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मलयालम फिल्म इंडस्ट्री को लेकर आई हेमा कमिटी के रिपोर्ट ने हर इंडस्ट्री को शॉक में डाल दिया है. एक्ट्रेस स्वरा भास्कर ने भी इस पर अपना ओपिनियन शेयर किया है. स्वरा के मुताबिक शोबिज वर्ल्ड में ऐसा होना कोई नई बात नहीं है. ये हमेशा से ही एक पितृसत्तात्मक सोच वाला रहा है. हिंदी फिल्म इंडस्ट्री से स्वरा पहली हैं जिन्होंने इस पर बात की है.
हेमा कमिटी की रिपोर्ट से स्वरा हुईं परेशान
स्वरा ने अपने इंस्टाग्राम पर अपना ओपिनियन शेयर किया और बताया कि वो अपने ये विचार हेमा कमिटी की 233 पेज की रिपोर्ट को पढ़ने के बाद दे रही हैं. स्वरा ने लिखा- क्या भारत में बाकी भाषाओं की इंडस्ट्री भी ऐसी बातों के बारे में बात कर रहे हैं? जब तक हम उन असहज सच्चाइयों का सामना नहीं करते, जो हम सभी जानते हैं कि हमारे चारों ओर मौजूद हैं, तब तक सत्ता वाले लोग इसका गलत इस्तेमाल करते रहेंगे. इसका खामियाजा उन लोगों को भुगतना पड़ेगा जो कमजोर हैं. कमिटी की रिपोर्ट को पढ़ना दिल दहला देने वाला है. और भी ज्यादा दिल दहला देने वाला इसलिए क्योंकि ये जाना पहचाना है. शायद हर डिटेल और हर बारीकी नहीं, लेकिन महिलाओं ने जो गवाही दी है, उसकी बड़ी तस्वीर सभी को बहुत अच्छे से पता है.
''शोबिज हमेशा से एक मेल डॉमिनेटिंग इंडस्ट्री रही है, एक पितृसत्तात्मक पावर सेट-अप. ये एक धारणा और सोच है जो बहुत संवेदनशील और जोखिम से भरा हुआ भी है. प्रोडक्शन-शूट के हर दिन, बल्कि प्री और पोस्ट प्रोडक्शन के दिन भी ऐसे दिन होते हैं जब मीटर चलता रहता है और पैसा खर्च होता है. कोई भी रुकावट पसंद नहीं करता. भले ही रुकावट डालने वाले ने एथिकल तरीके से ही सही बात के लिए अपनी आवाज उठाई हो. सबको लगता है बस चलते रहना ज्यादा सुविधाजनक और फाइनेंशियली सही है.''
फिल्म मेकर्स को मिलता है देवी देवताओं का दर्जा
हालांकि डिटेल्ड रिपोर्ट 19 अगस्त को जारी की गई थी, लेकिन यौन उत्पीड़न और लैंगिक असमानता के मुद्दों पर रिसर्च करने के लिए केरल सरकार ने पैनल का गठन 2017 में किया था. स्वरा ने इस बात पर रोशनी डालते हुए कहा कि फिल्म इंडस्ट्री में चुप्पी की परंपरा है और इसकी सराहना भी की जाती है. इतना ही नहीं इसे पूजा तक जाता है, अवॉर्ड दिए जाते हैं.
''शोबिज सिर्फ पैट्रियार्कल नहीं है, बल्कि ये डॉमिनेटिंग भी है. सक्सेसफुल एक्टर, डायरेक्टर और प्रोड्यूसर को देवताओं का दर्जा दिया जाता है और वो जो कुछ भी करते हैं, उसे अनदेखा कर दिया जाता है. अगर वो कुछ ऐसा करें जो आपको पसंद नहीं, तो आस-पास के सभी लोगों के लिए ये बेहद कॉमन हो जाता है. और नजरें फेर लेने को कहा जाता है. अगर कोई बहुत ज्यादा शोर मचाता है और किसी मुद्दे को नहीं छोड़ता, तो उसे 'ट्रबल मेकर' करार दिया जाता है और उसे अपने एक्साइटेड बिवेहियर का खामियाजा भुगतने के लिए छोड़ दिया जाता है."
इसी के साथ स्वरा ने WCC के मेंबर्स की सराहना की और कहा कि ''ये दुनिया भर में हर जगह होता है. इस तरह से शोबिज में यौन उत्पीड़न को सामान्य बना दिया जाता है और इस तरह से एक हिंसक माहौल को 'ऐसे ही चलता है' करार कर दिया जाता है. तो उनपर हल्ला क्यों बोला जाए जो नए हैं और बने बनाए ढांचे में काम करने को तैयार हो जाते हैं. जो महिलाओं के कंडीशन्स बनाते हैं, जहां उनके पास कोई और ऑप्शन नहीं बचता. आप (WCC) हीरो हैं और आप वो काम कर रही हैं जो ऊपर पदों पर बैठे लोगों को पहले ही कर लेना चाहिए था. आपके लिए खूब सम्मान है.