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नेपोटिज्म पर बोले साकिब- विराट-अनुष्का का बच्चा एक्टर या क्रिकेटर नहीं बन सकता?

साकिब बोले- कल को अगर मेरा बेटा एक्टर बनना चाहेगा तो क्या मैं उसे एक्टर नहीं बनाऊंगा? अगर मेरा बेटा या बेटी अच्छे आर्टिस्ट हैं और वे क्राफ्ट सीखने के बाद आकर मुझसे कहते है कि वे एक्टिंग को लेकर गंभीर हैं, तो क्या मैं उन्हें एक्टर न बनाऊं? यानि  विराट कोहली और अनुष्का शर्मा का बच्चा एक्टर या क्रिकेटर नहीं बन सकता है?

साकिब सलीम सोर्स इंस्टाग्राम साकिब सलीम सोर्स इंस्टाग्राम
aajtak.in
  • नई दिल्ली ,
  • 20 अक्टूबर 2020,
  • अपडेटेड 9:02 PM IST

पिछले कुछ सालों में नेपोटिज्म को लेकर बॉलीवुड में बहस तेज हुई है और सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद ये बहस और तीखी हुई है. कई फैंस ऐसे भी हैं जो स्टारकिड्स की फिल्मों को सपोर्ट ना करने के पक्ष में हैं वही इनसाइडर्स और आउटसाइडर्स जैसे मुद्दे भी सुशांत के मौत के बाद सामने आए हैं. हाल ही में एक्टर साकिब सलीम ने इन मुद्दों पर बात की.  

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नेपोटिज्म को लेकर साकिब ने जूम डिजिटल के साथ बातचीत में कहा कि कल को अगर मेरा बेटा एक्टर बनना चाहेगा तो क्या मैं उसे एक्टर नहीं बनाऊंगा? अगर मेरा बेटा या बेटी अच्छे आर्टिस्ट हैं और वे क्राफ्ट सीखने के बाद आकर मुझसे कहते है कि वे एक्टिंग को लेकर गंभीर हैं, तो क्या मैं उन्हें एक्टर न बनाऊं? यानि  विराट कोहली और अनुष्का शर्मा का बच्चा एक्टर या क्रिकेटर नहीं बन सकता है?

उन्होंने आगे कहा कि मुझे लगता है कि हम एक ऐसे दौर में हैं जहां लोगों का फैसले पर इस मुद्दे को छोड़ देना चाहिए. आप स्टार किड्स को दोषी ठहरा सकते हैं लेकिन आप उनकी फिल्में देखने भी जाते हैं. और आपको देखनी भी चाहिए. लेकिन इसके बाद स्टारकिड्स पर आरोप मत लगाइए. वे भी काम ही करना चाहते हैं. अगर कल को शाहरुख खान का बेटा लॉन्च होता है तो बहुत सारे लोग उसकी फिल्म को देखने के लिए जाएंगे. तो अगर ऐसा है तो इस चीज को नॉर्मल मानिए क्योंकि ऐसा हर बिजनेस में होता है. 

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मुझे नहीं पड़ता इनसाइडर-आउटसाइडर्स जैसी डिबेट से फर्क: साकिब

साकिब ने अपने करियर के बारे में बात करते हुए कहा- मैं इस इंडस्ट्री में मेहनत से पहुंचा हूं और मैं लगातार कड़ी मेहनत करना चाहता हूं. मुझे फर्क नहीं पड़ता कि सामने वाला शख्स क्या और कैसे कर रहा है. मेरे पास जो भी है. मैं उससे संतुष्ट हूं. मैं इनसाइडर-आउटसाइडर डिबेट में भी विश्वास नहीं रखता हूं. मुझे लगता है कि लोग उन लोगों के साथ काम करना चाहते हैं जिनके साथ वे कंफर्टेबल हैं और इसमें किसी भी तरह की कोई बुराई नहीं है. 


 

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