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Review: आलिया की दिशाहीन सड़क, सस्पेंस के नाम पर कुछ नहीं!

सुशांत की मौत के बाद बॉलीवुड में नेपोटिज्म की डिबेट छिड़ गई. उस डिबेट का सबसे पहला शिकार आलिया की फिल्म सड़क 2 रही जिसके ट्रेलर ने डिसलाइक का नया रिकॉर्ड बना डाला. खैर अब आज रिव्यू करते समय हम उन पहलुओं पर ध्यान नहीं देंगे, बस फिल्म की बात करेंगे.

सड़क 2 पोस्टर सड़क 2 पोस्टर
सुधांशु माहेश्वरी
  • नई दिल्ली,
  • 29 अगस्त 2020,
  • अपडेटेड 2:55 PM IST
फिल्म:सड़क 2
1.5/5
  • कलाकार : आलिया भट्ट, आदित्य रॉय कपूर, संजय दत्त
  • निर्देशक :महेश भट्ट

21 साल बाद महेश भट्ट कोई फिल्म डायरेक्ट करने जा रहे थे. 21 साल बाद फिर उनकी फिल्ममेकिंग देखने का मौका मिलना था. उनका अंदाज, उनकी कहानी फिर दर्शकों को बांधने को तैयार थी. जब सड़क 2 के बारे में घोषणा हुई थी तब ये सब ख्याल मन में आए थे. फिल्म में आलिया भट्ट का होना भी एक्साइटमेंट बढ़ा रहा था, आखिर उन्होंने कम समय में इतनी हिट फिल्में दीं. लेकिन फिर 14 जून के बाद सब बदल गया. सुशांत की मौत के बाद बॉलीवुड में नेपोटिज्म की डिबेट छिड़ गई. उस डिबेट का सबसे पहला शिकार आलिया की फिल्म सड़क 2 रही जिसके ट्रेलर ने डिसलाइक का नया रिकॉर्ड बना डाला. खैर अब आज रिव्यू करते समय हम उन पहलुओं पर ध्यान नहीं देंगे, बस फिल्म की बात करेंगे.

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कहानी

1991 में महेश भट्ट की फिल्म सड़क रिलीज हुई थी. रवि ( संजय दत्त) और पूजा ( पूजा भट्ट) की प्रेम कहानी सभी ने देखी. अब 29 साल बाद सड़क 2 रिलीज हुई है. फिल्म में रवि का किरदार अभी भी वैसा ही रखा गया है, बस आर्या ( आलिया), विशाल ( आदित्य रॉय कपूर) जैसे कुछ और किरदार जोड़ दिए गए हैं. इस बार फिल्म में अंधभक्ति या कह लीजिए अंधविश्वास पर जोर दिया गया है. पूरी कहानी इसी मुद्दे के इर्द-गिर्द घूमती है. ज्ञान प्रकाश ( मकरंद देशपांडे) एक बाबा है जो लोगों को ये बताता है कि वो भगवान से बात कर सकता है. अब आर्या के मन में भी यही डाला गया है कि उसकी मां की मौत भगवान चाह रहे थे. वो कैंसर से पीड़ित थी. लेकिन मॉर्डन जमाने की आर्या ये मानने को तैयार नहीं कि उसकी मां ऐसे ही उसे अलविदा कह चली गई. उसे अहसास हो जाता है कि उसकी मां की मौत इस बाबा की वजह से हुई है.

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कहानी में रवि द टैक्सी ड्राइवर की एंट्री भी तब होती है जब आर्या को कैलाश मानसरोवर जाना होता है. आर्या के साथ उसका बॉयफ्रेंड विशाल भी साथ चलता है. दोनों आर्या और विशाल को विश्वास है कि अगर हर कोई एकजुट हो जाए तो इन फेक बाबाओं का धंधा बंद किया जा सकता है. इसी उम्मीद के साथ वो दोनों रवि संग इस यात्रा पर निकल जाते हैं. बीच-बीच में रवि की पूजा संग प्रेम कहानी को भी दिखाया जाता है. वहीं 29 साल पुराने लम्हों को ताजा करने की कोशिश की जाती है.

खैर उस यात्रा के दौरान रवि, आर्या को अपनी बेटी समान प्यार करने लगते हैं. आर्या भी उन्हें ना सिर्फ अपनी जिंदगी में काफी तवज्जो देती है बल्कि कई मौकों पर उनकी सलाह भी मानती है. आर्या ने अपनी पूरी आपबीती रवि को बताई होती है. वो अपने मिशन के साथ रवि को भी जोड़ लेती है. अब आगे की कहानी बस यही है कि कैसे रवि, आर्या और विशाल संग उस फेक बाबा का राज खोलते हैं. कैसे लोगों को अंधविश्वास से ऊपर उठाया जाता है.

महेश भट्ट से कहां हुई चूक?

महेश भट्ट की ये खासियत हमेशा से रही है कि उनकी फिल्मों में कोई ना कोई इमोशन तो जरूर निखरकर सामने आता है. लेकिन सड़क 2 बनाते समय लगता है खुद महेश भट्ट भी कनफ्यूज हो गए कि उन्हें इस फिल्म को किस जॉनर में रखना है. इस सिंपल सी कहानी में उन्होंने सस्पेंस भी डाला है, इमोशन भी डाला है, एक्शन की भी भरमार कर दी है और तो और कई जगहों पर कुछ संदेश देने की भी कोशिश की है. लेकिन अफसोस इतने सारे पहलुओं को एक ही फिल्म में डालना खराब फैसला था. सड़क 2 की कहानी में बिखराव है. किरदार कई, कहानी में शेड कई लेकिन सब एकदम दिशाहीन. सड़क पर आलिया-संजय और आदित्य की गाड़ी तो चलती रहेगी लेकिन आप कहीं पीछे छूट जाएंगे.

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एक्टिंग

महेश भट्ट की इस फिल्म में कलाकारों की भरमार है, लेकिन अगर हम कहे नाम बड़े और दर्शन छोटे, तो ये गलत नहीं होगा. सड़क 2 को देख यहीं समझ आता है कि पिता की फिल्म में बेटी का टैलेंट वेस्ट कर दिया गया है. आलिया पूरी फिल्म में ना सिर्फ कमजोर लगी हैं बल्कि अपने किरदार से भी कोसों दूर नजर आई हैं. आदित्य रॉय कपूर का तो फिल्म में होना ना होना एक समान लगता है. वो सिर्फ फिल्म में गाना गाने के लिए रखे गए हैं. इस फिल्म में सिर्फ संजय दत्त कुछ हद तक देखने लायक लगे हैं. अब हम उस डिबेट में तो नहीं जाएंगे कि उन्हें क्या करने को दिया गया, लेकिन जैसा भी उन्होंने किया वो दमदार कहा जाएगा. एक्टर ने इस फिल्म में अपनी तरफ से पूरा न्याय किया है. बाबा के रोल में मकरंद देशपांडे का काम ठीक कहा जाएगा. उन्होंने कुछ हद तक जरूर उस किरदार में ढलने की कोशिश की है, लेकिन हमने उनके बेहतरीन रोल इससे पहले देखे हैं.

डायरेक्शन

सड़क 2 का दिशाहीन होना, कहानी में बिखराव दिखना और तो और आलिया जैसे टैलेंट का वेस्ट होना, इस सब का क्रेडिट महेश भट्ट को ही देना पड़ेगा. उन्होंने लंबे समय बाद डायरेक्शन की कुर्सी जरूर संभाली है, लेकिन उनका वो अंदाज, स्टाइल मिसिंग है. फिल्म का क्लाइमेक्स तो ऐसा रखा गया है कि मानो आप एकता कपूर का कोई सीरियल देख रहे हैं.

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फिल्म में ड्रामा बहुत है, लेकिन ओवर ड्रामा उससे भी ज्यादा है. यही कहा जा सकता है कि इस दिशाहीन सड़क पर अगर आपको ट्रैवल करना है तो अपने रिस्क पर कीजिए.

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