
राजेश कुमार टेलीविजन इंडस्ट्री का जाना-माना चेहरा रहे हैं. सालों से उन्हें 'साराभाई वर्सेस साराभाई' में रोशेष साराभाई का किरदार निभाने के लिए जाना गया है. रोशेष के किरदार से ही राजेश कुमार को इंडस्ट्री में पहचान मिली थी. लेकिन इसी किरदार की वजह से उन्हें इंडस्ट्री में आगे काम मिलने में दिक्कतें भी आईं. एक वक्त ऐसा भी था जब राजेश ने एक्टिंग छोड़ खेती शुरू कर दी थी. अब अपने लेटेस्ट इंटरव्यू में राजेश कुमार ने जिंदगी के उस दौर के बारे में बात की है.
राजेश ने शुरू की खेती
डिजिटल कमेंट्री से बातचीत के दौरान राजेश कुमार से पूछा गया कि लोग खेती के काम को इतनी नीचे चीज की तरह क्यों देखते हैं? इसपर राजेश ने कहा, 'आपको खुद को देखना पड़ेगा न. मैं कूदा क्यों. अपने करियर की ऊंचाई पर होते हुए, 41 की उम्र में मैं क्यों खेती में गया. बीवी-बच्चा और सबके साथ ही. सीरियल-काम सब चल रहा था, लेकिन मैंने खुद चुना कि नहीं करूंगा. क्योंकि मैंने सोचा कि खेती करना मेरी जिंदगी का बड़ा मकसद है. इससे पैसे आएंगे या नहीं आएंगे उस वक्त ये मोटिव मेरा नहीं था. लेकिन हां, आपके दिमाग में होता है कि जो भी काम आप कर रहे हैं उसको सफल बनाएं ताकि दूसरा आदमी उसको पकड़ सके. बहुत सारे डिजास्टर हुए. मुझे बहुत सारी परीक्षाओं से गुजरना पड़ा. लेकिन वो मेरी जर्नी है.'
मुश्किलों का किया सामना
बाढ़, लॉकडाउन, खेत जलने जैसी दिक्कतों का सामना राजेश कुमार को करना पड़ा था. उन्होंने कहा, 'टेक आ गया उसमें. टेक ने तो बर्बाद ही कर दिया था उसने. मेरा पैसा डूबा. किसानों का तुम सोचो न कि बेचारे नहीं कर पाए तो ट्रेडिंग, क्योंकि वो लोग मुझपर निर्भर थे.'
सिचुएशन को हैंडल करने के बारे में राजेश ने बताया, 'उन लोगों ने समझा सिचुएशन को. वो लोग अपने हिसाब से रास्ता निकालते हैं. घर-बाहर, जहां-जहां से जो भी कॉन्ट्रिब्यूशन था मैं कर रहा था कि भई यहां भेज दो, पुणे में एक आदमी है, अहमदाबाद में भेज दो, वहां एक आदमी है. इस तरह से बातें चल रही थी. अल्टिमेटली हमने उनको एक उम्मीद दिखाई थी कि आप उगाओ, मैं बेचता हूं. यही तो ट्रांजेक्शन था न. मैं यहां पर कंजूमर को एजुकेट करता रहूंगा कि आपका उगाया हुआ ये लोग ज्यादा खाएं. आपको मैं लैब रिपोर्ट दिखाऊंगा मेरी 5-6 सब्जियों का. जितनी सब्जियां हैं, अगर उनका पर्मिशेबल लेवल 30 है कॉपर का या लेड का या किसी का पॉइंट 5 होगा, मेरी सारी सब्जियों में 0.01 है.'
राजेश कुमार से पूछा गया कि फार्मिंग से पहले वो एक्टर थे. उन्होंने कई एक्टर्स के साथ काम किया. क्या कभी उनके किसी साथी कलाकार ने उन्हें कॉल किया और कहां कि ये तुम क्या कर रहे हो. इसपर एक्टर ने जवाब दिया, 'इस पूरी सृष्टि में किसी को फर्क नहीं पड़ता. ये इतना फनी पर्यावरण है न कि अगर कोई मर गया होगा न, तो फेसबुक पर RIP लिखते हैं और सोचते हैं कि वो जो मर गया है वो पढ़ रहा होगा. ये बम्बई का नेचर नहीं ये पूरी इंडिया का नेचर है. फेसबुक पर सिर्फ बम्बई थोड़ी ही है.'
इंडस्ट्री में वापसी के लिए किया ये
राजेश से ये भी पूछा गया कि क्या इंडस्ट्री मुश्किल वक्त में लोगों को सपोर्ट करती है. इसपर एक्टर ने कहा, 'नहीं हो पाता है यार. ये बहुत ही इंडिविजुअल स्ट्रगल है. नहीं करते हैं. मैं अपना ही बताता हूं तुम्हें. कोरोना के बाद जब सारी चीजें हुईं और ये सब डिजास्टर हुआ तो मैं एक्टिंग में वापस आना चाहता था क्योंकि कहीं न कहीं फंड अब खत्म हो चुका था. ऑडिशन वगैरह देता था तो आधी चीजों में इसलिए नहीं होता था तो लोग कहते थे कि सर रोशेष का परसेप्शन कैसे चेंज करें. तो मैंने जिद्द में वजन बढ़ाया और सिर मुंड़वाया. मैंने कहा अब दोगे काम? अब तो पहचान में नहीं आ रहा हूं कि मैं रोशेष हूं.'
वो आगे बोले, 'फिर मुझे बैक टू बैक चार फिल्में मिलीं, तीन-तीन दिन के इंटरवल में. वो थीं 'हड्डी', नवाजुद्दीन (सिद्दीकी) के साथ. नवाजुद्दीन के साथ ही एक और फिल्म है 'रौतू की बेली', वो अभी रिलीज होना बाकी है और पंकज कपूर जी के साथ दिल्ली में है, वो भी अभी रिलीज होना बाकी है. 'तेरी बातों में ऐसा उलझा जिया', इसमें तुम्हारा 'कोटा फैक्ट्री' आया, 'ये मेरी फैमिली आया', एक जो अभी प्रोजेक्ट कर रहा हूं वो. तो ये सब इसलिए हुआ क्योंकि मैंने रोशेष जैसा दिखना बंद कर दिया था.'