
एक्ट्रेस अदा शर्मा की पिछले साल आई फिल्म, 'द केरला स्टोरी' सबसे बड़ी सरप्राइज हिट्स में से एक मानी जाती है. करीब 30 करोड़ के बजट में बनी बताई जा रही इस फिल्म ने वर्ल्डवाइड 300 करोड़ रुपये से ज्यादा ग्रॉस कलेक्शन किया था. अब अदा अपनी नई फिल्म 'बस्तर: द नक्सल स्टोरी' लेकर थिएटर्स में आने वाली हैं.
'बस्तर' में सिर्फ अदा ही नहीं, बल्कि टीम भी 'द केरला स्टोरी' वाली ही है. फिल्म को सुदिप्तो से ने डायरेक्ट किया है और प्रोड्यूसर विपुल अमृतलाल शाह भी फिर से उनके साथ हैं. ये पूरा कॉम्बो एक बहुत बड़ी हिट देकर आ रहा है और यकीनन अपनी पिछली कामयाबी को दोहराना चाहेगा. मगर बड़ा सवाल ये है कि क्या ऐसा हो पाएगा?
पॉलिटिक्स बिगड़ सकती है 'बस्तर' का खेल
'बस्तर' जैसी फिल्मों के साथ एक प्लस पॉइंट ये होता है कि इनका नैरेटिव पॉलिटिक्स में किसी न किसी पक्ष को सूट करने वाला होता है. ऐसे में फिल्म को एक माहौल भी मिल जाता है. मगर यही माइनस पॉइंट भी है कि आजकल फिल्मों में पॉलिटिक्स काफी उतरने लगी है और ये जनता के लिए बोरिंग हो सकता है.
'बस्तर' के ट्रेलर में अदा का किरदार और डायलॉग, नक्सलवाद की समस्या से ज्यादा इसे लेकर होने वाली पॉलिटिक्स पर फोकस कर रहे थे. ऊपर से फिल्म का नैरेटिव सिर्फ फिल्म की इमोशनल कहानी, उसके कनफ्लिक्ट और ट्रीटमेंट पर फोकस करने से ज्यादा एक स्टेटमेंट डिलीवर करता नजर आ रहा था. ट्रेलर में बस्तर के गांव में लोगों पर नक्सलियों के जुल्म की कहानी को इमोशनल तरीके से दिखाने पर फोकस कम किया गया. यही वजह है कि 'बस्तर' के लिए जनता का उत्साह उस लेवल का नहीं नजर आ रहा जैसा 'द केरला स्टोरी' को लेकर था.
'द केरला स्टोरी' का नैरेटिव पॉलिटिकल तो था, मगर फिल्म उसे सोशल समस्या और लड़कियों के भविष्य की चिंता के एंगल से डिलीवर कर रही थी. 'लव जिहाद', 'स्लीपर सेल' 'ISIS' फिल्म की कहानी के केंद्र में थे और ये सब सोशल मीडिया पर पिछले कुछ सालों से चल रहीं सतत बहसों का हिस्सा है. इसलिए जनता को 'द केरला स्टोरी' में एक चीज तो ऐसी मिली थी जो कनेक्ट कर रही हो, भले उसकी पॉलिटिक्स कुछ भी हो. 'बस्तर' नक्सलवाद की समस्या पर है जो इस समय चर्चाओं या खबरों में भी बहुत नहीं आ रहा.
पॉपुलर फिल्मों के बीच फंसने का खतरा
'द केरला स्टोरी' की रिलीज टाइमिंग ने उसे बहुत फायदा पहुंचाया था. अदा की फिल्म 5 मई को रिलीज हुई थी. थिएटर्स में इससे पहले चल रही बड़ी फिल्म, 21 अप्रैल को आई सलमान खान की 'किसी का भाई किसी की जान' थी, जो खुद बहुत खास बिजनेस नहीं कर पाई थी.
जबकि 'द केरला स्टोरी' के बाद थिएटर्स में चली अगली बड़ी फिल्म विक्की कौशल की 'जरा हटके जरा बचके' थी, जो 2 जून को रिलीज हुई थी. यानी अदा की फिल्म को थिएटर्स में जमकर कमाने के लिए ऑलमोस्ट एक महीने का पूरा समय मिला था.
लेकिन 'बस्तर' के साथ समस्या ये है कि इसके साथ ही सिद्धार्थ मल्होत्रा की फिल्म 'योद्धा' भी क्लैश हो रही है. जहां अदा की फिल्म को 1200 से 1500 स्क्रीन्स मिलने की रिपोर्ट्स हैं, वहीं 'योद्धा' को 2500 के करीब. ऊपर से थिएटर्स में अजय देवगन की 'शैतान' का भी सिर्फ दूसरे ही हफ्ते में होगी, जो लगातार दर्शकों को अपील कर रही है. फरवरी की रिलीज, यामी गौतम स्टारर 'आर्टिकल 370' भी वीकेंड में मजबूत होती दिखेगी.
ऐसे में 'बस्तर' को, 'द केरला स्टोरी' की तरह खाली मैदान का फायदा नहीं मिलने वाला. हालांकि अगर ये फिल्म चल निकली, तो 10 अप्रैल को आ रही अक्षय कुमार-टाइगर स्टारर 'बड़े मियां छोटे मियां' से पहले तक इसे भी कमाई का चांस मिलेगा. मगर इतना तय है कि 'बस्तर' थिएटर्स में, 'द केरला स्टोरी' वाला जादू शायद न दोहरा पाए.