
कार्तिक आर्यन स्टारर फिल्म 'चंदू चैंपियन' सिनेमाघरों में छाई हुई है. इस फिल्म में कार्तिक ने भारत के पहले पैरालिम्पिक गोल्ड मेडलिस्ट रहे मुरलीकांत पेटकर का किरदार निभाया है. मुरलीकांत के रोल में कार्तिक आर्यन ने अपने करियर की बेस्ट परफॉरमेंस में से एक दी है. इस फिल्म के एक सीन में रतन खत्री को भी दिखाया गया है. सीन में मुरली की मटके (लॉटरी) में पैसे डालते हैं. इसके बाद रतन खत्री आकर जीते के नंबरों का ऐलान करते हैं और मुरली हजारों रुपये जीत जाते हैं. इसके बाद मुरली और रतन की मुलाकात होती है.
कौन थे रतन खत्री?
हाल ही में अमेजन प्राइम वीडियो ने 'मटका किंग' नाम की सीरीज का ऐलान किया था. इस फिल्म में रतन खत्री की जिंदगी की कहानी को दिखाया जाने वाला है. अपनी एक्टिंग, लगन और अलग अंदाज में काम करने के लिए फेमस एक्टर विजय वर्मा, 'मटका किंग' में लीड रोल निभा रहे हैं. फिल्म का पोस्टर भी रिलीज कर दिया गया था, जिसमें विजय रेट्रो लुक में नजर आए. ऐसे में हम आपको बता रहे हैं कि आखिर रतन खत्री कौन थे और कैसे बने वो 'मटका किंग'.
रिपोर्ट्स के मुताबिक, रतन खत्री भारत में सट्टेबाजी की शुरुआत कर उसे ऊंचाई पर ले जाने वाले माने जाते हैं. खत्री सिंधी परिवार से थे. 1947 में भारत विभाजन के बाद खत्री पाकिस्तान से भारत आए. जिंदगी में आगे चलकर उन्हें मटका किंग के नाम से जाना गया था. 1962 में मुंबई में सट्टेबाजी का नया तरीका शुरू हुआ था, जिसे मटका कहा जाता था. रतन खत्री ने इसे एक बड़े रैकेट में तब्दील किया. खत्री देश में दशकों तक चलने वाले गैम्बलिंग नेटवर्क की स्थापना की थी.
शुरुआती दौर में रतन खत्री ने कल्याणजी भगत के लिए काम किया, जो कि वर्ली मटका के लिए फेमस थे. तब उन्हें मटका किंग कहा जाता था. उन्होंने जल्द ही रतन मटका के साथ इंडिपेंडेंट काम शुरू किया. माना जाता था कि दुनियाभर के मशहूर सेलिब्रिटी और प्रतिष्ठित लोगों उनके क्लाइंट थे. भारत में लगी इमरजेंसी के दौरान खत्री को जेल हो गई थी. उन्होंने 19 महीने तक सलाखों के पीछे खाते. 1990 के दशक में उन्होंने सट्टेबाजी के बिजनेस से सन्यास ले लिया था. साल 2020 में उनका निधन हो गया था.
सीरीज में क्या होगा खास?
मटका गैम्बलिंग के शुरुआती दौर में न्यूयॉर्क कॉटन एक्सचेंज से लेकर बॉम्बे कॉटन एक्सचेंज तक कपास (रुई) के ओपनिंग और क्लोजिंग दामों पर सट्टे लगाए जाते थे. 1960 के दशक में इस सिस्टम में बदलाव हुआ और बिना सोचे समझे निकाले गए नंबर और मटके से पर्चियां निकालने का सिस्टम शुरू किया गया. रतन खत्री को मटके का रिजल्ट ताश के पत्तों की मदद से बताने के लिए जाना जाता था.
सीरीज 'मटका किंग' के मेकर्स के अनुसार, ये 1960 के दशक के मुंबई में काल्पनिक कहानी होगी. जहां एक नया कपास व्यापारी, जो इज्जत और वैधता का भूख है, मटका नाम के नए गैम्बलिंग गेम की शुरुआत करता है. इस सीरीज की कहानी को डायरेक्टर नागराज मंजुले और अभय कोरान ने लिखा है. नागराज मंजुले ही इसके डायरेक्टर हैं. सीरीज में विजय वर्मा के साथ कृतिका कामरा, गुलशन ग्रोवर और सिद्धार्थ जाधव अहम रोल्स में दिखेंगे. गार्गी कुलकर्णी, आशीष आर्यन, नागराज मंजुले, अश्विनी सिधवानी और सिद्धार्थ रॉय कपूर इसके प्रोड्यूसर हैं.