
'कौन तुझे यूं चाहेगा' 'गलियां' और 'तेरी मिट्टी' जैसे बेहद पॉपुलर गानों के बोल लिखने वाले मनोज मुंतशिर, बॉलीवुड के पॉपुलर गीतकारों में से एक हैं. शनिवार को मनोज, साहित्य आजतक 2023 के कोलकाता एडिशन के मंच पर थे. 'शब्दयोगी' सेशन में उन्होंने प्रेम, ब्रेकअप और मूव-ऑन कर जाने पर दिल खोलकर बातें कीं. मनोज ने मंच से हिंदी फिल्मों के कई गीतों पर बात की. उन्होंने बताया कि फिल्मों के गीतकारों और साहित्यकारों में क्या फर्क होता है.
फिल्मों में गीत लिखने की बात पर हुआ ब्रेक अप
मनोज से जब पूछा गया कि पहले उनके गीतों में रोमांस ज्यादा होता था, लेकिन अब एक वीर रस झलकता है. आखिर उनके अंदर का वो लवर बॉय कहां चला गया? तो उन्होंने जवाब देते कहा 'लवर बॉय कहीं नहीं गया, वो चली गई!'
मनोज ने मंच से बताया कि उनकी लव स्टोरी में ब्रेकअप का कारण ये था कि वो फिल्मों में गाने लिखना चाहते थे. उन्होंने कहा कि कॉलेज के दिनों में कोई डॉक्टर बनना चाहता था. कोई इंजीनियर, लेकिन जब लड़की ने उनसे पूछा कि वो कॉलेज के बाद क्या करने वाले हैं, तो उन्होंने कह कि 'मैं मुंबई जाऊंगा, फिल्मों में गाने लिखूंगा.' बस इसके बाद सारे फोन कॉल और मैसेज बंद हो गए.
साहित्यकार और फिल्मी कवि का फर्क
मनोज ने बहुत डिटेल में बताया कि फिल्मों का कवि साहित्य के मंच का स्टार कैसे बन गया. उन्होंने कहा कि 'जो चीज एक शायर भारी-भरकम शब्दों में कहता है, गीतकार उसे 'यूजर फ्रेंडली' तरीके से कहता है.' उन्होंने कहा कि 'फिल्मों का गीतकार आपका दिल समझता है, आपकी जबान समझता है.' मनोज ने बताया कि मिर्जा ग़ालिब ने जिस सिचुएशन पर एक मुश्किल सा शेर कहा, उसपर फिल्मी कवि कैसे सादगी से लिख देता है 'तुम बिन जिया जाए कैसे, कैसे जिया जाए तुम बिन.'
मनोज ने इस बात का जवाब भी दिया कि अब उनके प्रेम गीतों में भी वीर रस कैसे आ जाता है. उन्होंने कहा कि उन्होंने प्यार में 'रिजेक्ट होने पर पीएचडी की है' और इसलिए ये कह सकते हैं कि मूव-ऑन कर जाना इतना आसान नहीं होता. महाशिवरात्रि के मौके पर मंच पर पहुंचे मनोज मुंतशिर ने सती के आत्मदाह के बाद भगवान शिव के विरह का उदाहरण देते हुए कहा 'क्या भगवान शिव मूव-ऑन कर गए थे?' भगवान शिव के विरह पर मनोज मुंतशिर ने मंच से एक कविता भी पढ़ी जिसे जनता ने खूब रस लेकर सुना और माहौल ही बदल गया.
मनोज मुंतशिर ने सुनाई भगवान शिव के विरह पर कविता
मनोज ने जो कविता सुनाई वो कुछ इस तरह है:
'आज मेरा प्रेम मुझसे छिन गया
आज तो ज्वालामुखी है क्रोध मेरा
मरघटों का देवता हूं, शिव हूं मैं
आज देखेगा जगत प्रतिशोध मेरा
प्रार्थना करना कि जबतक सृष्टि है
टूट के कोई न रोए प्यार में
रक्त टपका यदि प्रणय की आंख से
तो प्रलय होगी सकल संसार में
खोलता हूं तीसरा मैं नेत्र अपना
मृत्यु तांडव होगा अब सर्वस्व पर
कंठ में जो रोक रखा था युगों से
विश उगल दूंगा वो पूरे विश्व पर
तोड़ दूंगा तारिकाएं मैं गगन की
और धरा का घूमना भी रोक दूंगा
जिस अगन में जल गईं तुम आज प्रियवर
मैं उस अगन में आज ये जग झोंक दूंगा'
मनोज ने कविता खत्म करने के बाद जनता में मौजूद युवाओं से कहा कि अगर कोई उन्हें कहे कि ब्रेकअप के बाद इतनी क्या उदासी, तो वो कहें कि 'हमारे भोलेनाथ भी मूव-ऑन नहीं कर पाए थे.' साहित्य आजतक में मंच पर अपना सेशन खत्म करते हुए मनोज मुंतशिर ने जनता की मांग पर 'तेरी मिट्टी' भी पढ़ा और देश के सैनिकों को सलाम किया.