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स्वानंद किरकिरे ने बताया अपना अधूरा ख़्वाब, पॉपुलर एक्टर-सिंगर ने कहा 'जो करने निकला बस वही नहीं कर पाया'

स्वानंद किरकिरे को लोगों ने पहले लिरिक्स लिखने के कारण पहचाना, इसके बाद उन्होंने 'तू किसी रेल सी गुजरती है' भी गाया और बाद में एक्टिंग भी की. लेकिन उनका जो करने के लिए वो अपने घर इंदौर से निकले थे बस वही नहीं कर पाए. साहित्य आजतक 2022 में पहुंचे स्वानंद किरकिरे ने ये ख्वाब भी बताया और गीतों से भी समां बांधा.

साहित्य आजतक 2022 में स्वानंद किरकिरे साहित्य आजतक 2022 में स्वानंद किरकिरे
aajtak.in
  • नई दिल्ली ,
  • 19 नवंबर 2022,
  • अपडेटेड 8:57 PM IST

'मसान' फिल्म में स्वानंद किरकिरे का गाया 'तू किसी रेल सी गुजरती है' ऐसा पॉपुलर हुआ कि फिर उन्हें गाने के ऑफर खूब मिलने लगे. लेकिन इससे पहले 2009 में '3 इडियट्स' का उनका लिखा गाना 'बहती हवा सा था वो' बहुत चला था. लेकिन उन्हें फिल्मों में सिर्फ इन्हीं दो डिपार्टमेंट में क्रेडिट नहीं मिला है, बल्कि उन्होंने कई फिल्मों और शोज में एक्टिंग भी की है. 

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मगर स्वानंद का एक सपना है, जिसे लेकर वो अपने घर से चले थे और अभी तक नहीं पूरा कर पाए हैं. साहित्य आजतक 2022 के मंच पर उन्होंने अपने इस अधूरे सपने के बारे में बताया. स्वानंद ने इवेंट में  पहुंचे लोगों को अपने बेहतरीन गाने सुनाकर भी उनका दिल जीता. 

फिल्में बनाने के लिए घर से दिल्ली आए थे स्वानंद किरकिरे
स्वानंद से पूछा गया कि उनके पास टैलेंट तो कई हैं, मगर वो क्या करना सबसे ज्यादा एन्जॉय करते हैं? तो उन्होंने कहा, 'इस सवाल का जवाब मैं ढूंढ रहा हूं अभी. मैं उन चंद खुशनसीब लोगों में से हूं जिन्हें इतना सबकुछ करने का मौका मिला है. मैंने कभी किसी से नहीं कहा कि मुझे एक्टिंग करनी है या मुझसे एक्टिंग करवाओ. लोगों ने कहा कि तुम ट्राई करो एक्टिंग, मैंने की और आगे काम मिलता गया. लिरिक्स राइटर भी शायद मैं नहीं बनना चाहता था, लेकिन किसी ने कहा तुम ट्राई करो. मैंने ट्राई किया और हुआ. गायक तो मैं बनना ही नहीं चाहता था. लेकिन देखिए आप ये बड़ी मजेदार बात है कि जो काम मैं सबसे कम करना चाहता था, उसी की वजह से मुझे नाम मिला.'

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उन्होंने आगे बताया, 'मैं इंदौर से निकला, दिल्ली आया. दिल्ली से मुंबई आया, दिल्ली में मैं राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय से पढ़ा. दिल्ली के लिए मैंने जब ट्रेन पकड़ी थी तो मैंने सोचा था वाहन पहुंच कर फ़िल्में बनाऊंगा. और शायद वही काम मैं आजतक कर नहीं पाया हूं. वो काम जब मैं कर लूंगा तब बताऊंगा कि मैं क्या करना ज्यादा पसंद करता हूं.'

ओटीटी बनाम फिल्म थिएटर्स 
आजकल ओटीटी पर काफी एक्टिव चल रहे स्वानंद ने फिल्मों को ओटीटी से मिल रहे तगड़े कॉम्पिटीशन पर भी बात की. उन्होंने कहा, 'स्वानंद ने कहा कि पहले फ़िल्में देखकर लोगों को लगा कि थिएटर खत्म हो जाएगा. फिर बाद के समय में जब टीवी आया तो लोगों को लगा कि शायद सिनेमा खत्म हो जाएगा. अब ऐसे ही ओटीटी के आने पर लोगों को लग रहा है. लेकिन हर मीडियम का अपना एक रंग है'. 

स्वानंद किरकिरे ने मंच से 'तू किसी रेल सी गुजरती है' और 'ओ री चिरैया' जैसे बेहतरीन नगमे भी गाए. उनका पूरा सेशन आप इस वीडियो में देख सकते हैं:

 

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