
एक विलेन कब बड़ा बनता है? पूरे यूनिवर्स की जनसंख्या को एक झटके में आधा करने चले थानोस से भी थिएटर्स में बैठी जनता रिलेट करने लगी थी. कारण ये था कि वो इस नरसंहार को 'रैंडम' और बिना पैशन' के कर रहा था. उसे लग रहा था कि यूनिवर्स को सही से फंक्शन करने के लिए किसी को तो ऐसा करने की बहुत जरुरत है. उसके इस लॉजिक के साथ 'एंड गेम' देख रहा एक दर्शक तुरंत कनेक्ट कर जाता है, और यहां थानोस, सिनेमा के सबसे बड़े विलेन्स में से एक बनाता है.
'एनिमल' में रणबीर के लीड किरदार का पूरा यूनिवर्स उसके पापा हैं. वो अपने पापा को बचाने के लिए, पूरी दुनिया तक खत्म करने को तैयार रहता है. मगर उसकी हिंसा में बहुत 'पैशन' है. उसे देखकर लगता है कि वो एक मिशन पर है, हर बार वो सिर्फ हिंसा नहीं कर रहा, बल्कि जैसे डेड बॉडी के साथ बाकी दुश्मनों के लिए एक मैसेज छोड़ रहा है. वो अपने पापा पर हमला करने वालों को खत्म तो कर देना चाहता है, लेकिन एक हद के बाद लगता है कि मारना उसका टारगेट है ही नहीं.
उसे हिंसा में स्वाद आ रहा है. वो सिर्फ सामने वाले का खून नहीं बहाता, उसकी हर हत्या बर्बरता की एक पेंटिंग है, जो वो अपने पिता को गिफ्ट कर रहा है! उसके सिर्फ एक्ट में पाशवता नहीं है, वो पशु है. ये 'एनिमल' है, जिसे डायरेक्टर संदीप रेड्डी वांगा ने बड़े पर्दे पर क्रिएट किया है. हिंसा के पैशन के मामले में ये हीरो, कई विलेन्स से भी भयानक है. अगर आपको लगता है कि आप फिल्म के हीरो में ये देख सकते हैं, तो 'एनिमल' आपके लिए ही है.
हिंसा का पालतू जीव है ये 'एनिमल'
फिल्म की कहानी रणबीर के बचपन से शुरू होती है, जहां वो पापा के प्यार के लिए तरसता हुआ बच्चा है. उसकी जवानी भी इसी वेलिडेशन की भूखी है. वो बचपन से ही तय किए चल रहा है कि 'पापा के लिए प्यार' को वो उस लेवल पर ले जाएगा जो किसी ने सोचा भी नहीं होगा. वो इस खूंखार मिशन पर है और उसके जीवन में बाकी सबकुछ इस मिशन का 'पैरेलल डैमेज'. फिल्म का टोन देखकर कहीं कहीं ये भी लगता है कि संदीप का ध्यान ये दिखाने पर भी है कि वेलिडेशन की भूख कितना कुछ डैमेज कर सकती है. ऐसा है या नहीं, ये आप फिल्म देखकर तय करें.
संदीप इस किरदार के ट्रीटमेंट में एक बहुत कमाल की चीज लेकर आए हैं. पापा पर कुर्बान इस बेटे का नाम इंटरवल से पहले तक रिवील ही नहीं होता. सब उसे बलबीर सिंह (अनिल कपूर) का बेटा बुलाते रहते हैं. नाम क्या है, ये भी फिल्म में देखना बेहतर होगा क्योंकि इस नाम को रिवील करने के लिए संदीप ने एक बहुत शानदार इंटरवल ब्लॉक तैयार किया है.
स्कूल में पढ़ने वाला ये लड़का, कॉलेज में पढ़ रही अपनी बहन को प्रोटेक्ट करने के लिए जो करता है वहीं से साफ हो जाता है कि उसके रंग क्या हैं. कोई हैरानी नहीं होती जब अनिल कपूर अपनी पत्नी को बोलते हैं, 'हमने क्रिमिनल पैदा किया है'. इस लड़के की लव स्टोरी भी बहुत अनोखी है. गीतांजलि (रश्मिका मंदाना) उसे बचपन से भैया बोलती आ रही है. लड़के ने उसे पहली बार देखा ही उसकी एंगेजमेंट के दिन है. फिर भी प्रपोज ऐसे करता है कि आप हंस पड़ेंगे. हालांकि, उसका लॉजिक घटिया भी लगता है. प्रपोजल में हेल्दी बच्चे पैदा करने की क्षमता पर बात करने के बाद भी गीतांजलि अपनी पहली एंगेजमेंट तोड़कर, इनसे शादी के लिए तैयार हो जाती है.
पापा से नफरत ही पा रहा बलबीर सिंह का बेटा, अमेरिका चला जाता है. पापा पर हमले की खबर देखकर 'स्वास्तिक स्टील्स' का वारिस वापस लौटता है और वादा करता है कि जिसने हमला किया है उसका गला अपने हाथ से काटेगा. मेन कहानी इतनी ही है, मगर संदीप बीच-बीच में आपका ध्यान इस लड़के की मानसिकता पर दिलाते रहते हैं. उसका बर्ताव दिखाने वाले कई सीन्स मिलते हैं, जो परिवार, शादी, सेक्स, अंडरवियर के फैब्रिक जैसे विविध विषयों पर उनके 'एनिमल' के विचार दर्शाते हैं! इनमें कुछ मोमेंट तो मजेदार हैं और आपको हंसी आएगी. लेकिन कुछ इतने अजीब हैं कि शायद आप दांत पीसकर रह जाएं!
3 घंटे 21 मिनट लंबी फिल्म में फर्स्ट हाफ लगभग दो घंटे लंबा है. लेकिन संदीप ने यहां अपने किरदारों को डेवलप करने में पूरा वक्त लिया है. बलबीर सिंह की सोच का खाका यहीं तैयार होता है. ट्रेलर में मजेदार लग रहे एक्शन ब्लॉक्स का बड़ा हिस्सा इसी हिस्से में खर्च हो जाता है. सेकंड हाफ इसके मुकाबले लंबा लगता है और फैमिली ड्रामा यहां ज्यादा नजर आता है.
बॉबी देओल की एंट्री सेकंड हाफ में है. वो अबरार के किरदार में हैं, जो बलबीर सिंह को खत्म कर देना चाहता है. जब हीरो की मर्दानगी ही फिल्म में इतनी भयानक है, तो विलेन कैसा होगा, ये बॉबी की एंट्री पर पता चल जाता है. दो शादियां और 8 बच्चे के बाद अबरार तीसरी शादी करते हुए फिल्म में एंट्री लेता है. लेकिन एंट्री सीक्वेंस के बाद बॉबी सीधा फाइनल फाइट में मिलते हैं. इस बीच का हिस्सा फिल्म में लंबा महसूस होता है.
बलबीर सिंह का बेटा यहां एक्स्ट्रा-मैरिटल अफेयर करता दिखता है. यहां उसपर जासूसी करवाने का एक गैर जरूरी सब-प्लॉट भी है. सेकंड हाफ में बहुत कुछ ऐसा है जिसपर संदीप, जो फिल्म के एडिटर भी हैं, थोड़ी और कैंची चला सकते थे. लेकिन लंबे रनटाइम के बाद भी 'एनिमल' एक ऐसी फिल्म लगती है जो इन सीनों मसाला और एक्शन का हाई डोज खोज रहे दर्शकों को एंटरटेन करेगी. लेकिन फिल्म के पोस्ट-एनालिसिस में संदीप को 'एनिमल' के लिए भी बहुत कुछ सुनने को मिलने वाला है!
रणबीर की सॉलिड एक्टिंग
रणबीर कपूर ने जिस 'एनिमल' के विजन में खुद को सरेंडर किया है, वो देखने लायक है. उन्हें इस तरह के हिंसक रोल में सोच पाना लगबग नामुमकिन है, मगर स्क्रीन पर उन्हें देखने के बाद आपको लगेगा कि किसी डायरेक्टर ने पहले ऐसा क्यों नहीं ट्राई किया. उनके एक्सप्रेशन, आंखें, बॉडी लैंग्वेज सबकुछ इस किरदार को उतना ही भयानक बनाते हैं जितना शायद स्क्रिप्ट लिखते हुए संदीप ने सोचा होगा. 'एनिमल' को रणबीर के करियर की सबसे बेहतरीन परफॉरमेंस भी कहा जा सकता है.
रश्मिका मंदाना ने जिस तरह शब्द चबा-चबा कर अपने डायलॉग बोले हैं, उससे कहीं-कहीं पर उनकी बात समझने पर एक्स्ट्रा जोर देना पड़ता है. मगर ओवरऑल उनकी परफॉरमेंस भी बहुत सॉलिड है. कुछ सीन्स में जहां उन्हें रणबीर की पत्नी के रोल में, उनपर दम दिखाना होता है, वहां उनका काम चमकता है. वैसे ये भी एक नोट करने वाली बात है कि गीतांजलि का किरदार संदीप ने उतना कमजोर नहीं लिखा है, जितना कबीर सिंह में प्रीति का था. अनिल कपूर को अपने किरदार के हिसाब से बहुत सधे हुए रिएक्शन देने थे और इस काम में उनका अनुभव पूरा काम आता है. लेकिन एंड के सीक्वेंस में जब उन्हें खुलने का मौका मिलता है तो रणबीर के साथ उन्हें देखकर मजा आता है.
फिल्म में बॉबी देओल का किरदार बोल नहीं सकता. लेकिन इस लिमिटेशन को बॉबी ने अपनी ताकत में बदला है और उन्हें देखना एक तगड़ा एक्सपीरियंस है. हालांकि उनका स्क्रीन टाइम फिल्म में थोड़ा और ज्यादा होता तो जनता और एन्जॉय करती. सपोर्टिंग किरदार भी फिल्म की कहानी में पूरा योगदान देते नजर आते हैं. तृप्ति डिमरी का छोटा सा रोल, बड़ा असर छोड़कर जाता है और उनका काम याद रहने वाला है.
'एनिमल' के म्यूजिक की पहले भी खूब तारीफ हो चुकी है. इसके साथ-साथ फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर बहुत कमाल का है और सीन्स को बखूबी सूट करता है. रणबीर और रश्मिका के पहले सीन में 'रोजा' फिल्म का टाइटल ट्रैक यूज करने का आईडिया जिसका भी था, बहुत कमाल का था.
कुल मिलाकर 'एनिमल' उस वादे को तो पूरा करती है जो संदीप रेड्डी ने अपने दर्शकों से ट्रेलर के जरिए किया था. धीमे सेकंड हाफ से फिल्म की लंबाई थोड़ी खिंची हुई लगती है, मगर इस तरह का विस्फोटक-वायलेंट एक्शन देखने जाने वालों के लिए फिल्म एक तगड़ी ट्रीट है. हालांकि, संदीप रेड्डी वांगा के किरदारों का इस बार भी तगड़ा एक्स-रे होगा और इनके बर्ताव को स्कैनर में डाला जाएगा. मगर इससे ये फैक्ट नहीं फीका पड़ता कि संदीप ने एक बड़े पर्दे पर एक सॉलिड मसाला एंटरटेनर डिलीवर की है जो बॉक्स ऑफिस पर बहुत धमाके करेगी.