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कंगाल हुए मनोज बाजपेयी की फिल्म 'जोरम' के डायरेक्टर, किराया देने के नहीं पैसे, बोले- बर्बाद हो गया

डायरेक्टर देवाशीष मखीजा ने बताया मूवी जोरम की वजह से वो फाइनेंशियली बर्बाद हुए हैं. इसमें मनोज बाजपेयी लीड हीरो थे. देवाशीष का मानना है पैसों की तंगी के चलते वो इनसिक्योरिटी में जी रहे हैं. वो पिछले 2 दशक से मुंबई में रह रहे हैं लेकिन अभी तक खुद को फाइनेंशियली सिक्योर नहीं कर पाए हैं. 

देवाशीष मखीजा देवाशीष मखीजा
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 08 अगस्त 2024,
  • अपडेटेड 9:40 PM IST

फिल्ममेकर देवाशीष मखीजा ने अपना दर्द बयां किया है. मूवी अज्जी, भोंसले और जोरम जैसी उम्दा मूवीज को डायरेक्ट कर चुके देवाशीष ने बताया उनके लिए फिल्म इंडस्ट्री में खुद को बनाए रखना कितना मुश्किल रहा है. उनकी पहली फीचर फिल्म को रिलीज होने में 14 साल लग गए थे. वो पिछले 2 दशक से मुंबई में रह रहे हैं, लेकिन अभी तक खुद को फाइनेंशियली सिक्योर नहीं कर पाए हैं. 

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डायरेक्टर का छलका दर्द

Long Live Cinema को दिए इंटरव्यू में डायरेक्टर ने कहा- आज भी जब मैं किसी एक्टर को कॉल करता हूं या मिलने बुलाता हूं. वो कहते हैं- तुम्हारा ऑफिस कहां है? मैं बोलता हूं- मेरे पास ऑफिस नहीं है. आप बताओ मुझे कहां आना है. या हम कॉफी शॉप में मिले. मैं आपको बताऊंगा कौन से कॉफी शॉप क्योंकि वर्सोवा के सारे कॉफी शॉप को मैं अफोर्ड नहीं कर सकता. अभी भी मैं जिंदगी के ऐसे फेज पर खड़ा हूं.

मुझे स्टूडियो में मिलने के लिए बुलाते हैं. एग्जीक्यूटिव पूछते हैं मुझे गाड़ी कहां पार्क करनी है? मैं कहता हूं- मेरे पास गाड़ी नहीं है, स्कूटर तक नहीं है. इसलिए वो मुझसे पूछते हैं मैं कैसे आऊंगा. मैं उन्हें कहता हूं पास की लोकेशन होगी तो ऑटो से आऊंगा, दूर होगा तो बस पकड़ूंगा. 20 साल और चार फीचर फिल्में करने के बाद भी मेरे लिए ये चीजें नहीं बदली हैं.

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सालों से झेल रहे आर्थिक तंगी

डायरेक्टर ने बताया उनकी लेटेस्ट रिलीज जोरम की वजह से वो फाइनेंशियली बर्बाद हुए हैं. उनके पास किराया देने को पैसे नहीं हैं. इस इनसिक्योरिटी के साथ वो जी रहे हैं. वो कहते हैं- मैंने ये सोचकर शांति पा ली है कि ये जिंदगी भर के लिए नहीं बदलने वाला है तो मैं क्यों बदलूं. मुझे नहीं पता मैं अगले महीने अपने कुक को फीस दे पाऊंगा या नहीं. ये सभी बातें मेरे दिमाग में घूम रही हैं. मेरी असुरक्षाएं वास्तविक हैं और वे इस हद तक बढ़ गई हैं कि इसके नतीजे कल ही महसूस किए जाएंगे, दो साल बाद नहीं. इसलिए मुझे काम करते रहना है. क्योंकि नहीं पता अलगी बार चेक कहां से मिलेगा.

देवाशीष को नहीं पता उनकी अगली फिल्म क्या होगी. वो कहते हैं- मैं एक साथ 8 कहानियों पर काम कर रहा हू. क्योंकि मुझे नहीं पता कौन सी कहानी को हरी झंडी मिलेगी. डायरेक्टर की मूवी 'जोरम' बुरी तरह पिटी थी. 

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