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60 साल के दो सुपरस्टार... एक ने दी इंडस्ट्री की सबसे बड़ी हिट, एक की फीकी हुई धार

'सिकंदर' की आलोचना करते हुए कई लोग सोशल मीडिया पर सलमान की उम्र को भी टारगेट कर रहे हैं. लेकिन जहां सलमान 59 साल के हैं, वहीं मोहनलाल तो उनसे भी 5 साल बड़े हैं फिर भी उन्होंने अपनी इंडस्ट्री को सबसे बड़ी फिल्म दी है. तो आखिर दोनों सुपरस्टार्स में ऐसा क्या अंतर है?

60 साल के दो सुपरस्टार...इतना अलग क्यों है दोनों का हाल? 60 साल के दो सुपरस्टार...इतना अलग क्यों है दोनों का हाल?
सुबोध मिश्रा
  • नई दिल्ली ,
  • 04 अप्रैल 2025,
  • अपडेटेड 6:10 PM IST

सलमान खान की ईद रिलीज 'सिकंदर' इस हफ्ते फिल्मी दुनिया का सबसे चर्चित मुद्दा रही. लगातार कई सालों से ईद के मौके पर अपनी फिल्म से जनता के लिए सेलेब्रेशन का माहौल बनाने वाले सलमान, एक ऐसी फिल्म लेकर आए जिसने उनके पक्के फैन्स तक को निराश कर दिया. हाल ये है कि सलमान के सोशल मीडिया फैन क्लब ही अब उन्हें अपना रवैया बदलने की सलाह दे रहे हैं. बॉलीवुड में सलमान के फैन्स को सबसे कट्टर फैन माना जाता है और एक फिल्म से उनका इस तरह बागी हो जाना, लोगों को हैरान कर रहा है. 

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बॉलीवुड में सलमान की फिल्म को जैसा रिस्पॉन्स मिला है, उससे ठीक उलट मामला चल रहा है मलयालम सिनेमा के सुपरस्टार मोहनलाल के साथ. मलयालम इंडस्ट्री के आइकॉन मोहनलाल की फिल्म 'एम्पुरान' ईद वाले वीकेंड में ही थिएटर्स में रिलीज हुई. ये फिल्म अब मलयालम इंडस्ट्री की सबसे बड़ी फिल्म बन चुकी है. मलयालम सिनेमा फैन्स 'एम्पुरान' में मोहनलाल के एक्शन पैक रोल की तारीफ करते नहीं थक रहे.

'सिकंदर' में सलमान खान (क्रेडिट: सोशल मीडिया)

'सिकंदर' की आलोचना करते हुए कई लोग सोशल मीडिया पर सलमान की उम्र को भी टारगेट कर रहे हैं. लेकिन जहां सलमान 59 साल के हैं, वहीं मोहनलाल तो उनसे भी 5 साल बड़े हैं फिर भी उन्होंने अपनी इंडस्ट्री को सबसे बड़ी फिल्म दी है. तो आखिर दोनों सुपरस्टार्स में ऐसा क्या अंतर है जो इनकी हालत एक दूसरे से बिल्कुल उल्टी है? 

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पर्दे पर सुपरस्टार के साथ-साथ आम आदमी भी लगते हैं मोहनलाल
मोहनलाल 80s के दूर में मलयालम सिनेमा में आए थे और आजतक वो अपनी इंडस्ट्री के बड़े स्टार हैं. इसका सबसे बड़ा सीक्रेट ये है कि वो लगातार अपने किरदारों में बदलाव की तलाश में रहते हैं. अपनी लेटेस्ट फिल्म 'एम्पुरान' में उन्होंने वैसा ही किरदार निभाया है जो सुपरस्टार का कद रखने वाले एक्टर्स को मिलता है- एक ऐसा हीरो जिसे कोई हरा नहीं सकता. लेकिन उनके इस किरदार के भी दो हिस्से हैं. एक तरफ वो इंटरनेशनल गैंगस्टर हैं और इस शेड में वो किसी भी प्रॉपर स्टार जैसे हैं. दूसरी तरफ वो केरल में अपने आसपास वाले दूसरे इंसानों जैसे आम आदमी भी हैं. वो पावरफुल तो हैं, लेकिन उससे कनेक्ट कर पाना आसान है. 

एक आम आदमी के किरदार में इस आसानी से ढल जाना ही मोहनलाल के करियर की हाईलाइट है. एक साधारण आदमी के किरदार को मोहनलाल अपनी एक्टिंग से अद्भुत बनाते हैं. उनके ऐसे कैरेक्टर ऊपर से देखने में पूरी तरह रियल हैं, मगर उनकी स्पिरिट किसी सुपरहीरो जैसी है. इसका एक उदाहरण मोहनलाल की ऑरिजिनल 'दृश्यम' भी है, जो कई भाषाओं में रीमेक की जा चुकी है. ये वैरायटी मोहनलाल को दर्शकों का फेवरेट बनाए रखती है. वो एक तरफ अगर अपने स्टारडम के दम पर चलने वाले हीरो टाइप किरदार करते हैं, तो दूसरी तरफ ऐसे किरदार भी करते हैं जो रियल लाइफ से निकले हुए लगते हैं.

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दर्शकों से डिसकनेक्ट होने वाले किरदार निभाते सलमान
अगर सलमान खान को देखें तो पिछली कई फिल्मों से उनके साधारण आदमी वाले किरदार भी ऐसे पेश किए जाते हैं कि वो रियल नहीं लगते. 'सुल्तान' (2016) शायद सलमान की वो आखिरी फिल्म है जिसमें उनका किरदार नौकरी कर रहा था और उसे घर परिवार की चिंता थी. उसका बैकग्राउंड ऐसा था जैसा आम लोगों का होता है. यही वजह थी कि इस किरदार में लोगों को सलमान की एक्टिंग भी देखने को मिली थी. 

एक तरफ 'सुल्तान' के सारे पर्सनल स्ट्रगल और इमोशनल जर्नी के साथ, सलमान दूसरी तरफ 'टाइगर जिंदा है' (2017) में स्पाई एजेंट भी बन सकते थे. थोड़ा और पीछे जाएं तो 'बजरंगी भाईजान' में सलमान एक भोंदू टाइप पहलवान होते हुए, सिर्फ इमोशनल वजह से एक बच्ची को उसके परिवार से मिलवाने के लिए पाकिस्तान चले गए थे. 'दबंग' (2010) में उनका किरदार सिर्फ एक सुपरकॉप नहीं था, वो दूसरी तरफ पर्सनल लाइफ में अपनी पहचान को लेकर बहुत स्ट्रगल कर रहा था. ऐसे किरदारों की कहानियों में जनता को हीरो से इमोशनल कनेक्शन महसूस होता है. इसीलिए थिएटर में बैठे दर्शक उसका सपोर्ट चाहते हैं और उसे जीवन में जीतता हुआ देखना चाहते हैं. 

यही इमोशनल वजहें धीरे-धीरे सलमान के किरदारों से गायब होती गईं. 'रेस 3', 'किसी का भाई किसी की जान या फिर सलमान की ताजा रिलीज 'सिकंदर' में ये इमोशनल कनेक्शन ही मिसिंग था. ये सारे ऐसे प्रोजेक्ट हैं जो सलमान को पर्दे पर टिपिकल, किसी से ना हारने वाला हीरो दिखाने पर फोकस करते हैं. और ये एंगल अब दर्शकों के बीच पुराना होता जा रहा है. अगर हीरो बनना है तो हीरो का रोमांस करना भी जरूरी है, इस थ्योरी से भी सलमान की फिल्में बाहर नहीं निकल पा रहीं. जबकि मोहनलाल आखिरी बार कब पर्दे पर रोमांटिक एंगल प्ले करते दिखे थे, ये उनके फैन्स को याद भी नहीं है. 

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डायरेक्टर के आगे समर्पण
मोहन लाल और सलमान की तुलना करने पर एक और बहुत बड़ा अंतर मिलता है. मोहनलाल के बारे में ये बात मशहूर है कि वो डायरेक्टर के विजन के आगे पूरी तरह सरेंडर कर देते हैं. वो नए डायरेक्टर्स के साथ काम करने से नहीं चूकते और नए किरदारों में नजर आना पसंद करते हैं. मोहनलाल अपने सुपरस्टारडम को नहीं, बल्कि कहानी को पूरे दम के साथ पेश करने में यकीन रखते हैं. 

जबकि दूसरी तरफ सलमान के बारे में ये बात मशहूर है कि उनके पास अपने किरदार को लेकर खुद बहुत आईडिया होते हैं जिन्हें वो स्क्रिप्ट में शामिल करवाना चाहते हैं. सलमान की पिछली कई फिल्में एक तयशुदा फॉर्मूले पर चलती नजर आती हैं, जिसका सारा टारगेट उन्हें कभी न झुकने वाला हीरो दिखाना है. सलमान ने एक लंबे समय से किसी ऐसे डायरेक्टर के साथ काम नहीं किया है जिसका नाम फिल्म लवर्स में बड़ी इज्जत के साथ लिया जाता हो. 

'भारत' और 'सुल्तान' बनाने वाले अली अब्बास जफर के साथ सलमान ने लंबे समय से काम नहीं किया है. 'एक था टाइगर' और 'बजरंगी भाईजान' बनाने वाले कबीर खान के साथ काम किए सलमान को एक दशक हो चुका है. हर तरह से वो एक बने-बनाए पैटर्न पर काम कर रहे हैं जो दर्शकों के इंटरेस्ट से ज्यादा, उनके अपने कम्फर्ट को ऊपर रखता है. और अब ये बात सिर्फ आम सिनेमा दर्शकों को ही नहीं, खुद सलमान के फैन्स को भी बोर करने लगी है. 

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सलमान अब फैन्स को सरप्राइज करने में चूक रहे हैं और यही उनके लिए सबसे बड़ी दिक्कत है. जबकि दूसरी तरफ मलयालम इंडस्ट्री में मोहनलाल अभी भी अपनी फिल्म चॉइस से दर्शकों को हैरान करने में कामयाब हो रहे हैं. अगर 'सिकंदर' को मिले रिस्पॉन्स से सलमान को असर पड़ता है, तो उन्हें सबसे पहले अपने फैन्स को सरप्राइज करने वाली कहानियों पर काम करना चाहिए. 

एक ऐसी कहानी जिसमें उनका किरदार शुरू से हीरो ना हो, लोगों के बीच का आदमी हो मगर अपने काम से वो जनता का हीरो बन जाए. एक ऐसा किरदार जिसकी इमोशनल जर्नी हो और वो जनता को अपील करे ना कि सलमान को एक बार फिर से इसी टैगलाइन के साथ पेश कर कि इस हीरो को कोई हरा नहीं सकता. क्योंकि अब बॉलीवुड का ये सुपरस्टार अपने ही फैन्स के आगे कमजोर पड़ रहा है. 

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