसी फंडे से होती है और कैमरा आपको दिखाता है कि कैसे परेश रावल का किरदार खुद अनजाने में एक कुर्सी को हिला देता है, और फिर हिलती कुर्सी को झूला झूलती मंजुलिका मान लेता है. प्रियदर्शन की फिल्म शुरुआत से आपको ये दिखाती चलती है कि कैसे लोग मंजुलिका भूतनी के मिथक का शिकार होते हैं. फिल्म में मंजुलिका के मिथ का सबसे बड़ा शिकार, घर की नई बहू अवनी है. वो अपने बचपन के ट्रॉमा को मंजुलिका की कहने से रिलेट करने लगती है और डिसोसिएटिव आइडेंटिटी डिसऑर्डर का शिकार हो जाती है. वो बंगाली बोलने लगती है, जो उसने कभी सीखी भी नहीं और 'आमी जे तोमार' गाने पर मंजुलिका बनकर नाचने लगती है.
कहानी में होता यही है कि डॉक्टर आदित्य अवनी की इस मेंटल प्रॉब्लम का ट्रीटमेंट करता है. और ऐसा करते हुए फिल्म 'भूत बाधा' समझकर पाखंड और फ्रॉड में फंसे लोगों को, मेंटल हेल्थ और दिमागी बीमारियों के बारे में जागरुक होने का मैसेज देती है. 'भूल भुलैया' की सारी कॉमेडी, मंजुलिका के डर में जी रहे लोगों के बिहेवियर पर टिकी है. जैसे राजपाल यादव के आइकॉनिक किरदार 'छोटे पंडित' को लीजिए.
'भूल भुलैया' में इस किरदार को पहले एक अच्छा विद्वान पंडित दिखाया गया है. मंजुलिका बनी अवनी से सामना होने के बाद उसका मेंटल बैलेंस बिगड़ता है और वो अतरंगी हरकतें करने लगता है. फिल्म के अंत में डॉक्टर आदित्य उसका भी इलाज कर देता है. और यहां फिर से याद कर लीजिए कि इतने बेहतरीन ट्रीटमेंट वाली ये कहानी, 90s के दौर में लिखी गई कहानी है. मगर 2022 में आई 'भूल भुलैया 2' ने इस कहानी का स्टीयरिंग जैसे मोड़ा, वो बताता है कि सीक्वल बनाने का दबाव बॉलीवुड की राइटिंग को कैसे कुचलता है.
न लोक में, न परलोक में... फिर भी मंजुलिका हर जोक में!
'भूल भुलैया 2' की कहानी किसी भी तरह से पहली फिल्म का सीक्वल है ही नहीं. बल्कि ये एक बिल्कुल अलग कहानी है जिसमें 'भूल भुलैया' के बेस्ट मोमेंट्स को रिपीट करके, इसे सीक्वल का नाम दिया गया है. इस बात को समझने के लिए छोटे पंडित से ही शुरू करते हैं... राजपाल यादव के किरदार ने पहली फिल्म में मंजुलिका से सामना होने के बाद जो बौराई हुई हरकतें कीं, दूसरी फिल्म में उन्हीं हरकतों की मिमिक्री से कॉमेडी करता नजर आया. 'भूल भुलैया 2' में इस किरदार का हुलिया, बोली और बर्ताव बिल्कुल ही अलग था.
'भूल भुलैया 2' का हीरो रुहान एक मनमौजी लड़का है जो शौकिया तौर पर झूठ बोलता है. एक दुविधा में फंसी रीत (कियारा अडवाणी) की मदद करने के लिए वो भूतों से बात करने का दावा करके रूह बाबा बन जाता है. फिल्म के क्लाइमेक्स में नजर आता है कि महल की भूतनी अपनी पहचान का खुलासा फाइनली रूह बाबा के सामने ही करती है, जबकि बाकी लोग भी उसे सुन सकते हैं, उससे बात कर सकते हैं.
अगर कहानी नई थी, तो किरदार और उनके बर्ताव नए हो सकते थे, मगर हुए नहीं. क्योंकि मेकर्स शायद ऐसा रिस्क ले नहीं सकते थे और इसलिए नई फिल्म में रुहान के किरदार में बहुत सारी चीजें, पहली फिल्म के हीरो डॉक्टर आदित्य से उधार ली हुई थीं. जैसे- 'भूल भुलैया' में रामनामी चोला पहने आदित्य जिस तरह बुआ जी को ऑटो स्टार्ट होने की आवाज से डराता है. 'भूल भुलैया 2' में रुहान भी इस सीन को दोहराता है. पहली फिल्म का आइकॉनिक टाइटल ट्रैक दूसरी फिल्म में एक थीम की तरह ज्यादा यूज होता है और कार्तिक के किरदार की हरकतों पर औसतन हर 15 मिनट बाद इसे बजा दिया जाता है.
दूसरी फिल्म में बंगाल से राजस्थान आए एक व्यापारी की दो जुड़वां बेटियों की कहानी थी. इनका नाम था- अंजुलिका और मंजुलिका; दोनों किरदार तब्बू ने निभाए. दोनों बहनों ने बचपन में अपने पिता से 'आमी जे तोमार' गाना सीखा था. पहली फिल्म से कहानी का कोई कनेक्शन नहीं है, लेकिन दूसरी फिल्म में भी गाना सेम है- यानी फिल्म का कहना है कि 'आमी जे तोमार' कोई बंगाली लोकगीत है जो हर बंगाली व्यक्ति को आता है! अंजुलिका को 'अच्छी बेटी' माने जाने से नाराज उसकी बहन मंजुलिका काला जादू सीखने लगती है. ये एक और स्टीरियोटाइप है जो बंगाली लोगों के साथ जुड़ा हुआ है और फिल्म इसे ही आगे बढ़ाती है.
क्लाइमेक्स में आपको पता चलता है कि महल की भूतनी अंजुलिका है, जिसे मंजुलिका ने धोखे से मारकर उसकी जगह ले ली थी. लेकिन फिल्म में ये कन्फर्म है कि दोनों बहनों में से एक भूत है. इस भूत को आप फिल्म में हत्या करते भी देखते हैं. ये पहली 'भूल भुलैया' के साथ सबसे बड़ा धोखा था क्योंकि नई कहानी में साइकोलॉजी या मेंटल हेल्थ जैसी बातों को कचरे के ढेर में फेंक देती है. इसमें वो साइंटिफिक लॉजिक नहीं था, जिसने पहली फिल्म को आइकॉनिक बनाया था. बल्कि 'भूल भुलैया 2' में किसी भी तरह का कोई लॉजिक नहीं था. जबकि पहली फिल्म के ह्यूमर में भी लॉजिक था.
'भूल भुलैया' में सारे मजेदार सीन कन्फ्यूजन की वजह से बने थे. लेकिन दूसरी फिल्म का ह्यूमर बड़े पंडित (संजय मिश्रा) के बहरेपन का मजाक बनाने और एक बच्चे को बॉडी शेम करने पर ज्यादा टिका हुआ था. किरदारों को इरादतन बेवकूफाना चीजें करते हुए दिखाने वाले ह्यूमर के लिए बॉलीवुड की बहुत आलोचना होती रही है और 'भूल भुलैया 2' तो इस मामले में एक खजाना है. लेकिन बात यहीं नहीं रुकती. 'भूल भुलैया 3' का ट्रेलर आ चुका है और इसमें फिर से बहुत कुछ ऐसा है जो पिछली दो फिल्मों से कनेक्ट ही नहीं होता दिखता.
नई मंजुलिका की भर्ती
पहली फिल्म की कहानी बनारस में सेट थी. दूसरी की भवानीगढ़, राजस्थान में. और तीसरी किसी फिक्शनल जगह 'रक्त घाट' में बेस्ड है. विद्या बालन मंजुलिका के रोल में लौट आई हैं और फिर से पहली फिल्म वाले अपने किरदार की नकल उतारने की कोशिश कर रही हैं. माधुरी दीक्षित भी मंजुलिका होने का दावा ठोंक रही हैं. और ऐसा लगता है कि मंजुलिका असल में किसी व्यक्ति का नहीं, सरकारी विभाग की पोस्ट का नाम है, जिसपर अब हर नई 'भूल भुलैया' फिल्म में नई भर्ती होगी. और हर बार नया कैंडिडेट पिछली बार से भी ज्यादा फेक बंगाली एक्सेंट के साथ 'आमी मंजुलिका' चिल्लाएगा!
प्रियदर्शन की बनाई 'भूल भुलैया' भले एक रीमेक रही हो, मगर इसने आइकॉनिक किरदार क्रिएट किए थे. जबकि 'भूल भुलैया 2' से इन किरदारों की अपनी कोई कहानी नहीं है, ये बस पहली फिल्म वाले किरदार की ही नकल करते जा रहे हैं. जो मंजुलिका एक मेंटल प्रॉब्लम से पैदा हुई थी और आज के दौर के हिसाब से मेंटल हेल्थ पर एक बढ़िया कन्वर्सेशन क्रिएट कर सकती थी, उसका डिमोशन हो चुका है. अब वो केवल एक प्रेत मात्र रह गई है. अब इस कहानी में डॉक्टर आदित्य को बुलाना बहुत जरूरी हो गया है जो लोगों को मेंटल हेल्थ और साइकोलॉजी के बारे में कुछ बेसिक बातें समझा सके.
फिर भी ऐसा नहीं है कि 'भूल भुलैया 3' बिल्कुल होपलेस केस है. अगर इस फिल्म में मंजुलिका का भूतियापा और रूह बाबा का स्यापा किसी तरह पहली फिल्म से कनेक्शन खोज पाएं, तो शायद ये एक अच्छी फिल्म बन सकती है. हालांकि, फिल्म में क्या है ये तो अब 1 नवंबर को थिएटर्स में ही पता चलेगा जब अनीस बज्मी का ये शाहकार थिएटर्स में रिलीज होगा.