
रानी कश्यप कहती है बेस्ट क्राइम उपन्यासकार दिनेश पंडित छोटे-छोटे शहरों में बड़े-बड़े कत्ल करवा देते हैं. कत्ल तो जरूर होता है पर वजह प्यार है या बेवफाई, इसका तो जवाब वही दे सकते हैं.
तापसी पन्नू की फिल्म हसीन दिलरुबा का इंतजार खत्म हुआ. नेटफिल्स पर 2 जुलाई को रिलीज हसीन दिलरुबा जबरदस्त रोमांच और सस्पेंस से भरपूर है. कहानी के अंत तक लगता है जैसे आप किसी उपन्यास को पर्दे पर देख रहे हैं. निर्देशक विनील मैथ्यू ने हसीन दिलरुबा की कहानी को बेहद नाप-तौल कर परोसा है जिसका हर एक सीन सस्पेंस से पर्दा उठाती है. आइए जानें कैसी रही विक्रांत मैसी और हर्षवर्धन राणे की हसीन दिलरुबा जिसपर कत्ल का इल्जाम लगा है.
कहानी कुछ ऐसी है
रानी कश्यप (तापसी पन्नू) को देखने लड़के वाले यानी रिशू सक्सेना (विक्रांत मैसी) आते हैं. पहली बार में ही रिशू को रानी से प्यार हो जाता है. वह उसके साथ प्यार के, रोमांस के सपने देखने लगता है. अब रानी ठहरी दिल्ली की और रिशू हरिद्वार के ज्वालापुर का. रिशू एकदम गाय की तरह है सीधा. वहीं रानी है तेज-तर्रार, मॉर्डन, बबली टाइप लड़की. रिशू की मां पहले तो उसकी शादी के पीछे हाथ धोकर पड़ी थी पर अब रानी से शादी ना करने के लिए वह बेटे को सुसाइड तक की धमकी दे देती है. खैर, जब लड़का-लड़की राजी तो क्या करेगा काजी. शादी होती है और मॉर्डन ख्यालातों वाली रानी पति से प्यार और रोमांस की उम्मीद करती है. बेचारा रिशू रानी की खूबसूरती के आगे इतना नर्वस रहता है कि उससे कुछ नहीं हो पाता. रानी रिशू को रिझाने की पूरी कोशिश करती है रिशू भी अपनी मर्दानगी दिखाने का टोटका सीखने लगता है. पर रानी को सिर्फ निराशा हाथ लगती है.
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एक दिन रिशू के घर उसका मौसेरा भाई नील (हर्षवर्धन राणे) आता है. लंबा-चौड़ा, कसरत करने वाला, स्मार्ट एंड गुड लुकिंग नील को देख रानी का दिल फिसलने लगता है. नील भी भाभी रानी की उम्मीद को हवा देने लगता है. एक दिन मौका पाकर रानी और नील मिलते हैं और फिर रानी रिशू को भूल अपनी मर्यादा लांघ जाती है.
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सबकुछ होने के बाद नील रानी को बिना कुछ बताए वहां से चला जाता है. रानी को दुख होता है और वह रिशू को सारा सच बता देती है. अब तक इन बातों से अनजान रिशू जो को बड़ा धक्का लगता है. रानी को अपनी करनी पर पछतावा होता है वहीं रिशू पर गुस्से का ऐसा भूत सवार होता है कि वह रानी को चोट पहुंचाने में कोई कसर नहीं छोड़ता है. खैर, रानी की लाख माफी मांगने के बाद आखिरकार रिशू उसे माफ कर देता है और दोनों के बीच सब धीरे-धीरे ठीक होने लगता है.
रानी और रिशू की पटरी पर लौटी शादीशुदा जिंदगी में एक दिन फिर नील यूटर्न बनकर वापस आ जाता है. फिर घर में धमाका होता है और रिशू का कटा हुआ हाथ जिसमें उसने रानी का नाम गुदवाया था, वो घटनास्थल से मिलता है. पुलिस को शक है कि रानी ने ही अपने लवर के साथ मिलकर पति का कत्ल किया है. जबकि रानी लाय डिटेक्टर टेस्ट में भी रिशू के मर्डर के आरोप को झूठा साबित कर देती है. अगर रानी सच कह रही है तो फिर रिशू की मौत कैसे हुई है. जैसा कि शुरुआत में ही बताया फिल्म के अंत तक सस्पेंस बरकरार है.
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बेहतरीन रही तापसी-विक्रांत की ऑनस्क्रीन केमिस्ट्री
तापसी पन्नू जो कि फिल्म की मुख्य किरदार हैं, उनकी एक्टिंग तारीफ करने को मजबूर कर देगी. लेकिन कुछ जगहों पर लगता है कि मॉर्डन एंड बोल्ड रानी दुखी रानी के कैरेक्टर पर भारी पड़ गई. वहीं विक्रांत मैसी ने एक बार फिर अपने सधे हुए अभिनय का प्रमाण दिया है. एक सीधे सादे इंसान से पागलपन की हद तक प्यार करने वाले आशिक के कैरेक्टर को विक्रांत ने शानदार तरीके से घुमाया है. हर्षवर्धन राणे ने भी अच्छा काम किया है. आते हैं सीआईडी के दया उर्फ एक्टर आदित्य श्रीवास्तव पर जिन्होंने फिल्म में इंस्पेक्टर किशोर रावत का रोल प्ले किया है. सख्त लहजे वाले कैरेक्टर को आदित्य ने इस बार ह्यूमर का तड़का दिया है. उनके अलावा आशीष वर्मा (रिशू का दोस्त), यामिनी दास (रिशू की मां) और दयाशंकर पांडे (रिशू के पापा) की एक्टिंग भी दिल जीत लेगी.
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बैकग्रांड स्कोर
मर्डर मिस्ट्री हसीन दिलरुबा के हर सीन के पीछे एक बैकग्रांउड म्यूजिक चलती है. कभी सस्पेंस तो कभी उदासी कभी रोमांस तो कभी दुख, फिल्म के इन सभी एंगल्स पर इसका बैकग्राउंड स्कोर एडवांटेज रहा. लिरिक्स और मोमेंट से मैच करते गाने भी बेहतरीन रहे.
कातिल का अंदाजा लगाते रह जाएंगे
फिल्म की पटकथा को निर्देशक विनील मैथ्यू ने बहुत ही सुलझे हुए तरीके से बुना है.फिल्म की कहानी, स्क्रीनप्ले और डायलॉग्स कनिका ढिल्लों ने लिखी है. हर एक सीन कसा हुआ है. फिल्म की एक और खासियत इसकी पंचलाइन्स रही. प्यार के शहद में लिपटे ये लाइन्स सुनकर याद ही हो जाने हैं. जैसे जैसे फिल्म आगे बढ़ती है रोमांच और बढ़ता है. आप आखिर तक कातिल का अंदाजा लगाते रह जाएंगे.